Special report -77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति मुर्मु ने फहराया तिरंगा

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President Of India / Bharat Smt. Draupadi Murmu hoisted the flag on Kartavya Path on the Special occasion of 77th Republic Day 2026 Celebration

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। जैसे ही तिरंगा फहराया गया, राष्ट्रगान की मधुर धुन गूंजी और स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गनों से 21 तोपों की सलामी दी गई, जिससे पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों अतिथियों का सलामी मंच पर स्वागत किया। परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति और मुख्य अतिथियों को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट ने कर्तव्य पथ तक पहुंचाया। पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का भी स्वागत किया।

इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्षों की झलक, देश की सैन्य ताकत और भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों जैसे आधुनिक हथियारों के साथ 30 रंग-बिरंगी झांकियां भी शामिल होंगी।

यह परेड पिछले वर्ष हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बार आयोजित की जा रही है, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 29 विमानों की भव्य फ्लाईपास्ट विशेष आकर्षण होगी। फ्लाईपास्ट में राफेल, सुखोई-30, पी-8आई, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, और एमआई-17 जैसे विमान अलग-अलग संरचनाओं में आसमान में करतब दिखाएंगे।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

गणतंत्र दिवस परेड में करीब 2,500 कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे, जो ‘वंदे मातरम’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को दर्शाएंगे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रतिभागी, कर्तव्य भवन के निर्माण कार्य में लगे श्रमिक, लखपति दीदी और लगभग 10,000 विशेष अतिथि भी परेड देखने पहुंचे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन अतिथियों में रोजगार सृजन, नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोग शामिल हैं।

गणतंत्र दिवस समारोह में सेना की स्वदेशी तोपों से दी गयी राष्ट्रीय ध्वज को सलामी

कर्तव्य पथ पर सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में सेना की 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) ने राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की पारंपरिक सलामी दी। इसकी एक विशेषता यह रही कि आर्टिलरी बैटरी ने देश में ही बनी 105 मिमी लाइट फील्ड तोपों से फायरिंग कर सलामी दी।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। यह कर्तव्य पथ के लॉन से राष्ट्रीय ध्वज को दिया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। इन तोपों से फायरिंग एक साथ होने वाली तीन गतिविधियों का तालमेल होती है जिसमें प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराना, सेना बैंड द्वारा राष्ट्रगान बजाना और राष्ट्रपति बॉडीगार्ड द्वारा राष्ट्रीय सलामी देना शामिल है। यह सेरेमोनियल बैटरी दिल्ली में तैनात है और इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय महत्व के अलग-अलग अवसरों पर पारंपरिक फायरिंग कर सलामी देना है।

यह बैटरी 1721 फील्ड रेजिमेंट का हिस्सा है जो मुख्यालय 36 आर्टिलरी ब्रिगेड के तहत आती है। सेरेमोनियल बैटरी ने 21 तोपों की सलामी देने के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जो स्वदेशी तोप प्रणाली है। पहले यह फायरिंग ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोप से की जाती थी।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

यह तोप प्रणाली आत्मनिर्भर भारत में देश की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है। पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) सेना की एक विशेष इकाई है जो गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 21 तोपों की पारंपरिक सलामी देती है। सलामी में ध्वनि और धुएं के लिए विशेष सेरेमोनियल कारतूसों का इस्तेमाल किया जाता है जिससे किसी को नुकसान नहीं होता।

कर्तव्य पथ पर दिखी भारत की असीम सैन्य शक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक

राष्ट्रीय राजधानी में 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, असीम सैन्य शक्ति और सशस्त्र बलों के जांबाजों की लयबद्ध कदमताल का भव्य तथा अनूठा नजारा देखने को मिला। इस बार की परेड ‘स्वतंत्रता के मंत्र-वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि के मंत्र-आत्मनिर्भर भारत’विषय पर आधारित थी।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन के साथ हुई। सबसे पहले वह राष्ट्रीय समर स्मारक पर पहुंचे और देश की खातिर सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने यहां दो मिनट का मौन भी रखा और इसके बाद वह कर्तव्य पथ पहुंचे, जहां पर उन्होंने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह में पधारे विदेशी मेहमानों यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत किया।

गणतंत्र दिवस के मौके पर यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं को पहली बार मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’पूरे होने के विषय पर समर्पित रहा। गणतंत्र दिवस परेड, सांस्कृतिक प्रदर्शन, झांकियां और अन्य कार्यक्रम इसी विषय वस्तु पर आधारित थे। इस तरह से भारत का राष्ट्रीय गीत स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और वर्तमान की राजनीतिक आकांक्षाओं को जोड़ते हुए इस साल के समारोह के केंद्र में था। परेड की शुरूआत से पहले राष्ट्रपति ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को शांति काल के सर्वाेच्च सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया।

इस साल की परेड में पारंपरिक मार्चिंग दस्तों और रक्षा प्रदर्शनों के साथ ही पहली बार भारतीय सेना की युद्ध व्यूह रचना भी प्रदर्शित की गयी। परेड में सैनिक अनुशासन, सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का सामंजस्यपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला। इसमें राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों की झांकियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को रेखांकित किया। देश के विभिन्न राज्यों की राजधानियों, जिलों, शैक्षिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों में ध्वजारोहण समारोह, आधिकारिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये।

इस साल ‘स्वतंत्रता के मंत्र-वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि के मंत्र-आत्मनिर्भर भारत’विषयों पर आधारित राज्यों, संघ शासित क्षेत्रों और केंद्रीय मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां परेड में शामिल हुईं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में लगभग 2500 कलाकारों ने भाग लिया। इस साल के समारोह में देश भर से किसानों, हस्तशिल्पियों, वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों, महिला उद्यमियों, छात्रों, खिलाड़ियों, प्रमुख सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों समेत लगभग 10000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष एक अनूठी पहल देखने को मिली, जिसके तहत परेड देखने आने वाले लोगों के लिए बनी दर्शक दीर्घाओं के नाम देश की विभिन्न नदियों के नाम पर रखे गये थे।

सरकार के अनुसार नदियाँ गहन सांस्कृतिक प्रतीक हैं जो सभ्यताओं की जीवनधारा, सामूहिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता के भंडार के रूप में कार्य करती हैं। नागरिकों को इसका एहसास कराने के लिए इस बार देश भर की नदियों ब्यास, ब्रह्मपुत्र, चंबल, चिनाब, गंडक, गंगा, घाघरा, गोदावरी, सिंधु, झेलम, कावेरी, कोसी, कृष्णा, महानदी, नर्मदा, पेन्नार, पेरियार, रावी, सोन, सतलुज, तीस्ता, वैगई और यमुना के नाम पर दर्शक दीर्घाओं का नाम रखा गया। गौरतलब है कि इससे पहले दर्शक दीर्घा अंकों (जैसे एक, दो, तीन और चार इत्यादि) पर आधारित होते थे।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

इस वर्ष सरकार ने लोगों को समारोह स्थल पर आकर्षित करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किये थे। सरकार ने गणतंत्र दिवस समारोह से नागरिकों, विशेष तौर से युवाओं और रचनात्मक समुदायों को जोड़ने के लिए ‘माई गॉंव’ और ‘माई भारत’ जैसे मंचों के जरिए राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिताएं आयोजित की थीं जिनमें ‘स्वतंत्रता के मंत्र-वंदे मातरम’ पर निबंध प्रतियोगिता, ‘समृद्धि के मंत्र-आत्मनिर्भर भारत’ पर पेंटिंग प्रतियोगिता, ‘वंदे मातरम’पर गायन प्रतियोगिता, अंतरिक्ष और खेलों में भारत की उपलब्धियों और राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों जैसे विषयों पर क्विज प्रतियोगिताएं शामिल थीं।

सरकार ने लोगों को इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए गणतंत्र दिवस, 2026 के लिए समर्पित ‘माई भारत’ पोर्टल के जरिए आमंत्रित किया था। परेड के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। जगह-जगह पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे। सुरक्षा बलों के जवान सीसीटीवी के माध्यम से समारोह में आने वाले हर व्यक्ति की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

मोदी ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के शहीदों को नमन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 77 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर इंडिया गेट स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के शहीदों को नमन किया। इसके साथ ही गणतंत्र दिवस उत्सव का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस समारोह के लिये गार्ड ऑफ ऑनर की कमान एक वायु सेना अधिकारी, स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कन्याल ने संभाली। शहीद नायकों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया, जिसके बाद बिगुल बजाने वालों ने ‘राउज’ बजाया। गार्ड कमांडर ने एक बार फिर सलामी शस्त्र का आदेश दिया, जिससे समारोह औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रीय समर स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रधानमंत्री अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ कर्तव्य पथ पर बने मुख्य मंच की ओर रवाना हुए। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति के आगमन के समय सैन्य बैंड द्वारा राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी गई।

गणतंत्र दिवस परेड: सेना ने किया ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन

गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार भारतीय सेना ने ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन किया। ‘बैटल एरे’ यानी रणभूमि व्यूह रचना। इसके माध्यम से दिखाया गया कि कैसे जंग के समय सेना आगे बढ़ती है, हमला कैसे किया जाता है और कैसे दुश्मन को जवाब देते हैं।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

कर्तव्य पथ पर यह सब कुछ एक ही जगह देखने को मिला। यहां ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक भी दिखाई दी। यह पूरा प्रदर्शन ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता को भी एक गर्व भरा सलाम था। वहीं सेना के खास टैब्लो ने एक इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस सेंटर को दिखाया। यहां से पूरी जंग की योजना बनती है। इसमें दिखाया गया कि कैसे रियल-टाइम में टारगेट तय होते हैं, हमला होता है और ‘सुदर्शन चक्र’ जैसी वायु रक्षा से देश की सुरक्षा होती है। वहीं इसमें हवाई घटक भी शामिल रहे।

रेकी एलिमेंट में 61 कैवलरी एक्टिव कॉम्बैट यूनिफॉर्म में रही। इसके बाद हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल था, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल है। हवाई सहायता के रूप में स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका आर्म्ड वर्जन रुद्र प्रहार फॉर्मेशन था। यह युद्धक्षेत्र में निर्णायक पहल का प्रदर्शन करता है। इसके बाद कॉम्बैट एलिमेंट्स यानी युद्ध में अग्रणी भूमिका निभाने वाले टैंक आए। इनमें टी-90 भीष्म और मेन बैटल टैंक अर्जुन सलामी मंच के सामने से गुजरे। वहीं अपाचे एएच-64 ई और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर से इन्हें हवाई सहायता मिली। अन्य मैकेनाइज्ड कॉलम में बीएमपी-2 इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल, साथ में नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 शामिल रही।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

अब तक परेड में सैन्य मार्चिंग टुकड़ियां और हथियार अलग-अलग नजर आते रहे हैं। हालांकि इस बार जंग के असली क्रम जैसी तैयारी देखने को मिली। यानी दुश्मन पर नजर रखने वाले सिस्टम, टैंक और पैदल सेना, उसके साथ ही तोपखाना, मिसाइलें, हेलीकॉप्टर और अंत में सप्लाई व सुरक्षा व्यवस्था। इससे साफ दिखा कि भारतीय सेना कितनी तैयार, मजबूत और फुर्तीली है। यहां सेना द्वारा हाई-टेक और स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ी कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ी। इस टुकड़ी में अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रणध्वज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और धवंशक लाइट स्ट्राइक व्हीकल शामिल थे।

इनके बाद वाहनों पर लगे रोबोटिक डॉग, मानवरहित ग्राउंड व्हीकल और चार ऑटोनॉमस मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (निग्रह, भैरव, भुविरक्षा और कृष्णा) नजर आए। कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट में भारत की नई पीढ़ी के मानवरहित वॉरहेड हथियार शामिल थे। उन्हें शक्तिबाण और दिव्यास्त्र के जरिए दिखाया गया, जो खास हाई मोबिलिटी व्हीकल्स पर लगे हुए थे। अत्याधुनिक तकनीकों से लैस, ये एक साथ झुंड में ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित टैक्टिकल हाइब्रिड यूएवी जोल्ट के जरिए एडवांस्ड सर्विलांस दिखाते हैं। इनका इस्तेमाल तोपखाने की फायरिंग को निर्दिष्ट करने के लिए किया जाता है।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

