Madarsa Crime – मदरसा में भ्रष्टाचार : जांच के निर्देश

WhatsAppFacebookTwitterLinkedIn

Illegal Madarsa practices on Govt. money in UP’s Balrampur is under radar of investigative agencies for deep corruptions. मदरसा में भ्रष्टाचार मामले को लेकर मदरसा बोर्ड ने लिया संज्ञान

बलरामपुर, उत्तर प्रदेश के जनपद बलरामपुर के तुलसीपुर स्थित मदरसा जामिया अनवारूल उलूम में भ्रष्टाचार के मामले को लेकर मदरसा प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मदरसे में फर्जी नियुक्तियों को लेकर दर्ज मुकदमों और मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद, लखनऊ ने मामले का संज्ञान लिया है। परिषद ने फर्म्स, सोसाइटी एवं चिट्स, देवीपाटन मंडल अयोध्या को पत्र जारी कर सोसाइटी एवं मदरसे की जांच के निर्देश दिए हैं।

जारी आदेश में कहा गया है कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बलरामपुर की आख्या, थाना तुलसीपुर व कोतवाली नगर बलरामपुर में दर्ज एफआईआर, परिषद के आदेश 06 फरवरी 2026 तथा आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं के परीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि सोसाइटी, प्रबंध समिति द्वारा फर्जी बैठकों का आयोजन कर कूटरचित अभिलेख तैयार किए गए और उनका उपयोग किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर नियमों के विपरीत नियुक्तियां की गईं और सरकारी धन का आहरण कर उसका दुरुपयोग किया गया।

मामले में कुछ पदाधिकारियों ने शपथ पत्र देकर यह भी कहा है कि अभिलेखों में दर्शाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और वे संबंधित बैठकों में शामिल ही नहीं हुए थे। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि कई महत्वपूर्ण अभिलेख गायब या चोरी हो गए हैं। साथ ही मदरसा सेवा एवं प्रशासन विनियमावली 2016 के विपरीत कर्मचारियों को प्रबंध समिति में शामिल करने और तथ्य छिपाकर लाभ लेने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

परिषद ने निर्देश दिया है कि उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर सोसाइटी के पंजीकरण, प्रबंध समिति की वैधता, नियुक्तियों की प्रक्रिया, अभिलेखों की सत्यता तथा वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उल्लेखनीय है कि मदरसा अनवारूल उलूम में फर्जी नियुक्ति के मामले में पूर्व में तुलसीपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। वहीं शिकायत कर्ता तहव्वुर हसन द्वारा भी मदरसा बोर्ड को फर्जी नियुक्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शिकायत की गई थी, जिस पर बोर्ड ने पूरे मामले को संज्ञान में ले लिया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संस्था के प्रबंधक अहमदुल कादरी के अभिलेखीय हस्ताक्षरों, विशेष रूप से वेतन बिलों की, विज्ञान विधि प्रयोगशाला से जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पूरे मामले को लेकर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यशवंत मौर्य ने बताया कि प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है और जांच प्रक्रिया जारी है।

Share Reality:
WhatsAppFacebookTwitterLinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *