Election Updates -भाजपा ने तेलंगाना विस चुनाव के लिए शेष 14 उम्मीदवारों की सूची जारी की

WhatsAppFacebookTwitterLinkedIn

हैदराबाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/ BJP) ने 30 नवंबर को तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए शुक्रवार को शेष 14 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी।

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 11 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम को अंतिम रूप दिया है वहीं तीन सीटों वानापर्थी, चंद्रायणगुट्टा और बेल्लमपल्ली के उम्मीदवारों में बदलाव किया है। वानापर्थी में अनुगना रेड्डी को अस्वधाम रेड्डी की जगह उम्मीदवार बनाया गया है और बेल्लमपलली से के इमोजी को प्रत्याशी घोषित किया गया है। इसके साथ ही सत्यनारायण मुदिराज की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के मद्देनजर के महेंद्र उनके स्थान पर चंद्रयानगुट्टा निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार होंगे।

भाजपा ने तेलंगाना में 111 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किये हैं तथा शेष आठ सीटें गठबंधन के तहत जनसेना पार्टी को आवंटित की गयी हैं।

आज घोषित 14 उम्मीदवारों की सूची के मुताबिक बेल्लमपल्ली से के इमोजी, पेद्दापल्ली से दुग्याला प्रदीप राव, संगारेड्डी से राजेश्वर राव, नरसंपेट से पुल्लाराव देवराकाद्र, कोंडा से प्रशांत रेड्डी, नामपल्ली से राहुल चंद्रा, छावनी से गणेश नारायण, सेरिलिंगमपल्ली से रविकुमार यादव, मल्काजगिरि से रामचन्द्र राव, मेडचल से एनुगु सुदर्शन रेड्डी, वानापर्थी से अनुगना रेड्डी, चंद्रायनगुट्टा से के महेंद्र, मधिरा से विजयाराजू और आलमपुर से राजगोपाल भाजपा के उम्मीदवार होंगे।

रायसेन : चार विधानसभा सीटें, सभी पर कड़ा मुकाबला

रायसेन, राजधानी भोपाल से सटे मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की चार विधानसभा सीटों में से तीन हाईप्रोफाइल सीटों सांची, सिलवानी और भोजपुर पर इस बार जहां मौजूदा और पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है, वहीं एक सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने बिल्कुल नए चेहरे को उतार कर इस मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

जिले की सबसे हाईप्रोफाइल सीट अनुसूचित जति सुरक्षित सांची है, जहां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डा प्रभुराम चौधरी की प्रतिष्ठा दांव पर है। हालांकि राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यहां इस बार ‘नाराज भाजपा’ और ‘महाराज भाजपा’ का फैक्टर दिखाई दे रहा है। अक्सर डॉक्टरों के मुकाबले की प्रत्यक्षदर्शी रही इस सीट पर भाजपा ने एक बार फिर मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी पर भरोसा जताया है। वहीं पार्टी के इस निर्णय से पूर्व मंत्री और यहां से कई बार विधायक रहे डा गौरीशंकर शेजवार की नाराजगी भी साफ दिख रही है।

भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली और सांची स्तूपों के लिए दुनिया भर में मशहूर इस सीट पर 2020 में राज्य में हुए भारी दलबदल के बाद उपचुनाव कराया गया, जिसमें उस समय भाजपा में शामिल हुए डॉ प्रभुराम चौधरी को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के मदनलाल को 63 हजार 809 मतों के अंतर से हरा दिया। इस सीट पर यह सबसे अधिक मतों से जीत का रिकार्ड भी है। कांग्रेस ने इस बार प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सीजी गौतम को टिकट दिया है।

सांची विधानसभा सीट पर कुल वोटर्स दो लाख 53 हजार 369 हैं जिनमें 1,33,510 पुरुष तो 1,19,852 महिला मतदाताओं के अलावा सात अन्य (थर्ड जेंडर) मतदाता भी शामिल हैं।