बैटल एरे में यह भी दिखाया गया कि आज की भारतीय सेना सिर्फ बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं है। अब जंग डेटा, ड्रोन और टेक्नोलॉजी से लड़ी जाती है। सेना ने दिखाया कि कैसे वह दूर बैठकर भी दुश्मन पर नजर रखती है, सही वक्त पर फैसला लेती है और फिर सटीक हमला करती है। खास बात यह है कि यह हमला पूरी तरह स्वदेशी हथियारों और सिस्टम के दम पर किया जाता है। इस बार परेड में कई नए यूनिट और हथियार पहली बार नजर आए, जैसे कि पहली बार भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी परेड में शामिल हुए। 155 मिमी एटीएजीएस तोप, लंबी दूरी तक मार करने वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग, बिना चालक वाले वाहन और लुटेरिंग म्यूनिशन भी पहली बार देश की जनता के सामने आए।

77वें गणतंत्र दिवस पर केंद्रीय मंत्रियों ने लिया सशक्त और समावेशी विकसित भारत के निर्माण का दृढ़ संकल्प

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को कई केंद्रीय मंत्रियों ने यह संकल्प लिया कि वे 2047 तक एक मजबूत, समृद्ध और विकसित भारत बनाने के लिए पूरी मेहनत करेंगे।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, “यह गौरवशाली दिन हमें हमारे संविधान की मजबूती, लोकतंत्र की भावना और राष्ट्रीय एकता की याद दिलाता है। आइए इस पावन अवसर पर हम सभी संवैधानिक मूल्यों को अपनाने और एक मजबूत, समृद्ध और विकसित भारत बनाने का संकल्प लें।”

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी 77वें गणतंत्र दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “आइए हम सब लोकतंत्र, एकता और संवैधानिक कर्तव्य के मूल्यों को हमेशा बनाए रखें।”

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि आज जब कर्तव्य पथ हमारी समृद्ध संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों के रंग से जीवंत हो उठा है, और पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का प्रतीक है, तो हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़, निर्णायक और दूरदर्शी नेतृत्व में अपने अभूतपूर्व विकास यात्रा और विरासत का गर्व के साथ उत्सव मना रहे हैं।” उन्होंने एक्स पर यह भी लिखा कि हम सभी मिलकर देश की मजबूत रक्षा तैयारियों, विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नए नवाचार और विकसित भारत बनने की परिवर्तनकारी यात्रा के साक्षी बन रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि इस पवित्र अवसर पर “हम सभी को अपने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में योगदान देने की शपथ लेनी चाहिए।”

केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि इस गणतंत्र दिवस पर “मुझे अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, एक ऐसा क्षण जो हमेशा दिल को गर्व और जिम्मेदारी से भर देता है।”

उन्होंने एक्स पर लिखा, “तिरंगा फहराते ही, हमारे संविधान और लोकतंत्र, एकता और सेवा के उन शाश्वत मूल्यों में मेरा विश्वास और मजबूत हो गया, जो हमारे महान राष्ट्र की पहचान हैं। भारत की असली ताकत इन आदर्शों को अपने रोजमर्रा के कामों में अपनाने और निस्वार्थ भाव से देशवासियों की सेवा करने में है। यह गणतंत्र दिवस हम सभी को एक मजबूत, समावेशी और प्रगतिशील भारत बनाने की प्रेरणा दे।”

छत्तीसगढ़ की झांकी ने राष्ट्रपति-पीएम और यूरोपीय अतिथियों को किया मंत्रमुग्ध

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। ‘स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती नजर आई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों ने झांकी को उत्सुकता के साथ देखा और तालियां बजाकर सराहना की। दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छत्तीसगढ़ की झांकी का स्वागत किया। झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक दिखाई गई, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया। धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अन्यायपूर्ण अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित किया। विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।

झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही और गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।

ऊंट, टट्टू, रैप्टर्स और आर्मी डॉग्स, गणतंत्र दिवस परेड में दिखी सेना की अनदेखी ताकत

पूरे देश ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस पर एक दुर्लभ नजारा देखा, जब भारतीय सेना की रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (आरवीसी) की एक विशेष रूप से तैयार की गई पशु टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। सेना ने देश की सबसे महत्वपूर्ण सीमाओं की रक्षा में पशुओं की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित किया।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

यह पहली बार है कि राष्ट्रीय परेड के दौरान पशुओं ने मार्च किया, जिसने सैन्य तैयारियों के एक कम दिखने वाले, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष की ओर लोगों का ध्यान खींचा। इस विशेष दल में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार जांस्कर टट्टू, चार प्रशिक्षित शिकारी पक्षी (रैप्टर्स), दस स्वदेशी नस्ल के आर्मी डॉग और वर्तमान में सेवा में तैनात छह पारंपरिक सैन्य कुत्ते शामिल थे।

