मामाजी का प्रेम

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कट आउट क्यों नहीं लगवा लेते नेता

अभी तक पूरी तरह से उपेक्षित जबलपुर के प्रति अचानक से प्रदेश के मुखिया मामाजी का प्रेम उमड़ पड़ा है हर दूसरे दिन मामा जी प्लेन से डुमना पर उतरते हैं पांच मिनट रुकते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं ,शाम को फिर पांच मिनट के लिए उनका हवाई जहाज डुमना में लैंड करता है और फिर फुर्र हो जाता है, शहर के नेता करें भी तो क्या करें मुख्यमंत्री आया है तो स्वागत तो करना ही पड़ेगा, हर दूसरे दिन तैयार होकर फूलों का गुलदस्ता लेकर डुमना जाना पड़ता है और शाम को फिर वही प्रक्रिया दोहराना पड़ती है, लेकिन अब नेताओं ने अपनी अपनी पारी बांध ली है कि सुबह ये दस नेता मामा जी का स्वागत करेंगे, उन्हें गुलदस्ता देंगे और शाम को दूसरे दस नेता उनको विदाई देंगे फोटो का भी ये हाल है कि एक बार फोटो खिंचवा ली है और हर बार उसी का यूज़ अखबारों में हो जाता है क्योंकि जगह भी वही है, लोग भी वही हैं मामा जी वही हैं और गुलदस्ता भी वही है, इसलिए ज्यादा झंझट की जरूरत नहीं है लेकिन अपनी एक सलाह और है अपने शहर के नेताओं को।

अपने-अपने कट आउट बनवा लो बड़े-बड़े हाथ में गुलदस्ता लिए हुए और डुमना में अंदर लगवा दो मुख्यमंत्री जी आएंगे हर एक नेता के कटआउट के पास से जब गुजरेंगे तो उन्हें लगेगा कि हर नेता उन्हें गुलदस्ता भेंट कर रहा है, आने जाने की झंझट भी खत्म हो जाएगी और मामा जी को भी सहूलियत हो जाएगी वरना कोई ना कोई शिकायत तो नेता करता ही है ये अलग बात है कि उनकी शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है यह किसी को नहीं मालूम। अब देखो ना एक बड़े दमदार विधायक शराब सिंडिकेट का लगातार विरोध कर रहे हैं लेकिन सिंडीकेट का बाल भी बांका नहीं हो रहा इसलिए किसी भी चीज का विरोध करने के पहले ऊपर वालों से पूछ लेना चाहिए कि हम इसका विरोध करेंगे आप कार्यवाही करोगे या नहीं यदि हां है तब तो विरोध करना चाहिए अन्यथा बेज्जती के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगने वाला।

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