Bangladesh Update-बांग्लादेश में एक और हिंदू कारोबारी की हत्या

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Another Hindu murdered in Bangladesh by muslim locals in a row. Attacking mob have killed many hindu families and individuals in last past 15 days after days and local police authorities failed to secure hindus of Bangladesh. Now HAADI protstores are demanding total ban on work permits for Indians.

ढाका, बांग्लादेश के नरसिंगदी शहर में अज्ञात हमलावरों ने एक किराना दुकान के 40 वर्षीय हिंदू मालिक की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।

यह घटना सोमवार रात को हुई। इससे कुछ ही घंटों पहले बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में सोमवार को अज्ञात हमलावरों ने एक हिंदू व्यापारी को सिर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी, जो एक समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक भी थे। ‘बीडीन्यूज 24’ की खबर के अनुसार, पलाश उपजिला के चारसिंदूर बाजार में दुकानदार मणि चक्रवर्ती पर सोमवार रात करीब 11 बजे हमला कर उनकी हत्या कर दी गई। पलाश पुलिस थाना प्रमुख (ओसी) शाहेद अल मामून ने बताया कि मणि शिबपुर उपजिला के साधरचार यूनियन निवासी मदन ठाकुर के बेटे थे।

मणि चारसिंदूर बाजार में किराना दुकान के मालिक थे। हाल के सप्ताहों में मारे गए वह तीसरे हिंदू कारोबारी हैं। पुलिस और स्थानीय लोगों ने बताया कि मणि जब सोमवार रात दुकान बंद करके अपने घर लौट रहे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार एवं स्थानीय रूप से निर्मित हथियार से वार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मणि की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोग उन्हें पलाश उपजिला स्वास्थ्य परिसर ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शाहेद ने कहा कि पुलिस घटना की सूचना मिलने के बाद तुरंत मौके पर पहुंची और दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए नरसिंगदी सदर अस्पताल के शवगृह भेजा गया है। इससे पहले भी हिंदू समुदाय के सदस्यों के खिलाफ हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। सोमवार को खुलना मंडल में जेस्सोर के केशबपुर उपजिला में अरुआ गांव निवासी 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी के सिर में अज्ञात लोगों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। यह घटना सोमवार को कपालिया बाजार में शाम करीब पौने छह बजे हुई।

इसके पहले तीन जनवरी को खोकन चंद्र दास (50) पर चाकू से हमला करने के बाद उन्हें जला दिया गया था जिससे उनकी मौत हो गई थी। इसी तरह 24 दिसंबर को राजबारी कस्बे के पांगशा उपजिला में एक अन्य हिंदू व्यक्ति अमृत मंडल की जबरन वसूली के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

मयमनसिंह शहर में 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास (25) की ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी और उनके शव को आग लगा दी। चटगांव के बाहरी इलाके रावजान क्षेत्र में 23 दिसंबर को अज्ञात लोगों ने कतर में काम करने वाले प्रवासी कामगारों सुख शिल और अनिल शिल के घर में आग लगा दी, लेकिन वे बाल-बाल बच गए।

बांग्लादेश: हादी के लिए कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला, भारतीयों के ‘वर्क परमिट’ पर रोक की मांग की

ढाका, छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर मंगलवार को ढाका में उनकी पार्टी ने एक दिवसीय रैली का आयोजन किया। इस रैली में बांग्लादेश में रहने वाले सभी भारतीयों के ‘वर्क परमिट’ रद्द करने सहित अन्य कदमों की मांग की गई।

‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार के अनुसार, ‘इंकलाब मंच’ ने अपनी चार सूत्री मांगों के तहत उन कथित हत्यारों की वापसी की भी मांग की है, जिनके बारे में उसका दावा है कि उन्होंने भारत में शरण ली है। पार्टी का कहना है कि अगर भारत उन्हें सौंपने से इनकार करता है तो बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का रुख करना चाहिए।

भारतीय अधिकारियों ने हादी के हत्यारों के भारत में घुसने के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि अवैध सीमा पार करने का कोई सबूत नहीं है।

अखबार ने आयोजकों के हवाले से बताया कि ‘न्याय के लिए मार्च’ दिन में करीब 11:30 बजे शाहबाग से शुरू हुआ, जिसमें कार्यकर्ता 10 पिकअप वैन में और पैदल चलकर साइंस लैब, मोहम्मदपुर, मीरपुर-10, उत्तरा, बसुंधरा, बड्डा, रामपुरा और जात्राबारी सहित कई प्रमुख चौराहों से गुजरते हुए शाम को शाहबाग लौट आएंगे। प्रतिभागियों ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य हादी की हत्या की जांच में तेजी लाने पर जोर देना है। उन्होंने मांग की कि हत्यारे, साजिशकर्ताओं, सहयोगियों और उन्हें शरण देने वालों सहित सभी संबंधित लोगों पर 12 फरवरी के संसदीय चुनावों से पहले मुकदमा चलाया जाए।

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘हम हादी के खून को व्यर्थ नहीं जाने देंगे,’ ‘मेरा भाई कब्र में पड़ा है जबकि हत्यारा आज़ाद क्यों है?’ और ‘लाल और हरा झंडा, इंकलाब का झंडा-आप हादी को देख सकते हैं’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि सेना खुफिया महानिदेशालय के भीतर कथित ‘फासीवादी सहयोगियों’ की पहचान की जाए, उन्हें गिरफ्तार किया जाए और न्याय के कठघरे में लाया जाए।

हादी (32) जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। हिसंक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी। हादी की 12 दिसंबर को ढाका में एक चुनावी अभियान के दौरान गोली मार कर हत्या कर दी गई।

वह 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों में भी उम्मीदवार थे। हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, लेकिन 18 दिसंबर को उनका निधन हो गया। हादी की हत्या ने बांग्लादेश में नए सिरे से राजनीतिक अशांति पैदा कर दी है और भारत के साथ संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है, क्योंकि कुछ समूहों ने इस अपराध में भारत की संलिप्तता का आरोप लगाया। भारत ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है।

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