Republic Day -मोटरसाइकिल पर करतब ‘नारी शक्ति’ का प्रदर्शन

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– सीआरपीएफ CRPF की 200 से अधिक महिला कर्मियों ने किया कर्तव्य पथ पर मार्च. Nari-shakti on Kartavya path.

– गणतंत्र दिवस: हरियाणा ने भविष्योन्मुखी ग्रामीण परिवेश को दर्शाया

– सीआरपीएफ की 200 से अधिक महिला कर्मियों ने किया कर्तव्य पथ पर मार्च

दिल्ली में 75वें गणतंत्र दिवस पर मोटरसाइकिलों पर सवार 265 महिलाओं ने ‘नारी शक्ति’ को प्रदर्शित करते हुए विभिन्न करतब दिखाए।

कर्तव्य पथ पर परेड के दौरान एकता और समावेशिता का संदेश पढ़ते हुए कहा गया कि देश भर में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की महिला कर्मी ‘सर्वत्र सुरक्षा’ प्रदान करती हैं।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की महिला कर्मियों ने मोटरसाइकिल पर साधना, चंद्रयान, सर्वत्र सुरक्षा, अभिवादन और योग से सिद्धि सहित विभिन्न बनावटों के माध्यम से अपनी बहादुरी, वीरता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया।

सहायक कमांडेंट सीमा नाग ने ‘अभिवादन’ बनावट का प्रदर्शन किया। इसके बाद एचसी रीता बिष्ट और सात अन्य महिला सैन्य कर्मियों ने ‘लक्षिता’ का प्रदर्शन किया।

नवीनतम हथियारों से लैस अमनदीप कौर और 25 अन्य महिला कर्मियों ने ‘सर्वत्र सुरक्षा’ का प्रदर्शन किया।

निरीक्षक प्रोमिला सेठी और 21 अन्य ने बलों की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया, जबक अनुपम ने 15 अन्य कर्मियों के साथ मिलकर सीमाओं पर सुरक्षा प्रदान करने वाली महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया। नारी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए निरीक्षक शहनाज खातून और 13 अन्य कर्मियों ने देश के भीतरी इलाकों में तैनात महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया।

गणतंत्र दिवस: हरियाणा ने भविष्योन्मुखी ग्रामीण परिवेश को दर्शाया

नई दिल्ली, 26 जनवरी (वेब वार्ता)। राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान हरियाणा की झांकी में विकसित भारत के सपने को साकार करने की कोशिश करती राज्य की महत्वाकांक्षी ‘मेरा परिवार-मेरी पहचान’ योजना को दर्शाया गया।

झांकी में डिजिटल उपकरण पकड़े एक छात्रा को दर्शाया गया जो राज्य के आधुनिकता की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

झांकी में कृषि के क्षेत्र में इसके दबदबे का भी प्रदर्शन किया गया और यह संदेश दिया गया कि राज्य एक करोड़ 20 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादक है।

झांकी के पिछले हिस्से में ‘परिवार पहचान पत्र’ के लाभों पर प्रकाश डाला गया, जैसे राशन की निर्बाध खरीद, किसान परिवारों के लिए कृषि सब्सिडी, युवा छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और बुजुर्गों के लिए पेंशन।

राज्य के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को प्रौद्योगिकी से जोड़कर सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करना है।

सीआरपीएफ की 200 से अधिक महिला कर्मियों ने किया कर्तव्य पथ पर मार्च

दुनिया के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ की 200 से अधिक महिला कर्मियों ने यहां 75वें गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर मार्च किया।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को पहली महिला बैंड टुकड़ियों में से एक को तैयार करने का गौरव हासिल है।

कांस्टेबल सोसा अल्पाबेन ने 100 महिला कर्मियों वाले सीआरपीएफ बैंड का नेतृत्व किया। यह बैंड ‘देश के हम हैं रक्षक’ धुन बजा रहा था।

बैंड के पीछे विशाखापत्तनम स्थित 234वीं बटालियन की सहायक कमांडेंट मेघा नायर के नेतृत्व में सीआरपीएफ की महिला टुकड़ी थी।

सीआरपीएफ दुनिया का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है जिसमें 246 बटालियन और 3.24 लाख से अधिक कर्मी हैं।

कर्तव्य पथ पर दिखी भारत की सैन्य शक्ति और महिला शक्ति की शानदार झलक

भारत ने शुक्रवार को अपने 75वें गणतंत्र दिवस की शुरुआत अपनी महिला शक्ति और सैन्य शक्ति के भव्य प्रदर्शन के साथ की, जिसमें विशिष्ट मार्चिंग टुकड़ियां, मिसाइलें, युद्धक विमान, निगरानी उपकरण और घातक हथियार प्रणालियां शामिल थीं।

समारोह के मुख्य अतिथि और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत पूरी दुनिया भारत की शक्ति का साक्षी बनी।

पहली बार, सेना की तीनों सेवाओं की संपूर्ण महिला टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया, जो देश की बढ़ती ‘नारी शक्ति’ को दर्शाता है।

परेड की शुरुआत पारंपरिक सैन्य बैंड के बजाय 100 से अधिक महिला कलाकारों द्वारा शंख, नादस्वरम और नगाड़ा जैसे भारतीय संगीत वाद्ययंत्र बजाते हुए की गई। अपने आप में पहली बार था।

परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सलामी लेने के साथ हुई। वह और मैक्रों, भारतीय राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के साथ, ‘पारंपरिक बग्गी’ में कर्तव्य पथ पर पहुंचे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कई अन्य केंद्रीय मंत्री, देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी, विदेशी राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में स्थित कर्तव्य पथ पर आयोजित सबसे बड़े कार्यक्रम में दर्शकों में शामिल थे।

सेना टुकड़ी 61 कैवलरी नेतृत्व कर रही थी जिसे 1953 में स्थापित किया गया था। इसके बाद 11 मशीनीकृत टुकड़ियां, 12 मार्चिंग टुकड़ियां और आर्मी एविएशन कोर के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों द्वारा फ्लाई-पास्ट किया गया।

टैंक टी-90 भीष्म, एनएजी मिसाइल सिस्टम, पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, हथियार का पता लगाने वाली रडार प्रणाली ‘स्वाति’, ड्रोन जैमर प्रणाली और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें परेड का हिस्सा बनीं।

कैप्टन संध्या के नेतृत्व में तीन सेवाओं की महिला टुकड़ी ने मार्च किया। इनमें कैप्टन शरण्या राव, सब लेफ्टिनेंट अंशू यादव और फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रृष्टि राव के साथ पूर महिला दल ने खूब तालियां बटोरीं।

मेजर सृष्टि खुल्लर के नेतृत्व में सेना के डेंटल कोर की कैप्टन अंबा सामंत, भारतीय नौसेना की सर्जन लेफ्टिनेंट कंचना और भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिव्या प्रिया के साथ एक अन्य महिला सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा दल ने भी मार्च किया।

सेना की मार्चिंग टुकड़ियों में मद्रास रेजिमेंट, ग्रेनेडियर्स, राजपूताना राइफल्स, सिख रेजिमेंट और कुमाऊं रेजिमेंट शामिल थीं।

भारतीय नौसेना की टुकड़ी में 144 पुरुष और महिला अग्निवीर शामिल थे, जिनका नेतृत्व ‘कंटिजेंट कमांडर’ के रूप में लेफ्टिनेंट प्रज्ज्वल एम और प्लाटून कमांडर के रूप में लेफ्टिनेंट मुदिता गोयल, लेफ्टिनेंट शरवानी सुप्रिया और लेफ्टिनेंट देविका एच ने किया।

इसके बाद नौसेना की एक झांकी प्रदर्शित की गई, जिसमें ‘नारी शक्ति’ और ‘स्वदेशीकरण के माध्यम से महासागरों में समुद्री शक्ति’ विषयों को दर्शाया गया।

झांकी के पहले भाग में भारतीय नौसेना में सभी भूमिकाओं और रैंकों में महिलाओं की शक्ति को प्रदर्शित किया गया, जबकि दूसरे भाग में पहले स्वदेशी कैरियर बैटल ग्रुप को दर्शाया गया, जिसमें विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, अत्यधिक क्षमता वाले एस्कॉर्ट जहाज दिल्ली, कोलकाता और शिवालिक और शामिल थे। कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी और रुक्मणि उपग्रह को भी प्रदर्शित किया गया।

भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में 144 वायुसैनिक और चार अधिकारी शामिल थे और इसका नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर रश्मि ठाकुर ने किया। स्क्वाड्रन लीडर सुमिता यादव और प्रतीति अहलूवालिया और फ्लाइट लेफ्टिनेंट कीर्ति रोहिल अतिरिक्त अधिकारी उनके साथ थे।

वायुसेना की झांकी की थीम ‘भारतीय वायु सेना: सक्षम, सशक्त, आत्मनिर्भर’ थी।

झांकी में एलसीए तेजस और एसयू-30 को हिंद महासागर क्षेत्र में उड़ान भरते हुए और एक सी-295 परिवहन विमान को कॉकपिट में महिला एयरक्रू द्वारा उड़ाते हुए दिखाया गया।

झांकी में बताया गया कि भारतीय वायुसेना सीमाओं के भीतर और बाहर दोनों जगह मानवीय सहायता प्रदान करने में सबसे आगे रही है।

परेड का एक अन्य आकर्षण ‘राष्ट्र निर्माण: पहले भी, अब भी, आगे भी और हमेशा’ थीम पर आधारित झांकी थी। इसमें राष्ट्र के प्रति पूर्व सैनिकों की बहादुरी और बलिदान को प्रदर्शित किया गया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपनी झांकी में अपने द्वारा विकसित कई घरेलू महत्वपूर्ण प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया।

झांकी भूमि, वायु, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष के सभी पांच क्षेत्रों में रक्षा कवच प्रदान करके राष्ट्र की रक्षा करने में महिला शक्ति की थीम पर आधारित थी।

उत्कृष्ट वैज्ञानिक सुनीता देवी जेना कंटिंजेट कमांडर थीं। उनके साथ पी लक्ष्मी माधवी, जे सुजाना चौधरी और ए भुवनेश्वरी भी मौजूद थीं।

परेड में पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, एंटी-सैटेलाइट मिसाइल, अग्नि -5, सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, नौसेना एंटी-शिप मिसाइल, और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ‘हेलिना’ का भी प्रदर्शन किया गया।

सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (क्यूआरएसएएम), हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’, उत्तम सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैन किए गए ऐरे रडार (एईएसएआर), उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और शक्ति साइबर सुरक्षा प्रणाली भी परेड में प्रदर्शित की गईं।

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