सलेम Salem, Tamil Nadu (तमिलनाडु), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी Rahul Gandhi की ‘शक्ति’ वाली टिप्पणी को लेकर ‘इंडिया’ गठबंधन I.n.d.i.a पर हमला जारी रखते हुए मंगलवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन ने इसे नष्ट करने की घोषणा कर अपने ‘बुरे इरादे’ का प्रदर्शन किया है।
मोदी ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) बार-बार हिंदुत्व का अपमान करते हैं, लेकिन किसी अन्य धर्म को निशाना नहीं बनाते। कांग्रेस और द्रमुक विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के अहम घटक हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के लोग जानबूझकर हिंदू आस्था का अपमान करते हैं और इसके खिलाफ उनके द्वारा हर बयान सोच-समझकर दिया जाता है।
उन्होंने कहा, ” ‘इंडी’ अलायंस वाले लोग बार-बार, जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान करते हैं। हिंदू धर्म के खिलाफ इनका हर बयान बहुत सोचा समझा हुआ होता है। आप देखिए, और किसी धर्म का अपमान द्रमुक और कांग्रेस का ‘इंडी’ अलायंस नहीं करता, किसी और धर्म के खिलाफ इनकी जुबान से एक शब्द नहीं निकलता। लेकिन हिंदू धर्म को गाली देने में ये एक सेकंड नहीं लगाते।”
उन्होंने नारी शक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में शक्ति का अर्थ है ‘मातृ शक्ति और नारी शक्ति’।
उन्होंने कहा, ”कांग्रेस और द्रमुक वाले इंडिया गठबंधन का कहना है कि वे इसे नष्ट कर देंगे।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि शक्ति का अर्थ मरियमन, मदुरै मीनाक्षीअम्मन और कांची कामाक्षीअम्मा जैसे राज्य के विभिन्न देवी-देवताओं से संबंधित है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कवि सुब्रमण्यम भारती ने भारत माता को ‘शक्ति’ के रूप में पूजा है।
उन्होंने कहा, ”तमिलनाडु उन्हें सजा देगा, जो शक्ति का नाश करने की बात करते हैं। मैं शक्ति उपासक हूं।”
नागरिकता (संशोधन) नियम पर रोक लगाने संबंधी आवेदनों पर तीन हफ्ते में जवाब दे केंद्र: शीर्ष अदालत
नई दिल्ली, 19 मार्च (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र से नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 के कार्यान्वयन पर रोक लगाने का आग्रह करने वाले आवेदनों पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ मामले में अब नौ अप्रैल को सुनवाई करेगी।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से कहा कि उन्हें 20 आवेदनों पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय चाहिए।
इन आवेदनों में आग्रह किया गया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का शीर्ष अदालत द्वारा निपटारा किए जाने तक संबंधित नियमों पर रोक लगाई जानी चाहिए।
मेहता ने पीठ से कहा, ”यह (सीएए) किसी भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छीनता।”
संसद द्वारा विवादास्पद कानून पारित किए जाने के चार साल बाद केंद्र ने 11 मार्च को संबंधित नियमों की अधिसूचना के साथ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।
इस कानून में 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को तेजी से भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है।