Special Report -बंगाल की बिसात पर मोदी-शाह (मोशाय) की कमान से तृणमूल की सत्ता ध्वस्त

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A New Era has begun in Bengal with the historical victory of PM Modi and Amit Shah Bhartiya Janata Party. It is widely appreciated by World media except the leftists and Anti- India media agencies like BBC primarily. The End of a Heinous, Criminal, Brutal, Communal Communist Era with the rise of Saffron Sanatan Sarkar that symbolises equality, progress and a mpowered society.

-चुनावी रणनीत के सूत्रधार शाह ने हर मोर्चे पर दी मात

भाजपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक दशक पहले पार्टी की कमान संभालने के साथ जो बड़ा राजनीतिक चुनावी मिशन शुरू किया था, उसके एक बड़े अध्याय की पूर्णता है पश्चिम बंगाल में भाजपा की एतिहासिक विजय। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शाह ने अपने कार्यकाल और उसके बाद के अध्यक्षों के कार्यकाल में भी उसी गति से अभियान चलाया। इस बार के चुनाव में शाह ने बंगाल में अपनी रणनीति से हर मतदाता तक बदलाव की लहर पैदा की और डर से निकलकर बखौफ मतदान का भरोसा भी दिलाया।

चुनावी रणनीति का प्रभाव

पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से पूरी तरह से बाहर करने, ओडिशा में भाजपा को लाने, बिहार में भाजपा के व्यापक विस्तार के साथ अपना मुख्यमंत्री बनाने के साथ पश्चिम बंगाल ही ऐसा मिशन था जो पूरा नहीं हो पाया था। इसके लिए पांच साल पहले व्यूह रचना की गई, लेकिन ममता बनर्जी किसी तरह अपना किला बचा ले गई थी, लेकिन इस बार शाह ने उनको कोई मौका नहीं दिया और ममता बनर्जी के अजेय माने जाने वाले किले को ध्वस्त कर दिया। शाह ने संगठन के जरिए अपनी रणनीति को जमीनी अमली जामा पहनाया और ममता बनर्जी के गढ़ों में सेंध लगाई।

शाह की चुनावी यात्रा

सूत्रों के अनुसार चुनाव अभियान के दौरान अमित शाह लगभग 15 दिनों तक किसी न किसी रूप में बंगाल में ही रहे। इस दौरान केवल भाषण और रोड शो ही नहीं किए, संगठन कौ कई स्तरीय रणनीति में इस तरह से ढाला कि भाजपा अपनी एक एक बात मतदाता तक पहुंचाने में सफल रही। चुनाव प्रबंधन भी इस तरह से किया कि कोई भी उसे भेद कर न तो गड़बड़ी कर सका और न ही हिंसा के लिए किसी को गुंजाइश रहने दी। समय रहते ही जैसे को तैसा रवैया अपनाकर साफ कर दिया कि अब भय नहीं चलेगा।

रैलियों का आयोजन

शाह देर रात तक चलने वाली बैठकों में पार्टी नेताओं के साथ रणनीति तय करते और अगले दिन उसी योजना को जमीन पर उतारने में जुट जाते थे। दिन में रैलियों और रोड शो के जरिए व्यापक माहौल बनाया। बीच बीच में दूसरे राज्यों में भी प्रचार करने चले जाते और फिर से लौटकर देर रात बैठकें कर संगठन को धार देने में जुट जाते। इस दौरान उन्होंने लगभग पचास से अधिक रैलियों और रोड शो किए। कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरी और मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाया।

भूपेंद्र यादव की भूमिका

चुनाव के दौरान की जाने वाली घोषणाओं का खाका तैयार करने और उनको समयबद्ध ढंग से जारी करने का भी काम किया। शाह की अपनी भरोसेमंद व परखी हुई टीम पूरी कार्य योजना को आगे बढ़ाती रही।

चुनाव प्रभारी और कई राज्यों में विपरीत हालातों में भी अपनी सफल रणनीति से भाजपा के सिर सफलता का सेहरा बंधवाने वाले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बेहद गुपचुप ढंग से मीडिया से दूर रहते हुए काम किया। लोगों में यह धारणा बनाने में सफल रहे कि बंगाल में बदलाव होने जा रहा है। पहले चरण में भारी मतदान व 110 सीटों के आंकड़े को दूसरे चरण में इस तरह से रखा कि पूरा खेल ही बदल गया। यादव के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संगठन प्रभारी मंगल पांडे, चुनाव सह प्रभारी विप्लव देव व महासिचव सुनील बंसल ने अपने मोर्चे बेहतर ढंग से संभाले रखे और विरोधियों की सारी रणनीति पर पानी फेरने का काम किया।

बंगाल में कमल खिलाने में दिल्ली के नेताओं की भागीदारी रंग लाई

-दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी समेत कई नेता बंगाल में रैलियों व सभाओं में डटे रहे

बंगाल में कमल खिलाने दिल्ली के नेताओं की सक्रिय भागीदारी रही है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर दिल्ली से कई वरिष्ठ नेता और मंत्री लंबे समय तक बंगाल में डटे रहे और चुनाव प्रचार से लेकर प्रबंधन तक की जिम्मेदारी संभाली। असम, तमिलनाडु में भी दिल्ली के नेताओं ने योगदान दिया।

बंगाल में रैलियों की सक्रियता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बंगाल में कई चुनावी रैलियों और सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने आसनसोल, एंटाली, रानीगंज, खड़गपुर, गलसी-पानागढ़, पुरसुरा समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में रैली व सभाएं कीं। इसके अलावा रोड शो में भाजपा के लिए जनता का समर्थन जीतने का पूरा प्रयास किया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली। उनकी सभाओं में महिला सशक्तिकरण और विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया, जिससे मतदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

मनोज तिवारी की भूमिका

भोजपुरी अभिनेता और उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी बंगाल में भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल रहे। उन्होंने 37 विधानसभा क्षेत्रों में 40 से अधिक चुनावी सभाएं और रोड शो किए। उनकी जनसभाओं में भारी भीड़ उमड़ी, खासकर हिंदी भाषी मतदाताओं के बीच उनका खास प्रभाव देखने को मिला। दिल्ली भाजपा के संगठन महामंत्री पवन राणा के नेतृत्व में नेताओं की एक टीम करीब दो महीने तक बंगाल में सक्रिय रही। इस टीम ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, मंत्री आशीष सूद सहित कई दिल्ली के मंत्री और विधायक चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते रहे।

अन्य क्षेत्रों में योगदान

इसी तरह मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तमिलनाडु में चुनावी सभाओं को संबोधित किया। असम में नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज के नेतृत्व में दिल्ली के नेताओं ने चुनाव प्रबंधन में सहयोग दिया।

देशभर में तेजी से बढ़ी भाजपा, सबसे ज्यादा सांसद और विधायक

पांच विधानसभा चुनावों ने भाजपा और उसके नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को देश की राजनीति में और मजबूत किया है। देश की 31 विधानसभाओं में अब भाजपा तथा एनडीए की 22 विधानसभाओं में अपनी सरकारें होंगी, जिनमें भाजपा के अपने मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व वाली 17 सरकारें होंगी। पश्चिम बंगाल की जीत के बाद इनमें एक सरकार और बढ़ी है। साथ ही संसद व विधानसभाओं में भाजपा व एनडीए की स्थिति भी मजबूत हो गई है। देशभर में कुल 4126 विधायकों में भाजपा के अपने लगभग 1800 विधायक होंगे। पश्चिम बंगाल जैसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य में जीत के बाद देश की राजनीति में भाजपा का दबदबा और बढ़ा है।

उत्तर भारत के ऊपरी और दक्षिण भारत के राज्यों में भाजपा अभी खाली हाथ है, लेकिन बाकी देश में उसका और एनडीए का परचम लहरा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा पांच विधानसभा चुनावों के पहले की स्थिति में भाजपा के पास देशभर में अपने 1656 विधायक थे। अब इनकी संख्या चुनाव नतीजों की अधिकृत घोषणा के बाद लगभग 1800 हो जाएगी। यानी आधे से थोड़ा कम ही भाजपा के पास विधायक होंगे। इनमें एनडीए को भी शामिल किया जाए तो यह संख्या 2500 के आसपास रह सकती है।

संसद के आकड़ों को देखा जाए तो भाजपा के लोकसभा के 543 सदस्यों में अपने 240 सांसद हैं और एनडीए के साथ यह संख्या 292 हो जाती है। इसी तरह से राज्यसभा में भाजपा के 245 में 113 सांसद हैं और एनडीए के साथ कुल संख्या 147 है। यानी संसद व विधानसभाओं में भाजपा तथा एनडीए विपक्ष पर लगातार भारी पड़ रहा है। विधान परिषदों में भी देशभर में 423 सदस्यों में भाजपा के 165 सदस्य हैं। एनडीए के 224 सदस्य हैं।

जनादेश 2026 : विदेशी मीडिया में सुर्खियों में रहे बंगाल के चुनावी नतीजे

पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने सोमवार को दुनियाभर में सुर्खियां बटोरीं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त को भारत की राजनीति में बड़े सत्ता परिवर्तन और प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते प्रभाव के रूप में देख रहा है।

दुनिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट

दुनिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों, चाहे वह बीबीसी हो,अलजजीरा या रॉयटर्स, सभी ने बंगाल के इन चुनावी नतीजों को ऐतिहासिक बदलाव के रूप में रेखांकित किया है।

किसने क्या लिखा?

बीबीसी: बीजेपी ने बंगाल पर कब्जा जमाया

बीबीसी ने लिखा कि मोदी की बीजेपी ने बंगाल पर कब्जा जमाया, जो भारत के सबसे कठिन राजनीतिक मोर्चों में से एक है। अपनी रिपोर्ट में बीबीसी ने लिखा है कि यहां भाजपा की जीत मोदी के 12 साल के शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जाएगी। यह केवल लगातार तीन बार सत्ता में रही पार्टी की हार नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत में पार्टी की लंबी राजनीतिक यात्रा की पूर्णता का भी प्रतीक है।

अलजजीरा का विश्लेषण

अलजजीरा ने लिखा है कि मोदी की पार्टी ने भारतीय राज्यों के चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। चार प्रमुख राज्यों में से दो में भाजपा की जीत से विपक्ष के काफी कमजोर होने की उम्मीद है। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी मोदी की मुखर आलोचक हैं और भारत के विपक्षी गठबंधन की एक प्रमुख सदस्य हैं। वह 2011 से राज्य की सत्ता में थीं। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में कभी शासन नहीं किया है।

रॉयटर्स की प्रतिक्रिया

रॉयटर्स ने लिखा है कि इस नतीजे से समान नागरिक संहिता और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण जैसी उनकी अहम नीतियों को गति मिल सकती है। ये जीत इस बात को भी रेखांकित करती हैं कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, उदारतापूर्वक आर्थिक मदद देने और देश के हिंदू बहुसंख्यक वर्ग से अपील करने की मोदी की रणनीति अचूक सफलता साबित हुई है, खासकर उन क्षेत्रों में भी जिन्हें लंबे समय से विपक्ष का गढ़ माना जाता रहा है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्ताधारी हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी ने सोमवार को अहम चुनाव में, विपक्ष का गढ़ माने जाने वाले पश्चिम बंगाल राज्य पर कब्जा जमा लिया।

भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में कम से कम 207 सीटें जीती हैं।

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