Britain : Ex. British Prime minister Rishi Sunak to attend “India AI Impact Summit” to be organised at Bharat Mandapam, New Delhi between 16 to 20 February 2026.
नई दिल्ली, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के पूर्वावलोकन कार्यक्रम (कर्टेन रेजर) ‘एआई फॉर ऑल: रीइमेजिनिंग ग्लोबल कोऑपरेशन’ में वक्तव्य देंगे।

सार्वजनिक नीति शोध संस्था कार्नेगी इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के कर्टेन रेजर कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।”
इस आयोजन के लिए 100 से अधिक देशों के 35,000 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें 500 से अधिक स्टार्टअप सम्मिलित हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की यात्रा पर रहेंगे और इस शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उनकी यह यात्रा उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से एआई के क्षेत्र में सहयोग को लेकर दोनों राष्ट्रों की प्राथमिकता को रेखांकित करती है।

अपनी यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति मैक्रों श्री मोदी के साथ ‘होराइजन 2047 रोडमैप’ के अंतर्गत द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक चर्चा करेंगे। वे मुंबई में संयुक्त रूप से ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ का भी उद्घाटन करेंगे।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाला ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ पांच दिवसीय कार्यक्रम है, जो नीति, अनुसंधान, उद्योग और सार्वजनिक सहभागिता पर केंद्रित है। ‘जनमानस, पृथ्वी और प्रगति’ के तीन आधारभूत स्तंभों पर आधारित यह शिखर सम्मेलन वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं, नवाचारियों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा, ताकि शासन, नवाचार और सतत विकास में एआई की भूमिका पर विचार किया जा सके।संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उन्होंने एआई की चुनौतियों के समाधान में भारत की अग्रणी भूमिका की सराहना की है। उन्होंने एआई को ‘अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा और अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक’ बताया है।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल’ में शामिल होने के लिए भी भारत को आमंत्रित किया है। यह 40 सदस्यीय विशेषज्ञ निकाय एआई के विकास का आकलन करने, वैश्विक संवाद को बढ़ावा देने और आधिकारिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए गठित किया गया है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के बी. रविंद्रन और भारतीय-अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक विपिन कुमार को सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पैनल दुनिया को तथ्यों और कल्पनाओं के बीच अंतर करने में सहायता करेगा, जो निष्पक्ष समझ के लिए आज अनिवार्य है।

यह शिखर सम्मेलन एआई के प्रति भारत के विकास-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है और ‘इंडिया एआई मिशन’ तथा ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के अनुरूप है। इसका मुख्य बल वैश्विक एआई चर्चाओं को व्यावहारिक और लोगों के हित में परिवर्तित करने पर है।
इस सम्मेलन में यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम ( यूएएसआईएसपीएफ) की भागीदारी होगी। यह मंच अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों के सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेगा।
शिखर सम्मेलन से पूर्व, यूएएसआईएसपीएफ ने ‘बोर्ड एआई टास्क फोर्स’ के गठन की घोषणा की है। इस कार्यबल का नेतृत्व जॉन चैंबर्स करेंगे और इसका मुख्य केंद्र एआई तंत्र को सशक्त बनाना, इसके उत्तरदायी उपयोग में तीव्रता लाना और व्यापक स्तर पर इसके सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित करना होगा।कार्यबल के शुभारंभ पर जॉन चैंबर्स ने कहा, “जैसा कि श्री मोदी ने कहा है, एआई का अर्थ ‘अमेरिका और इंडिया’ है। सिलिकॉन वैली के अपने अनुभव से मैं देख सकता हूं कि एआई हमारे समय की निर्णायक तकनीक बनेगी, ठीक वैसे ही जैसे भारत-अमेरिका संबंध इस युग की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी है। इस कार्यबल के माध्यम से, हम दोनों देशों के लगभग दो अरब लोगों के लिए एआई के उत्तरदायी विकास और क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अपने गहन अनुभव का उपयोग करेंगे। भारत की प्रगति को लेकर मेरा विश्वास अटूट है।”