डॉक्टर चौधरी के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस से बड़ी संख्या में उनके समर्थकों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया, लेकिन यहां पार्टी अब दो खेमों में बंट गई है, जिसका असर इस चुनाव में साफ देखा जा रहा है। डॉ चौधरी के सामने भाजपा के पूर्व मंत्री डा गौरीशंकर शेजवार के असंतुष्ट खेमे के कई दिग्गज नेता और कार्यकर्ता भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं।

यहां अहिरवार समाज के 30 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। भाजपा के डॉक्टर प्रभुराम चौधरी और कांग्रेस के डा गौतम इसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जिले की भोजपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का लगातार कब्जा बना हुआ है। हालांकि इस बार भजपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री और विधायक सुरेंद्र पटवा के खिलाफ उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता नाराज माने जा रहे हैं। श्री पटवा पर चेक बाउंस के प्रकरण भी बड़ी संख्या में न्यायालय में विचाराधीन हैं, जिसके चलते आपराधिक मामले छुपाने को लेकर उनके नामांकन में आपत्ति भी लगाई गई थी। मामले में सुनवाई के बाद उन्हें चुनाव लड़ने की पात्रता दी गई।

इस सीट पर इस बार एंटी इनकंबेंसी एक बड़ा कारक माना जा रहा है। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा चुनाव लड़कर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। 1990 के बाद से अब तक हुए 8 चुनावों में बस एक बार ही कांग्रेस को जीत मिली है, जबकि 7 बार भाजपा विजयी हुई है।

कांग्रेस ने इस बार यहां से राजकुमार पटेल को टिकट दिया है। 2018 के विधानसभा चुनाव में श्री पटवा ने एकतरफा मुकाबले में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी को 29,486 मतों के अंतर से हरा दिया था। इस सीट पर कुल 2,45,313 वोटर्स हैं जिनमें 1,28,967 पुरुष तो 1,16,332 महिला के अलावा 14 अन्य मतदाता हैं।

भोजपुर क्षेत्र का मंडीदीप राजधानी भोपाल से सटा हुआ है और जिले का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। यहां धागा बनाने वाली कई बड़ी फैक्ट्रियों समेत एक हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां है। भोजपुर क्षेत्र में ही जिले का सबसे बड़ा बांध बारना डेम है।

जिले की उदयपुरा सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की जंग है। किरार और राजपूत बाहुल्य इस सीट से भाजपा ने प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र पटेल किरार के रूप में नए चेहरे को अवसर दिया है। हालांकि टिकिट वितरण के तुरंत बाद ही पार्टी के भीतर ही उनका खुलकर विरोध सामने आया था। वहीं कांग्रेस ने विधायक नरेंद्र पटेल गड़रवास पर ही दुबारा भरोसा जताया है।

ये क्षेत्र पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा की कर्मभूमि और आचार्य रजनीश ओशो की जन्मभूमि के रूप में भी जानी जाती है। यह सीट होशंगाबाद (नर्मदापुरम) लोकसभा क्षेत्र में आती है। 2008 के परिसीमन के बाद यह उदयपुरा विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। इस सीट पर अभी कांग्रेस का कब्जा है। इस सीट पर कांग्रेस के देवेंद्र पटेल गडरवास 2018 में विधायक चुने गए। 20 साल यानी 2003 से इस सीट पर एक बार कांग्रेस तो एक बार भाजपा चुनाव जीतती आई है।

साल 1985 के विधानसभा चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती विमला शर्मा भी यहां से चुनाव लड़ीं और उन्होंने भाजपा के कमलसिंह लोधी को करीब 16 हजार मतों से शिकस्त दी थी। चुनाव में कुल वोटर्स की संख्या 2,62,082 है, जिसमें पुरुष 1,36,690 तो महिला मतदाताओं की संख्या 1,25,387 है।

उदयपुरा विधानसभा सीट बरेली और उदयपुरा तहसील मिला कर बनाई गई है। यह क्षेत्र धान और अरहर की फसल की पैदावार के लिए जानी जाती है। बारना डेम से यहां की अधिकाश जमीनों को पानी मिलता है। यहां सबसे ज्यादा नर्मदा नदी का किनारा है। बरेली में छींद धाम मंदिर है। हनुमानजी के इस मंदिर में देशभर से लोग दर्शन करने आते हैं। यह क्षेत्र पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा की कर्मभूमि के रूप में अपनी पहचान रखता है। वह यहां 3 बार 1957, 1962 और 1967 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

