Special Report – जब हाथ की रेखाओं ने बदल दी जीवन की तस्वीर

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May 18 is celebrated as International Palmistry Day worldwide. New Delhi also witnessed a special program organized at Bharat Mandapam premises by world renowned Palmist astrologer and Founder of social reform and inventive institution Palmveda Foundation -Shri Laxmikant Tripathi Ji. This was the 10th yearly event in constant years. Honorable Justice Sudhir Agarwal Ji was the Chief Guest among the Guests of honor who is also Judicial member of NGT Delhi.

अगर मैं कहूं कि दुनिया आपकी मुट्ठी में ही है तो शायद आप ना माने किंतु यह सच है कि आपकी अपनी रेखाएं आपको कामयाबी के ऐसे मुकाम पर ले जा सकती हैं जिसकी प्रतीक्षा और लालसा आप हमेशा करते रहे हैं जरूरत है तो बस यकीन करने की। यदि आप ज्योतिष, हस्तरेखा के विशेषज्ञ से सही जानकारी ले कर आगे बढ़ते हैं तो हस्तरेखा शास्त्र का यह ज्ञान आपके रास्ते को रोशन कर सकता है आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचा सकता है। – पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी 

किस्मत वाली रेखा – विश्व प्रसिद्ध हस्तरेखा विज्ञानी पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी जी द्वारा 10 वें अंतरराष्ट्रीय हस्तरेखा दिवस का भव्य आयोजन  18 मई 2025  को भारत की राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम सभागार में किया गया। जिसमें देश के जानेमाने गणमान्य उपस्थित रहे। आयोजन का शुभारंभ प्रातः 11 बजे हुआ सनातन परंपरा के अनुरूप सरस्वती वंदना एवं ज्ञान दीप प्रज्ज्वलित कर के किया गया।

इस बार कार्यक्रम की थीम Indian Family a Pillar For Global Peace संयुक्त परिवार एवं वरिष्ठ नागरिक सम्मान रखी गई थी जिसपर मीडिया, राजनीति, व्यवसाय, धर्म, न्याय क्षेत्र के अग्रज अतिथिगणों ने अपने विचार प्रस्तुत किए । देश के बड़े न्यायिक मामलों में ऐतिहासिक फैसले सुनाने के लिए सुप्रसिद्ध जस्टिस श्री सुधीर अग्रवाल जी इस आयोजन के मुख्य अतिथि थे। उनकी तेजोमई उपस्थिति एवं भारतीय ज्योतिष हस्तशास्त्र से जुड़े अनुभवों ने कार्यक्रम को रोचक बना दिया।  

पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी जी ने भारतीय ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप , ऐतिहासिक, धार्मिक, मौलिक आधार और हर युग में इसकी सापेक्षता पर सुंदर आख्यान दिया।  हस्तरेखा विज्ञान के प्रामाणिक आधार कहां कहां देखे जाते हैं  यह किस प्रकार किसी भी व्यक्ति के जीवन में बेहतर बदलाव ला सकता है इसके विषय में भी बहुत सरल प्रकार से डिजिटल प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया। हस्तरेखा दिवस के अवसर पर पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी जी ने पॉमवेदा फाउंडेशन (Palmveda Foundation) की घोषणा की। 

हस्तरेखा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम 

नई दिल्ली, 18 मई 2025 — राजधानी के भारत मंडपम कला, साहित्य  एवं संस्कृति भवन केंद्र में शनिवार को “हस्तरेखा दिवस” (Palmistry Day) के अवसर पर एक भव्य आयोजन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की प्राचीन विज्ञान प्रणाली — हस्तरेखा शास्त्र — को जनमानस में पुनः प्रतिष्ठित करना तथा इसके वैज्ञानिक पक्ष को सामने लाना था। कार्यक्रम में देशभर से आए विख्यात हस्तरेखा विशेषज्ञों, ज्योतिषाचार्यों, शोधकर्ताओं तथा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

मुख्य आकर्षण:

हस्तरेखा परीक्षण के व्यक्तिगत प्रमाण : कार्यक्रम में आए लोगों ने हस्तरेखा परीक्षण से जुड़े अपने अनुभवों को सांझा किया कि हथेलियों की रेखाओं का विश्लेषण कर उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं — जैसे करियर, विवाह, स्वास्थ्य और वित्त — पर की गईं भविष्यवाणियाँ  किस प्रकार सत्य साबित हुई हैं ।