सबसे आगे थे मजबूत बैक्ट्रियन ऊंट, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में ऑपरेशनों में सहायता के लिए शामिल किया गया था। अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन स्तर और 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल, ये ऊंट न्यूनतम पानी और भोजन के साथ लंबी दूरी तय करते हुए 250 किलोग्राम तक का भार ले जा सकते हैं।

उनके शामिल होने से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर विशेष रूप से रेतीले इलाकों और खड़ी ढलानों में सैन्य सहायता और गश्त क्षमताएं काफी मजबूत हुई हैं। उनके साथ जांस्कर टट्टू मार्च कर रहे थे, जो लद्दाख की एक दुर्लभ देशी पहाड़ी नस्ल है।

छोटे आकार के बावजूद ये टट्टू उल्लेखनीय सहनशक्ति के लिए जाने जाते हैं, जो 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर और शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जाने वाले तापमान में 40 से 60 किलोग्राम के बीच का भार लंबी दूरी तक ले जा जा सकते हैं। ये 2020 में शामिल किए गए, तब से उन्हें सियाचिन ग्लेशियर सहित कुछ सबसे कठिन परिचालन क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

Glimpses of Full Dress Rehearsal of 77th Republic Day Parade at Kartavya Path, in New Delhi on January 23, 2026.

पक्षियों के हमले की रोकथाम और निगरानी के लिए सेना द्वारा तैनात किए गए चार रैप्टर्स ने फॉर्मेशन की परिचालन बढ़त को बढ़ाया। उनका समावेश संवेदनशील परिचालन वातावरण में सुरक्षा और स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक क्षमताओं के अभिनव उपयोग को दर्शाता है। परेड का मुख्य आकर्षण सेना के कुत्तों की उपस्थिति थी, जिन्हें अक्सर भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’ के रूप में जाना जाता है।

मेरठ के आरवीसी सेंटर और कॉलेज में रिमाउंट और पशु चिकित्सा कोर द्वारा पाले गए प्रशिक्षित किए गए ये कुत्ते आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों का पता लगाने, ट्रैकिंग, रखवाली, आपदा प्रतिक्रिया और खोज और बचाव अभियानों में सैनिकों की सहायता करते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में, सेना के कुत्तों और उनके संचालकों ने असाधारण साहस का प्रदर्शन किया है, अपनी लड़ाकू भूमिकाओं के साथ-साथ मानवीय अभियानों के लिए वीरता पुरस्कार और प्रशंसा अर्जित की है।

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के दृष्टिकोण के अनुरूप, सेना ने मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजपलायम जैसी स्वदेशी कुत्तों की नस्लों को तेजी से शामिल किया है।

गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ

गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष स्वदेशी रक्षा उपकरणों की बेहतरीन झलक देखने को मिली। गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत भी स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ से गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया।

इस दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहीं। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, व समृद्ध सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से हुई। यहां उन्होंने माल्यार्पण करके अपने प्राण न्योछावर करने वाले राष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि दी। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के साथ ‘पारंपरिक बग्गी’ में कर्तव्य पथ पर आईं। उनके साथ राष्ट्रपति के अंगरक्षक थे जो भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। परंपरा के अनुसार कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। यह देश में बना तोपखाना हथियार सिस्टम है।

वहीं पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि अब बीते कुछ समय से 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी 21 तोपों की सलामी दे रही है। दरअसल गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। इस परंपरा के तहत गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया। गौरतलब है कि यह भारत में ही बनी एक पूर्णत स्वदेशी तोप प्रणाली है। यह प्रणाली आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक 105 मिमी लाइट फील्ड गन के प्रयोग से न केवल पुरानी परंपरा को आधुनिक स्वरूप मिला है, बल्कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के सशक्त होने का संदेश गया है। यह स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर भारतीय सेना के बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिया जाने वाला 21 तोपों का सलामी समारोह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है।

