Politics -संकट में केवल वह शंकरदेव के जन्मस्थल पर नहीं जा सकते : राहुल

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नगांव (असम), असम के नगांव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी congress politician rahul gandhi ने इस बात पर सवाल उठाया कि कानून-व्यवस्था संकट के दौरान सभी लोग वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान पर जा सकते हैं, लेकिन केवल ‘वह नहीं जा सकते।’ Rahul gandhi in Assam trying to fetch some votes on loose ground.

गांधी को सत्र (शंकरदेव के जन्मस्थान) जाते समय हैबरगांव में रोका गया था जहां उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के साथ धरना दिया जबकि पार्टी सांसद गौरव गोगोई और बटद्रवा विधायक शिवमोनी बोरा मुद्दे को सुलझाने के लिए जन्मस्थान की ओर बढ़े।

उनके लौटने के बाद गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि वह शंकरदेव के दर्शन में विश्वास करते हैं क्योंकि ”हम लोग लोगों को एक साथ लाने और नफरत फैलाने में विश्वास नहीं करते।” उन्होंने कहा, ”वह (शंकरदेव) हमारे लिए एक गुरु की तरह हैं और हमारा मार्गदर्शन करते हैं। इसलिए जब मैं असम आया तो मैंने सोचा था कि मुझे उनके प्रति अपना आभार प्रकट करना चाहिए।”

गांधी ने कहा कि उन्हें 11 जनवरी को शंकरदेव के जन्मस्थान का दौरा करने का निमंत्रण मिला था लेकिन ”रविवार को हमें बताया गया कि वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति है।” उन्होंने कहा, ”इलाके में कानून-व्यवस्था की कुछ समस्या है और यह अजीब है कि गौरव गोगोई तथा सभी लोग वहां जा सकते हैं लेकिन केवल राहुल गांधी नहीं जा सकते।”

उन्होंने कहा, ”मुझे नहीं पता लेकिन कुछ कारण हो सकते हैं। मौका मिलने पर मैं बटद्रवा जाऊंगा। मेरा मानना है कि असम और पूरे देश को शंकरदेव द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलना चाहिए।”

राहुल को शंकरदेव के जन्मस्थान जाने से रोकने के लिए मोदी ने डाला असम सरकार पर दबाव : रमेश

नगांव (असम), कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को दावा किया कि राहुल गांधी को वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थल का दर्शन करने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम सरकार पर दबाव डाला।

राहुल को आज सुबह हैबोरगांव में रोक दिया गया, जिसकी वजह से वह जन्मस्थल पर नहीं जा सके। राहुल को रोकने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक वहीं हैबोरगांव में धरने पर बैठ गए।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि उन्होंने 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा से पहले राहुल से ‘सत्र’ में नहीं जाने का अनुरोध किया है। इसके बाद श्री शंकरदेव सत्र की प्रबंधन समिति ने घोषणा की थी कि अपराह्व तीन बजे से पहले कांग्रेस नेता को परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

रमेश ने कहा, ”हमें 11 जनवरी को सत्र में जाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन अचानक 20 जनवरी को हमें बताया गया कि राहुल केवल राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही दर्शन कर सकते हैं।” उन्होंने कहा, ”स्पष्ट है कि ‘अहंकारी शक्तियां कैमरे का पूरा ध्यान अपने ऊपर चाहती हैं और असम सरकार पर यह कदम उठाने के लिए दबाव डाला गया।”

रमेश ने कहा, ”जब अधिकारियों ने राहुल को बताया कि कानून-व्यवस्था की समस्या हो सकती है, तो उन्होंने (राहुल ने) अकेले जाने की बात कही लेकिन उसे भी अस्वीकार कर दिया गया। यह स्पष्ट है कि राहुल को उस पवित्र स्थल पर जाने से रोकना उनकी सोची-समझी नीति है जिसका सभी के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व है। ”

कांग्रेस नेता के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि बटद्रवा सत्र परिसर में कई राम भक्त मौजूद हैं और यहां कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है लेकिन ”हमने उन्हें आश्वासन दिया कि राहुल के अलावा कोई नहीं जाएगा।

इसके बाद अधिकारियों ने कई फोन किए और लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई व स्थानीय कांग्रेस विधायक सिबामोनी बोरा को मुद्दे को सुलझाने और राहुल के मंदिर में दर्शन को सुनिश्चित करने के लिए प्रबंध समिति के सदस्यों से बात करने के लिए सत्र में जाने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा, ”गोगोई और बोरा के सत्र से लौटने तक राहुल धरना जारी रखेंगे।”

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि प्रबंध समिति के अनुसार राहुल अपराह्न तीन बजे के बाद दर्शन कर सकते हैं लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि हिमंत विश्व शर्मा ढाई बजे आकर कह दें कि कानून और व्यवस्था की स्थिति के कारण उन्हें दर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रमेश ने कहा कि मुद्दा सुलझने के बाद यात्रा अपने सामान्य मार्ग पर जारी रहेगी।

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