The second time winner of 2 times Victorious President Of America Donald Trump have proposed to seize “Daylight Saving Time”. He stated that this had caused major losses to the people of the state in health, safety, productivity and performances.
वाशिंगटन, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी डेलाइट सेविंग टाइम (डीएसटी) को खत्म करने की कोशिश करेगी, जो ‘बहुत महंगा’ है। श्री ट्रम्प ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, “रिपब्लिकन पार्टी डेलाइट सेविंग टाइम को खत्म करने के लिए अपने सर्वोत्तम प्रयासों का उपयोग करेगी, जिसका एक छोटा, लेकिन मजबूत निर्वाचन क्षेत्र है। ऐसा नहीं होना चाहिए! डेलाइट सेविंग टाइम असुविधाजनक है, और हमारे राष्ट्र के लिए बहुत महंगा है।”

उल्लेखनीय है कि श्री ट्रम्प पांच नवंबर को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत हासिल की थी। इससे पहले वह 2017-2021 तक राष्ट्रपति रहे थे। इस जीत के साथ ही श्री ट्रम्प 19वीं सदी के बाद से चार साल के अंतराल के बाद दोबार राष्ट्रपति बनने वाले पहले अमेरिकी राजनेता बन गए। अब राज्यों के निर्वाचक मंडल को 17 दिसंबर को मतदाताओं की इच्छा के अनुसार उम्मीदवारों के लिए मतदान करना होगा, और नयी कांग्रेस 06 जनवरी को मतदान के परिणामों को मंजूरी देगी। शपथ ग्रहण 20 जनवरी को होगा।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका के अधिकांश भाग में डीएसटी का पालन किया जाता है, जिसमें दिन बड़ा होने पर घड़ी की सुई एक घंटा आगे कर दी जाती है, ताकि दिन के प्रकाश का अधिक इस्तेमाल किया जा सके। यहां पर 1966 के यूनिफ़ॉर्म टाइम एक्ट ने डेलाइट सेविंग टाइम का पालन करने वाले राज्यों के लिए नियमों का एक समान सेट स्थापित किया।

डेलाइट सेविंग टाइम को अपनाने के पीछे मकसद है कि दिन के उजाले का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाया जा सके। इससे कृत्रिम प्रकाश की ज़रूरत कम होती है और ईंधन की बचत होती है। डेलाइट सेविंग टाइम मार्च के दूसरे रविवार को शुरू होता है और नवंबर के पहले रविवार को समाप्त होता है, जिसमें स्थानीय समयानुसार 2:00 बजे समय परिवर्तन होता है और घड़ी की सुई एक घंटा आगे बढ़ा दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण करना है।\
संयुक्त राज्य अमेरिका में ‘मानक समय’ (Standard Time) लागू हो गया है, जिससे लोगों को अपनी घड़ियों को एक घंटा पीछे करना पड़ा और इससे उन्हें नीद के लिए एक घंटे का और समय मिलेगा।
‘डेलाइट सेविंग टाइम’ :
दिवालोक बचत समय (डेलाइट सेविंग टाइम – Daylight Saving Time – DST) को ग्रीष्मसमय (Summer Time) भी कहा जाता है। DST, गर्मियों के महीनों के दौरान घड़ियों को ‘मानक समय’ (Standard Time) से एक घंटे आगे करने की प्रक्रिया है ताकि दिन की अवधि का बेहतर उपयोग किया जा सके।
इस प्रणाली का सुझाव पहली बार बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा 1784 में एक मनमौजी से निबंध में दिया गया था।

उत्तरी गोलार्ध में स्थित देशों में, दिन के उजाले का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से, मार्च के अंत में या अप्रैल में घड़ियों को आमतौर पर मानक समय से एक घंटे आगे सेट कर दिया जाता है, और सितंबर के अंत या अक्टूबर में घड़ियों को फिर से एक घंटा पीछे सेट कर दिया जाता है।
डेलाइट सेविंग टाइम (DST) उपयोग करने के उद्देश्य :
ऊर्जा दक्षता हासिल करना: ऊर्जा की अधिक खपत की वजह से होने वाले जलवायु परिवर्तन के कारण ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) पर अधिक ध्यान दिया जाना, ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ (DST) को प्रासंगिक बनाता है। इस प्रकार, DST पर्यावरण की दृष्टि से संधारणीय अवधारणा है।
सूर्योदय और सूर्यास्त को घड़ियों में देरी से दिखाए जाने को सुनिश्चित करना – वस्तुतः दिन का लंबा समय सुनिश्चित करता है।
दिन-प्रतिदिन के सामान्य कार्यों को एक घंटे पहले पूरा करना।
डेलाइट सेविंग टाइम (DST), का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा बचत करना है।
संबंधित मुद्दे और चिंताएं :
कृषि संबंधी चिंताएं : किसानों द्वारा ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ (DST) का विरोध किया जाता है, इसका एक कारण यह है, कि ओस के वाष्पित होने के बाद अनाज की कटाई सबसे अच्छी होती है, इसलिए जब गर्मियों में खेतों में काम करने वाले श्रमिक जल्दी आते हैं और जल्दी चले जाते हैं, जिससे उनके श्रम का उचित उपयोग नहीं हो पाता है।
‘डेलाइट सेविंग टाइम’ की वजह से ‘डेयरी किसान’ भी चिंतित होते हैं, क्योंकि उनकी गायें दूध देने के समय के प्रति संवेदनशील होती हैं, इसलिए ग्राहकों को पहले दूध देने की बाध्यता से उनका सिस्टम बाधित हो जाता है।
कार्यस्थल पर लगने वाली चोटों में वृद्धि: पूरे अमेरिका में खनन-कार्यो के दौरान लगने वाली चोटों के एक अध्ययन में पाया गया है, कि सोमवार को ‘डेलाइट सेविंग टाइम’ में बदलाव के बाद कार्यस्थल पर लगने वाली चोटों में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
श्रम और कार्य उत्पादकता पर असर : डीएसटी के एक सप्ताह बाद कार्यस्थल पर उत्पादकता में भारी कमी आती है। नींद में कमी के कारण लोग थके हुए और सुस्त होते हैं।