Shri K Pajanivel who was awarded for Padma award stunned the world by doing Dandvat Pranam’ to Prime Minister Modi just before receiving the Prestigious National award. PM Modi humbly raised him. राष्ट्रपति से पद्मश्री पुरस्कार लेने से पहले पीएम मोदी को किया दंडवत प्रणाम
नई दिल्ली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में विजेताओं को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए। 5000 साल पुरानी मार्शल आर्ट ‘सिलंबम’ को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाले के पजानिवेल (के पजानिवेल) को भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया। पजानिवेल ने राष्ट्रपति से पद्मश्री पुरस्कार लेने से पहले पीएम मोदी को दंडवत प्रणाम किया। के पजानिवेल ने ‘सिलंबम’ को विभिन्न महाद्वीपों में लोकप्रिय बनाया। पुडुचेरी के गांव पूरनंकुप्पम के रहने वाले 53 वर्षीय पजानिवेल ने बचपन में ही मार्शल आर्ट को अपनाया और अपना पूरा जीवन इसे समर्पित कर दिया। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और उनमें जीत हासिल की।

अंतरराष्ट्रीय स्तर की सिलंबम प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीता
पजानिवेल ने साल 2002 और 2004 में तमिलनाडु में आयोजित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय चैंपियनशिप सहित कई जीत हासिल की। उन्होंने 2002 में तिरुचिरापल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की सिलंबम प्रतियोगिता में 56-60 किलोग्राम वर्ग में प्रथम पुरस्कार जीता। साल 2004 में उन्हों ने नागरकोइल में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की सिलंबम प्रतियोगिता में 55-60 किलोग्राम वर्ग में प्रथम पुरस्कार जीता। पजानिवेल सिलंबम से आगे कुथु वरिसाई, कलारी पट्टु, तलवारबाजी, पुलियाट्टम और कालियाट्टम जैसी कलाओं से जुड़े हुए हैं।

साधारण परिवार में जन्मे पजानिवेल ने 13 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी और उनकी मां ने अकेले 4 बच्चों की परवरिश की। स्थानीय कार्यक्रमों के दौरान वह तमिलनाडु की प्राचीन युद्धकला सिलंबम से जुड़े और इसके बाद वह पूरी तरह इसी कला में रम गए। परिवार के आर्थिक हालात को देखते हुए पजानिवेल ने 7वीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ा और बस साफ करने का काम शुरू किया। उस समय एक बस साफ करने के सिर्फ 3 रुपये मिलते थे। धीरे-धीरे वह बस चालक बन गए लेकिन सिलंबम के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। जब भी मौका मिलता, वह लगातार इसका अभ्यास करते थे।

पजानिवेल ने सिलंबम को नई पहचान दिलाई
एक समय ऐसा आया जब पजानिवेल ने बस चालक की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह सिलंबम को ही अपना जीवन बना लिया। उन्होंने देश ही नहीं दुबई और पेरिस जैसे शहरों में भी उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन कर सिलंबम को नई पहचान दिलाई है। दक्षिण भारत की विभिन्न मार्शल आर्ट में महारत हासिल करने के बाद, उन्होंने 2022 में पुडुचेरी में अपनी ही जमीन पर मामल्लन सिलंबम और लोक कला विकास क्लब की स्थापना की। के पजानिवेल ने 5000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया है जिनमें से अधिकांश मध्यम आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। वह स्कूली बच्चों के लिए फ्री समर कैंप आयोजित करते हैं। उनके शिष्यों में यूरोप और ब्राजील के छात्र भी शामिल हैं है। पजानिवेल को देश की लोक मार्शल आर्ट में उनके योगदान के लिए 2023 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

साल 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कार
राष्ट्रपति ने साल 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इनमें पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। ये पुरस्कार दो अलग-अलग समारोहों में प्रदान किये जाने हैं। ये प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल और सिविल सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रदान किये जाते हैं।

इस साल हिंदी फिल्मों के अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत और शास्त्रीय संगीतकार एवं वायलिन वादक एन राजम को पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, चुनौतियों का सामना कर रहे पारंपरिक भारतीय कला ‘अवधान’को पुनर्जीवित करने वाले शतावधानी आर गणेश कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय सुरेश कुमार कोटक और उदर रोग विशेषज्ञ कल्लीपट्टी रामासामी पलानीस्वामी को पद्म भूषण से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने विज्ञापन गुरु पीयूष पांडे और पूर्व सांसद विजय कुमार मल्होत्रा को भी मरणोपरांत इस सम्मान से नवाजा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर भुल्लर, अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पूर्व महानिदेशक के. विजय कुमार को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।