इसके अलावा मध्य प्रदेश के विलीनीकरण आंदोलन में उदयपुरा में नर्मदा नदी के तट पर बोरास घाट पर सबसे बड़ा आंदोलन हुआ जिसमें भोपाल रियासत को भारत गणराज्य में शामिल करने को लेकर 14 जनवरी 1948 को हुए आंदोलन में 4 लोग शहीद हो गए थे. इनकी स्मृति में आज भी 14 जनवरी को शहीद दिवस मनाई जाती है।

रायसेन जिले की सिलवानी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल और भाजपा के पूर्व मंत्री रामपाल सिंह के बीच कांटे की टक्कर है। भाजपा के दबदबे बाली इस सीट पर पार्टी पिछले 2 बार से काबिज है। यह सीट भले ही सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हो लेकिन इस सीट पर एससीएसटी वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इस बार यहां मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। सिलवानी की बेगमगंज तहसील में बीना नदी पर बनाए जा रहे बांध के कारण आबादी क्षेत्र प्रभावित हो रहा है, जिसका नागरिक विरोध कर रहे हैं। इसका खामियाजा भी भाजपा को उठाना पड़ सकता है। परिसीमन के बाद यहां हुए 2008 के चुनाव में रामपाल सिंह को उमा भारती की जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार देवेंद्र पटेल ने आसानी से हरा दिया था। उस समय चुनाव में कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी जसवंत सिह रघुवंशी का तो नामांकन ही निरस्त हो गया था।

वर्तमान में यहां पर 2,13,998 मतदाता हैं, जिनमें 1,13,544 पुरुष तो 1,00,451 महिला शामिल हैं। यह क्षेत्र कीमती सागौन के घने जंगल होने के कारण लकड़ी तस्करी के लिए दुनियाभर में कुख्यात है।

हरदा में कमल पटेल कांटे के मुकाबले में

हरदा, मध्यप्रदेश की हरदा जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्रों में एक बार फिर मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच है। हरदा विधानसभा क्षेत्र में राज्य के कृषि मंत्री कमल पटेल भी कांटे के मुकाबले के बीच अपनी विजय सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगाते हुए दिख रहे हैं।

राज्य के दक्षिणी हिस्से में नर्मदा नदी के तट पर स्थित हरदा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी कमल पटेल का मुख्य मुकाबला कांग्रेस के डॉक्टर रामकिशोर दोगने से है। हालाकि क्षेत्र में कुल 11 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कृषि मंत्री श्री पटेल वर्ष 1993 से यहां भाजपा के टिकट पर लगातार सातवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। श्री पटेल को वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पहली बार प्रत्याशी बने डाॅक्टर रामकिशोर दोगने से पराजय झेलना पड़ी थी। हालाकि वर्ष 2018 के पंद्रहवें विधानसभा चुनाव में श्री पटेल ने एक बार फिर सामने आए कांग्रेस प्रत्याशी श्री दोगने को लगभग साढ़े छह हजार मतों से शिकस्त देकर पुरानी पराजय का बदला ले लिया। श्री दोगने इस बार लगातार तीसरी बार श्री पटेल को चुनौती दे रहे हैं।

श्री पटेल के समक्ष पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुरेंद्र जैन भी एक चुनौती के रूप में सामने दिखायी दे रहे हैं। श्री जैन प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में नहीं हैं, लेकिन वे वर्षों तक भाजपा नेता के रूप में श्री पटेल के साथी और सहयोगी रहे हैं। वे भी इस बार भाजपा से टिकट के दावेदार थे और चुनाव में ऐन वक्त पर उन्होंने कांग्रेस का दामन थामकर श्री पटेल की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। स्वाभाविक तौर पर श्री जैन कांग्रेस के पक्ष में कार्य कर रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए श्री पटेल को दिनरात एक करना पड़ रहा है। अब मतदान की तिथि 17 नवंबर में कुछ ही दिन शेष रहते चुनाव प्रचार अभियान चरम पर पहुंच रहा है। पिछले लगभग 18 सालों से सत्ता में रहने के कारण भाजपा को तथाकथित सत्ताविरोधी रुझान से जूझना पड़ रहा है।

