Exclusive -स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज समाधि मन्दिर मूर्ति स्थापना महोत्सव में शामिल हुए श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज

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Haridwar / Uttarakhand , सप्तऋषि मैदान में भारत माता मन्दिर के संस्थापक, पद्मभूषण से अलंकृत निवृत्त शंकराचार्य, श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय-ब्रह्मनिष्ठ, अनन्तश्रीविभूषित स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज के तीन दिवसीय भव्य समाधि मन्दिर मूर्ति स्थापना महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को भी दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा लगा रहा। महोत्सव के दूसरे दिन धर्माचार्यों, राज्यपालों व मुख्यमंत्रियों ने गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज के कार्यों को याद कर उन्हें नमन किया।

सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मन्दिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज भी गुरुवार को महोत्सव में शामिल हुए।

जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर, भारत माता मन्दिर–समन्वय सेवा ट्रस्ट एवं भारत माता जनहित ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज का पूरा जीवन सनातन धर्म, राष्ट्रभक्ति व मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज ने मानव कल्याण के जो कार्य किए, वे सदैव याद किए जाएंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज जैसे सच्चे तपस्वी संत व महापुरुष धर्म की स्थापना तथा मानवता के कल्याण के लिए ही भगवान के दूत के रूप में पृथ्वी पर आते हैं और हमेशा के लिए अपनी छाप छोड़ जाते हैं।

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज का जीवन सभी को प्रेरित करता रहेगा। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज जैसे महापुरुष ही समाज, राष्ट्र व विश्व का कल्याण कर सकते हैं।

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि भगवद्पादाचार्य परम्परा के दिव्य संवाहक, भारत माता मन्दिर के संस्थापक, पद्मभूषण से अलंकृत निवृत्त शंकराचार्य, श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय-ब्रह्मनिष्ठ, अनन्तश्रीविभूषित स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज भारत ही नहीं, अपितु विश्व के ऐसे महापुरुष हैं, जिन्होंने राष्ट्र एवं भारतीय संस्कृति की एकता के लिए जो कार्य किए, उसकी पूरे विश्व में मिसाल दी जाती है।

रामचरितमानस को आदर्श मानते हुए उन्होंने समन्वय का सूत्र दिया और इसी भावना व संकल्प से हरिद्वार के सप्त सरोवर क्षेत्र में गंगातट पर पहले भारत माता मन्दिर की स्थापना कर भारत ही नहीं, पूरे विश्व में सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों के भीतर चेतना जगाने का कार्य किया।

भारत माता मन्दिर–समन्वय सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि महाराज ने श्री संत ज्ञानेश्वर गुरुकुल, पुणे के माध्यम से विश्वविख्यात विचारक आदरणीय पद्मश्री वामदेव शास्त्री (डेविड फ़्रॉले) तथा सूर्य भारती पुनरुत्थान विद्यापीठ की कुलाधिपति इंदुमती काटदरे को समाज एवं राष्ट्र के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया।

जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, निर्मल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ज्ञानदेव महाराज, आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर बालकानंद महाराज, निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती महाराज, योगऋषि स्वामी रामदेव महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, जूना अखाड़े के महासचिव श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, सचिव व दिल्ली संत महामंडल के संगठन मंत्री महामंडलेश्वर कंचन गिरि महाराज, सुदर्शन न्यूज़ ग्रुप के प्रमुख सुरेश चव्हाणके आदि ने भी स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज द्वारा किए गए कार्यों को याद किया।

कार्यक्रम का संचालन महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद गिरि महाराज एवं जूना अखाड़ा के सचिव देवानंद सरस्वती महाराज ने किया। जगद्गुरु, सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, थानापति, कोतवाल, मंत्री, सांसद, विधायक आदि भी मौजूद रहे।

महोत्सव का शुभारम्भ बुधवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने किया था तथा इसका समापन शुक्रवार को होगा।

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