व्याख्यान : पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी जी ने हस्तरेखा शास्त्र के इतिहास, उसकी वैज्ञानिकता, और आधुनिक युग में उसकी प्रासंगिकता पर विचार प्रस्तुत किए। पंडित जी हस्तरेखा शास्त्र में अनुभूत शोध करते आएं हैं जिसका जीवंत उदाहरण उनके द्वारा की गईं सटीक भविष्यवाणियां हैं पंडित जी का प्रकृति से विशेष जुड़ाव रहा है कार्यक्रम में उन्होने जल,जीव ,जंतु ,जन , जीवन, कल्याण एवं संरक्षण का अहम मुद्दा भी उठाया।

उत्साहजनक जनसहभागिता:

इस आयोजन में छात्रों, शोधार्थियों, गृहिणियों, पेशेवरों सहित हर आयु वर्ग के लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कई आगंतुकों ने बताया कि उन का हस्तरेखा शास्त्र और पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी जी से शताब्दियों का नाता रहा है और कुछ ने पहली बार हस्तरेखा का गहराई से अवलोकन किया और इसे एक रोमांचक अनुभव बताया।

विशेष स्मृतियां : रोचक किस्से 

प्रसिद्ध न्यायाधीश एवं वर्तमान में विगत 4 वर्षों से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के Judicial पद पर आसीन माननीय श्री सुधीर अग्रवाल जी ने अपने जीवन में ज्योतिष के कुछ अनोखे अनुभव साझा किए। 

बेहद सरल व्यक्तिव के स्वामी जस्टिस सुधीर अग्रवाल जी बताते हैं कि किस प्रकार उनके जीवन में प्रोफेशनल फ्रंट पर बड़े बदलाव सामने आए उनके जीवन में वो हुआ जो उनकी प्रारंभिक योजना का हिस्सा नहीं था। वो विद्यार्थी जीवन में ही  सिविल  सर्जन बनना चाहते थे, फिर सिलेक्श। ना होने पर नेवी ज्वाइन करने की तैयारी की, व्यवसाय में भी कदम बढ़ाए किंतु अंततः वकालत को चुना जो बाद में जाकर उनकी रुचि रुझान का प्रमुख केंद्र बन गया । एक समय था जब अदालत में एक ही समय में उनके 100- 150 से अधिक मुकदमे चल रहे होते थे।

उनका एक ही ध्येय रहा कि दोषी को सज़ा और पीड़ित को न्याय मिलना ही चाहिए। जस्टिस सुधीर अग्रवाल जी याद करते हैं कि किस प्रकार बचपन में एक पारिवारिक सदस्य ने उन्हें कहा कि उनके हस्तरेखा इंगित करती हैं कि उनसे एक मर्डर होगा। और वर्षों बाद न्यायाधीश बनने के बाद उन्होंने एक व्यक्ति को जघन्य अपराध के मैटर में मृत्युदंड दिया था। एक अलग विधान से ही सही हुआ लेकिन हस्तरेखा में लिखा हुआ सत्य साबित हुआ।   

वरिष्ठ पत्रकार श्री विनोद सर ने अपने ज्योतिषीय अनुभव का बताया कि किस प्रकार वर्षों पहले  रामायण महोत्सव जहां विश्व की सभी रामलीलाओं का मंचन लखनऊ में हुआ था। और उनका हाथ देख कर 6 महीने में विवाह बताया गया था। उन्होंने उसको सिरे से खारिज़ कर दिया था किंतु बताए अनुसार दिसंबर से मई आने तक उनका अपनी स्वयं की पसंद से विवाह हो गया था । फिर बताया उसके बाद दूसरे राज्य में शिफ्टिंग की बात भी शत प्रतिशत सच साबित हुई थी। उन्होंने कहा कि घटनाएं जरूर घटती हैं वैज्ञानिकता के साथ आस्था को साथ रखें । राह चलते किसी को यूं ही हाथ न दिखाएं। आधारगत विद्या ही टिकती हैं। आध्यात्मिक उदाहरण में ऋषि भृगु ने जब प्रणाम ना करने पर नारायण जी को लात से प्रहार किया था। तब लक्ष्मी जी ने ब्राह्मण समाज को दरिद्रता का श्राप दिया किंतु नारायण जी ने उस श्राप को पलट दिया और ब्राह्मणों के महा ग्रन्थ भृगुसंहिता की रचना की गई । स्वर्गीय मुरली मनोहर जोशी जी ने ज्योतिष को शिक्षा पाठ्यक्रम बनाया था इस आध्यात्मिक विद्या के रूप में शामिल करवाया था।