हरदा जिले की एक अन्य सीट टिमरनी अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है और यहां रोचक मुकाबला “चाचा भतीजे” के बीच देखने को मिल रहा है। भाजपा प्रत्याशी संजय शाह और उन्हीं के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत शाह सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस क्षेत्र में कुल सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

चुनावी सभाओं की बात की जाए, तो कांग्रेस सांसद नकुलनाथ हरदा विधानसभा क्षेत्र में काग्रेसी प्रत्याशी डा रामकिशोर दोगने के समर्थन में एक सभा को संबोधित कर चुके हैं, वहीं केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी हरदा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी श्री पटेल के समर्थन में एक जनसभा ले चुके हैं। इसी प्रकार टिमरनी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी संजय शाह के समर्थन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक जनसभा को संबोधित कर चुके हैं। भाजपा जहां केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को आगे रख रही है, तो कांग्रेस भाजपा के खिलाफ सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को मुख्य औजार के रूप में सामने लाती हुयी प्रतीत हो रही है।

हरदा जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्रों हरदा और टिमरनी में कुल 4,25,595 मतदाता हैं, जिनमें 2,19,360 पुरुष, 2,06,229 महिला और छह थर्ड जेंडर शामिल हैं। इसमें से हरदा विधानसभा में कुल 2,35,975 मतदाता है, जिनमें 1,21,566 पुरुष, 1,14,404 महिला और पांच थर्ड जेंडर शामिल हैं। टिमरनी विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,89,620 मतदाता हैं, जिनमें 97,794 पुरुष, 91,825 महिला और एक थर्ड जेंडर मतदाता शामिल है। जिले की मतदाता सूची में 3,997 दिव्यांग मतदाता चिन्हित किये गये हैं। जिले में कुल 517 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं, जिनमें से हरदा विधानसभा में 274 और टिमरनी विधानसभा क्षेत्र में 243 मतदान केन्द्र हैं। सभी केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिए 17 नवंबर को मतदान के साथ ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद हाे जाएगी। मतों की गिनती तीन दिसंबर को होगी। जिला प्रशासन निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से मतदान कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए उसने सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।

अजमेर जिले की आठ सीटों में तीन में सीधा एवं पांच में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना

अजमेर, राजस्थान में आगामी 25 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में अजमेर जिले की आठ विधानसभा क्षेत्रों में अजमेर दक्षिण, केकड़ी एवं नसीराबाद में सीधा मुकाबला तथा अजमेर उत्तर, किशनगढ़, ब्यावर, पुष्कर एवं मसूदा में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार नजर आ रहे हैं।

अजमेर दक्षिण सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार अनीता भदेल और कांग्रस प्रत्याशी एवं नगर निगम में प्रतिपक्ष नेता कांग्रेस की द्रौपदी कोली के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। यहां कांग्रेस के बागी बने हेमंत भाटी ने पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव मैदान से हट गए।

केकड़ी में कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री डा. रघु शर्मा का सीधा मुकाबला भाजपा के शत्रुघ्न गौतम से है। नसीराबाद में पूर्व मंत्री सांवरलाल जाट के पुत्र एवं भाजपा प्रत्याशी विधायक रामस्वरूप लांबा का मुकाबला कांग्रेस के प्रत्याशी एवं छात्र नेता शिवराज सिंह गुर्जर से है। अजमेर उत्तर में सर्वाधिक रोचक मुकाबले की सम्भावना है जहां भाजपा मूल के पार्षद ज्ञान सारस्वत निर्दलीय के रुप में चुनाव मैदान में डटे हैं जो भाजपा प्रत्याशी वासुदेव देवनानी के लिये मुश्किले खड़ी कर सकते हैं। कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह रलावता है जो पिछले चुनाव में श्री देवनानी के सामने चुनाव हार गए थे लेकिन इस बार पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया है।