भारतीय सेना द्वारा संचालित इस समारोह का प्रत्येक क्षण अत्यंत अनुशासन, सटीकता और गरिमा का प्रतीक होता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी गई। 21 तोपों की यह सलामी भारत की सैन्य परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है। इसके साथ ही यह आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की सशक्त छवि को भी राष्ट्र और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करती है। इसके उपरांत ‘विविधता में एकता’ थीम पर 100 सांस्कृतिक कलाकार परेड की शुरुआत करते हुए कर्तव्य पथ पर अग्रसर हुए। यह म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का शानदार प्रदर्शन रहा।

इस दृश्य ने देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया। वहीं 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करते हुए कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े। राष्ट्रीय ध्वज को लेकर, हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया। इसके बाद राष्ट्रपति के सलामी लेने के साथ परेड शुरू हुई।

दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने परेड की कमान संभाली। वह दूसरी पीढ़ी के अधिकारी हैं। मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों परेड के सेकंड-इन-कमांड थे। वह तीसरी पीढ़ी के सेना अधिकारी हैं। इसके बाद सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के गर्वित विजेता आए। इनमें परमवीर चक्र विजेता – सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (रिटायर्ड) और सूबेदार मेजर संजय कुमार – और अशोक चक्र विजेता – मेजर जनरल सीए पिथावालिया (रिटायर्ड) और कर्नल डी श्रीराम कुमार शामिल थे।

गणतंत्र दिवस परेड में वैश्विक बौद्ध एकता की झलक, 40 से अधिक देशों के भिक्षु हुए शामिल

गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश ने न केवल सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक वैभव का प्रदर्शन किया, बल्कि अपनी लोकतांत्रिक आत्मा और आध्यात्मिक विरासत का भी सशक्त संदेश दुनिया को दिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर 40 से अधिक देशों से आए पूज्य अंतरराष्ट्रीय बौद्ध भिक्षुओं ने गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया, जिससे यह उत्सव और भी विशेष बन गया।

गणतंत्र दिवस समारोह के साथ ही नई दिल्ली में आयोजित दूसरे वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का समापन भी हुआ। इसी क्रम में भारत सरकार के सम्मानित अतिथि के रूप में विश्व के विभिन्न देशों से आए बौद्ध भिक्षुओं ने कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड को देखा। इस दौरान भारत की सैन्य शक्ति, अनुशासन, विविध सांस्कृतिक झांकियां और जीवंत लोकतंत्र की रंगीन झलक ने विदेशी मेहमानों को गहराई से प्रभावित किया।

इस अवसर ने भारत की उस ऐतिहासिक भूमिका को भी रेखांकित किया, जब उसने शीत युद्ध के दौर में विभाजित होती दुनिया को एक मंच पर लाने का प्रयास किया था। आज, जब वैश्विक व्यवस्था के ताने-बाने में दरारें दिखाई दे रही हैं, भारत की शक्ति उसके नागरिकों, लोकतांत्रिक मूल्यों और करुणा व समझ के संकल्प में निहित दिखाई देती है। कर्तव्य पथ पर बुद्ध की प्रतिमाओं और अशोक स्तंभ के दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्होंने भारत की बौद्ध विरासत और शांति के संदेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्फेडरेशन (आईआईबीसी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत की शक्ति उसके लोकतंत्र और आध्यात्मिक गहराई में निहित है। दुनिया भर से आए भिक्षु आज 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत को आशीर्वाद देने के लिए एकत्र हुए हैं। कर्तव्य पथ पर बुद्ध और अशोक स्तंभ के दृश्य अत्यंत भव्य हैं। इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्फेडरेशन की ओर से आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। जय हिंद, नमो बुद्धाय।”

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र, परेड में शामिल हुआ यूरोपियन यूनियन कंटीजेंट

गणतंत्र दिवस के अवसर पर वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर शुभांशु शुक्ला को यह सम्मान प्रदान किया। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला ‘अशोक चक्र’ देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है।

गौरतलब है कि शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी। इसके मिशन पर उन्होंने 2025 में उड़ान भरी थी। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपनी स्पेस यात्रा के दौरान वहां कई रिसर्च की थीं। उन्होंने अंतरिक्ष में खेती भी की थी। शुभांशु शुक्ला ने स्पेस में मेथी और मूँग की खेती की थी। उन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मिशन की सफलता सुनिश्चित की। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व और शांतचित्त निर्णय लेने की क्षमता को इस सर्वोच्च सम्मान के माध्यम से मान्यता मिली है।

वहीं, कर्तव्य पथ पर परेड आरंभ होते ही परमवीर चक्र एवं अशोक चक्र विजेता खुली जीप में परेड स्थल पर पहुंचे। सर्वोच्च बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित विजेता, परेड कमांडर का अनुकरण कर रहे थे और इनमें परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेता शामिल रहे। परमवीर चक्र से सम्मानित विजेताओं में सूबेदार मेजर (ऑनरेरी कैप्टन) योगेन्द्र सिंह यादव, पीवीसी (सेवानिवृत्त), 18 ग्रेनेडियर्स और सूबेदार मेजर संजय कुमार, पीवीसी, 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स शामिल थे। वहीं, अशोक चक्र से सम्मानित विजेता मेजर जनरल सी ए पिठावाला (सेवानिवृत्त) व कर्नल डी श्रीराम कुमार थे।

गौरतलब है कि परमवीर चक्र युद्ध में असाधारण वीरता का परिचय देते हुए अदम्य साहस दिखाने वाले सैनिकों को दिया जाता है। अशोक चक्र अन्य परिस्थितियों में असाधारण वीरता का प्रदर्शन और सर्वोच्च प्रदर्शन देने वाले शूरवीरों को प्रदान किया जाता है।

वहीं इस वर्ष यूरोपियन यूनियन का कंटीजेंट भी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुआ। तीन जिप्सी पर यूरोपीय संघ (ईयू) के ध्वज देखने को मिले। गणतंत्र दिवस परेड में कर्नल फ्रेडरिक साइमन स्प्रुइज्ट, यूरोपीय संघ सैन्य स्टाफ के महानिदेशक की ओर से यूरोपीय संघ के सैन्य प्रतिनिधित्व का नेतृत्व किया गया। वे एक औपचारिक समारोहिक जिप्सी पर सवार थे। इस फॉर्मेशन में दूसरी औपचारिक समारोहिक जिप्सी के समन्वय में दाईं ओर की जिप्सी पर यूरोपीय संघ का ध्वज था। यह ध्वज यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों की संस्थागत एकता का एवं यूरोपीय संघ के सैन्य स्टाफ (ईयूएमएस) के ध्वज के साथ, सुरक्षा और रक्षा के लिए यूरोपीय संघ संस्थागत अवसंरचना में स्थायी सैन्य निकाय का प्रतीक है।

पहली जिप्सी से समन्वय में, बाईं ओर की जिप्सी पर यूरोपीय संघ की सामान्य सुरक्षा और रक्षा नीति के तहत हिंद महासागर और लाल सागर क्षेत्रों में आयोजित, यूरोपीय संघ के नौसेना बल अटलांटा और एस्पिड्स नामक दो यूरोपीय संघ नौसैनिक अभियानों के ध्वज वहन करती दिखी। ये ध्वज अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के समर्थन में यूरोपीय संघ की परिचालन उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

गौरतलब है कि साधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान के लिए सशस्त्र बलों के 70 कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान करने की स्वीकृति दी है। इनमें छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जा रहे हैं। इन वीरता पुरस्कारों में 1 अशोक चक्र, 3 कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (1 मरणोपरांत), 1 बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) (5 मरणोपरांत), 6 नौसेना मेडल (वीरता) व 2 वायु सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को किया अशोक चक्र से सम्मानित

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता सम्मान ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा की और 2025 में अपनी स्पेस फ्लाइट पूरी की थी। विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने थे।

इस मिशन के दौरान उन्होंने असाधारण साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।

अंतरिक्ष में अपने प्रवास के दौरान शुक्ला ने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और कृषि से जुड़े परीक्षण भी किए। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज को सफलतापूर्वक उगाया, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और यह संदेश देगा कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व क्षमता और शांत निर्णय लेने की कला को इस सम्मान के जरिए सराहा गया है।

इस उपलब्धि को भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उनका साहस और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान दिखाने के लिए 70 सशस्त्र बलों के जवानों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इनमें से छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाएंगे।

वीरता पुरस्कारों में एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (एक मरणोपरांत), एक बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) (पांच मरणोपरांत), छह नौसेना मेडल (वीरता), और दो वायुसेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।

इसके अलावा, ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जाएगा। वे एक प्रतिष्ठित फाइटर टेस्ट पायलट हैं और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं। उनके नाम 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है और वे 2019 से इसरो के साथ गगनयान कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं।

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