मीडिया सलाहकार डीडी डायरेक्टर डॉ अमरनाथ अमर जी ने बताया कि उनके बेटे ने मीडिया ज्वाइन कर लिया था किंतु उपयुक्त क्षेत्र आर्मी का बताया था और आज उनका पुत्र गर्व से भारतीय सेना में सेवारत है। उनके स्वयं के लिए  पंडित जी ने भविष्यवाणी की थी राष्ट्रीय सम्मान की और उन्हें राष्ट्रपति जी द्वारा सम्मानित किया गया। ज्योतिष की विद्याएं अद्भुत हैं हाथ देख कर, रुमाल सूंघ कर, मिट्टी से, चावल से, कंकर से, पानी में मंत्र, यंत्र मस्तक, शकुन, कुंडली सबकी अपनी वैज्ञानिकता है।  वर्तमान समय में परिवार के विघटन चिंता और चिंतन का विषय हैं

दीदी भजनानंदी ने रामायण जी के श्री राम वनवास प्रसंग पर सुंदर भजन की प्रस्तुति दे कर परिवार कुटुंब के महत्व का गुणगान किया। माता पिता की सेवा सम्मान साथ से सब कठिनाइयों से पार पाया जा सकता है। रामायण के संदर्भ में परिवार का महत्व समझाया

मनीष ऋषिवर जो कि एक अंतरराष्ट्रीय व्यवसाई हैं उन्होंने कहा कि चमत्कार होते हैं रास्ता दिखाने वाला रोशनी की ओर ले जाने वाला अवश्य मिलता है यदि मन में विश्वास है। जामवंत  जी ने जैसे हनुमान जी को शक्तियां याद दिलवाई थी ऐसे ही उनको पंडित जी ने उनकी क्षमता का आंकलन किया और  उचित मार्गदर्शन किया। Palmistry को विश्वस्तर पर ले जाना ही अब उनका लक्ष्य है अगले सम्मेलन की दुबई में आयोजन की घोषणा भी की। 

कर्नल धीरेन्द्र  गुप्ता जी जो कि विश्व की प्रशंसा की सुपर पावर बनी भारतीय सेना के शूरवीर सुरक्षा स्तंभ रहे हैं और अब विगत कुछ वर्षों से समाज सुधार, विकास कार्य, थिएटर, फिल्में, टीवी कमर्शियल वृतचित्र के क्षेत्र में एक नई गरिमामय भूमिका निभा रहे हैं उन्होंने एकल परिवार और वर्तमान समय की समस्याओं पर प्रभावशाली विचार रखे। बुजुर्गों की उपेक्षा और उनका पुनः सम्मान कैसे हो। समाज की सोच को समझना होगा। पहले बुजुर्गों को परिवार का केंद्र और स्तंभ माना जाता था लेकिन बुजुर्गों से दुर्व्यवहार किया जाता है अब।  अब एकल परिवार बढ़ रहे हैं अब बुजुर्ग आर्थिक निर्भर होते जा रहे हैं उपेक्षित हैं दुर्भाग्यपूर्ण है कि नई पीढ़ी के पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित होने से माता पिता का सम्मान घटा है स्वैच्छिक आचरण चाहने वाले बच्चे ना साथ रहना चाहते हैं ना ही कोई जिम्मेदारी उठाना। शिक्षा के वेस्टर्न मॉड्यूल से भी नुकसान हुआ भारतीय पारिवारिक ढांचे का। उदासीनता, phone इंटरनेट, समय का अभाव, दिनचर्या, कार्यशैली, परिवार की अनदेखी , प्राइवेट नौकरियों, पलायन, करियर ग्रोथ के लिए परिवार से दूरी, विदेश का चाव, उपेक्षा के मूल हैं संवेदनशील भाषा की कमी है। 

कर्नल धीरेन्द्र गुप्ता जी ने सुझाव दिया कि बूढ़े शब्द की बजाय वरिष्ठ शब्द का चयन करना अधिक सम्मानजनक है स्वास्थ्य सेवाएं मानसिक स्वास्थ्य नीति निर्माण में बड़ों के अनुभव का प्रयोग किया जाना चाहिए । आयुष्मान योजना एक बेहतरीन कदम है वरिष्ठ नागरिकों के लिए। उनकी पेंशन हो, मनोरंजन केंद्र बनें। समाज को सही दिशा मिले।

वरिष्ठ पत्रकार टीवी 9 भारतवर्ष के कंसल्टिंग एडिटर श्री अमिताभ अग्निहोत्री जी जो अपनी बेबाक फायर ब्रांड प्रस्तुति शैली के लिए प्रसिद्ध हैं उनकी विशेष उपस्थिति और धर्मग्य विचारों ने सबको अभिभूत कर दिया। अपने चिर परिचित अंदाज़ में श्री अमिताभ अग्निहोत्री जी ने ज्योतिष शास्त्र, अपरिग्रह, परिवार , धर्म और जीवन की सार्थकता पर विचार रखे जो सोचने पर मजबूर कर देते है कि समाज किस ओर जा रहा है। कि साधु संत  जो विरक्त है या गृहस्थ से संन्यास ले चुके है  वे भी पारिवारिक ढांचे का वहन आश्रम के परिवार के पालन पोषण में करते हैं। परिवार की व्यवस्था समाज का एक उन्नत स्वरूप है जहां बिना किसी लालच के एक दूसरे का ध्यान रखा जाता है।

जरूरत की पूर्ति नहीं बल्कि हृदयगत प्रेम और सम्मान से। सिर्फ सनातन परंपरा धर्म को जीने वाला भारत ऐसा देश है जिसमें संपूर्ण प्रकृति के सभी उपस्थित तत्वों, जीवों बिना किसी भेदभाव के एक परिवार की संरचना का हिस्सा माना गया है। वसुधैव कुटुंबकम्। कोविड में भारत ने दुनिया भर में वैक्सीन भिजवाई थी। वह संपूर्ण विश्व एक परिवार की भावना ही थी जब बिना किसी फायदे नुकसान की कैलकुलेशन के परिवारवाद को सर्वोपरि रखा गया था। 2500 वर्ष पहले जब ऋषि ने यह लिखा तो भारत ने इसको जीवंत किया जीया। तो आपका दृष्टिकोण इतना व्यापक होना चाहिए जिसमें पूरी सृष्टि समा जाए। पंडित जी जब कथा करवाते हैं तब कहते हैं प्राणियों में सद्भावना रहे। यह हिंदू सनातन धर्म में ही है जब संपूर्ण जल थल चर वनस्पति पंच तत्व सबको अपना परिवार कुटुंब मान लिया गया है जिसमें भी प्राण हैं वह परिवार है। 

CA देवेन्द्र पी कपूर जी ने अपने वक्तव्य में कुछ ज्वलंत प्रश्न उठाए जिनमें कुछ हद तक माता पिता को भी परिवार टूटने का कारण माना जा सकता है आज कल के माता पिता जिम्मेदारी नहीं उठाते रिश्ते करते हैं तो सब कुछ बच्चों की मर्जी और सहूलियत पर छोड़ देते हैं जब वो स्वयं को पहले ही अलग कर लेते हैं मानसिक सामाजिक रूप से तो परिवार साथ चलेंगे कैसे। आज कल सुना जाता है कि बच्चों को शर्म आती है कि वो अपने मां पिता के साथ रहते हैं पूछने पर उल्टा  ही बताते हैं। की मां पिता उनके साथ रहते हैं जैसे माता पिता को साथ रखना उनकी मूलभूत सुविधाओं स्वास्थ्य का ख्याल रखना अतिरिक्त भार है उनपर। लड़कियां शादी कर के सास ससुर के साथ रहना उनकी सेवा करना बोझ और उनकी स्वतंत्रता में दखल मानने लगी हैं । परिवार की संस्था सुरक्षित रहे भी तो कैसे। जरूरी है सबको सम्मान सहित साथ ले कर चलना। 

गरिमामय समापन

 कार्यक्रम का समापन विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को असम राज्य के पारंपरिक गामोछा मेखला शैली के सुंदर दुशाला वस्त्र, ग्रन्थ एवं अन्य स्मृतिचिन्ह दे कर सम्मानित किया गया। माननीय मुख्य अतिथि जस्टिस श्री सुधीर अग्रवाल जी एवं पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी जी ने श्री मनोज गुप्ता करेंट क्राइम एडिटर, डॉ अमर नाथ अमर, श्री बी पी भाटिया itpo इंचार्ज, दीदी भजनानंदी जी, मनीष ऋषिश्वर जी, कर्नल धीरेन्द्र गुप्ता जी, श्री अमिताभ अग्निहोत्री जी, श्री देवेन्द्र कपूर, श्री नवीन शर्मा,  ए के सिंह, त्रिलोक चंद , नरेश जी, हरि ओम जी, अनिरुद्ध जी, मनीष गुप्ता जी, राजीव निशाना जी, होस्ट रितिका को पॉमवेदा फाउंडेशन की ओर से विशिष्ट सम्मान प्रदान किया। 

कार्यक्रम के संयोजक पंडित श्री लक्ष्मीकांत त्रिपाठी जी ने  सभी उपस्थित अनुभूतियों को आभार ज्ञापन देते हुए कहा, “हस्तरेखा शास्त्र केवल भविष्यवाणी का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-विश्लेषण और जागरूकता का सशक्त उपकरण है।” “हस्तरेखा दिवस” का यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि यह भारतीय परंपराओं और विज्ञानों के प्रति जनचेतना जगाने का सशक्त प्रयास सिद्ध हुआ। आयोजकों ने आश्वासन दिया कि आने वाले वर्षों में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई में और व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा।

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