ब्यावर में भाजपा के शंकर सिंह रावत का मुकाबला कांग्रेस के पारस जैन पंच से है निर्दलीय मनोज चौहान एवं इन्दर सिंह बागावास मुकाबले को रोचक बना सकते है। पुष्कर में भाजपा के सुरेश सिंह रावत का मुकाबला प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक नसीम अख्तर से है लेकिन यहां पुष्कर के ही पूर्व विधायक डा. गोपाल बाहती के चुनाव में ताल ठोकने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय बन सकता है।

किशनगढ़ में भाजपा ने सांसद भागीरथ चौधरी को मैदान में उतारा है जहां उनका मुकाबला भाजपा छोड़कर आये युवा छात्र नेता विकास चौधरी से है, जिनके समर्थन में मुख्यमंत्री गहलोत सभा भी कर चुके हैं लेकिन विधायक एवं मार्बल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुरेश टांक के भी चुनाव मैदान में होने से यहां भी चुनावी मुकाबले के त्रिकोणीय आसार नजर आ रहे है। मसूदा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने विधायक राकेश पारीक पर दांव खेला है जिनका मुकाबला मसूदा के पूर्व प्रधान भाजपा उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह कानावत से है लेकिन कांग्रेस से नाराज होकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा)

से वाजिद खान चीता के मैदान में डटे रहने से मुकाबला त्रिकोणीय बनने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान चुनाव में अजमेर जिले में भीम ट्राइबल कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जन शौर्य पार्टी, जननायक जनता पार्टी, राइट टू रिकाल पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी आफ इण्डिया ( अठावले), अम्बेडकर राईट पार्टी आफ इण्डिया, रिपब्लिकन पार्टी आफ इण्डिया, नेशनल फ्यूचर पार्टी आफ इण्डिया ने भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे है। पार्टियों के अलावा निर्दलीय भी अपना चुनावी भाग्य आजमा रहे है।

अजमेर जिले की आठ विधानसभा सीटों में सीटों पर 88 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे है। इनमें सर्वाधिक पुष्कर में 17 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे है जबकि सबसे कम आठ उम्मीदवार केकड़ी में हैं। इसके अलावा अजमेर उत्तर में एवं किशनगढ़ में 12-12, ब्यावर 11, नसीराबाद 10, तथा अजमेर दक्षिण एवं मसूदा में 9-9 उम्मीदवार अपना चुनावी भाग्य आजमा रहे हैं।

राजस्थान विधानसभा चुनाव में 1875 उम्मीदवार लड़ रहे हैं चुनाव

जयपुर, राजस्थान में आगामी 25 नवंबर को होने वाले विधानसभा आम चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस, विपक्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं विभिन्न राजनीतिक दलों सहित 1875 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि विधानसभा आम चुनाव-2023 में 200 विधानसभा क्षेत्रों के लिए नामांकन वापसी के बाद अब 1875 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 1692 पुरुष उम्मीदवार हैं जबकि 183 महिला प्रत्याशी शामिल हैं।

चुनाव के लिए गत 30 अक्टूबर से नामांकन पत्र जमा करने की प्रक्रिया शुरू हुई और छह नवंबर तक दौ सौ विधानसभा क्षेत्रों के लिए 2605 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए। सात नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच की गई। जिसमें 240 नामांकन पत्र निरस्त किए गए हैं तथा 2365 प्रत्याशियों के नामांकन सही पाये गये।

इनमें से 490 उम्मीदवारों के अपने नामांकन पत्र वापस ले लेने के बाद अब 1875 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपना चुनावी भाग्य आजमा रहे हैं। इनमें जयपुर की झ़ोंटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं जबकि सबसे कम दौसा जिले की लालसोट से केवल तीन उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव की मतगणना आगामी तीन दिसंबर को की जायेगी।

Share Reality:
WhatsAppFacebookTwitterLinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *