Indian Defence -भविष्य के तकनीकी दौर में ‘रिसर्च और सरप्राइज’ बेहद जरुरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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Indian Defence minister Shri Rajnath Singh Ji inaugurated a 3 days Symposium Program of Indian Army North and Central Command and Society of Indian Defence Manufacturers.

रक्षामंत्री ने तीन दिवसीय नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का किया उद्घाटन

प्रयागराज, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए अनुसंधान (रिसर्च) और “सरप्राइज एलिमेंट” बेहद जरूरी है। जो देश तकनीकी क्रांति के साथ सबसे तेजी से खुद को ढाल लेगा, वही भविष्य के युद्धों में निर्णायक बढ़त हासिल करेगा।

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को यहां भारतीय सेना के उत्तरी और केंद्रीय कमांड तथा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि महज 3-4 साल में युद्ध टैंक और मिसाइल से बदलकर ड्रोन और सेंसर आधारित हो गया है। अब रोजमर्रा की चीजें भी हथियार में बदल रही हैं, जिससे “सरप्राइज फैक्टर” और अहम हो गया है।

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को मजबूत किया गया है। डीआरडीओ ने अब तक 2,200 से अधिक तकनीकों का ट्रांसफर उद्योगों को किया है। रक्षा आर एंड डी बजट का 25 फीसदी हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक क्षेत्र को दिया गया। 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग इन क्षेत्रों द्वारा किया जा चुका है। नई नीति के तहत तकनीक ट्रांसफर शुल्क भी समाप्त कर दिया गया है और उद्योगों को डीआरडीओ के पेटेंट मुफ्त में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने उद्योगों से अपील की कि वे इन क्षेत्रों में आगे बढ़ें, और ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक हथियार, क्वांटम प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर विशेष ध्यान दें।

रिकॉर्ड स्तर पर रक्षा उत्पादन और निर्यात

उन्होंने बताया कि 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि आगे और तेज होगी और इसमें निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। उन्हाेंने आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि

ऑपरेशन सिंदूर भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। इस दौरान स्वदेशी मिसाइल सिस्टम जैसे आकाश, ब्रह्मोस आदि का सफल उपयोग हुआ, जिसने दुनिया को भारत की तैयारी दिखाई।

ज्ञान कॉरिडोर बनाने का सुझावउन्हाेंने कहा कि आत्मनिर्भरता और नई पहल सरकार की प्रमुख योजनाएं चलाई जा रही है। नवाचार और निजी भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट भी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने ज्ञान गलियारा, बनाने का सुझाव दिया, जिससे उद्योग, सेना और अकादमिक संस्थान मिलकर नई तकनीकों पर काम कर सकें। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्ध प्रयोगशालाओं में तय हो रहे हैं। ऐसे में भारत को तकनीक, रिसर्च और नवाचार के जरिए खुद को लगातार मजबूत करना होगा ताकि वह वैश्विक स्तर पर एक सशक्त सैन्य शक्ति बन सके।

समाराेह में केंद्रीय कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि यह मंच स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित करने में मदद करेगा। उत्तरी कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने कहा कि यूएएस, एआई और प्रिसिजन स्ट्राइक जैसी क्षमताएं अब युद्ध में अनिवार्य हो चुकी हैं। सिम्पोजियम में एमएसएमईएस, स्टार्टअप और डिफेंस कंपनियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें 284 कंपनियों ने अपनी नवीनतम तकनीक और समाधान प्रस्तुत किए।

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