Exclusive -अगर पार्टियां पंथ को देश से ऊपर रखती हैं तो हमारी स्वतंत्रता दूसरी बार खतरे में पड़ जाएगी: धनखड़

WhatsAppFacebookTwitterLinkedIn

Special report on Constitution Day Parliament Celebration , attended by all the important political personalities of Indian Govt. inc. President of India / Bharat, Prime minister among the top governing leaders New Delhi.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि अगर पार्टियां पंथ को देश से ऊपर रखती हैं तो हमारी स्वतंत्रता दूसरी बार खतरे में पड़ जाएगी।

संविधान को अंगीकार किए जाने की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर साल भर चलने वाले समारोहों की शुरुआत के लिए पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि रणनीति के तहत व्यवधान पैदा करना लोकतंत्र के लिए खतरा है।

धनखड़ ने कहा, ‘‘यह समय रचनात्मक संवाद, बहस और सार्थक चर्चा के माध्यम से हमारे लोकतांत्रिक मंदिरों की पवित्रता को बहाल करने का समय है ताकि हमारे लोगों की प्रभावी ढंग से सेवा की जा सके।’’

इस बात का उल्लेख करते हुए कि संविधान ने निपुणता से लोकतंत्र के तीन स्तंभों — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका– को स्थापित किया और प्रत्येक की एक परिभाषित भूमिका है, धनखड़ ने कहा, ‘‘लोकतंत्र का सबसे अच्छा पोषण तब होता है जब उसके संवैधानिक संस्थान अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों का पालन करते हुए समन्वय, तालमेल और एकजुटता से काम करें।’’

उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य के इन अंगों के कामकाज में, क्षेत्र विशिष्टता भारत को समृद्धि और समानता की अभूतपूर्व ऊंचाइयों की ओर ले जाने में इष्टतम योगदान देने का सबसे अच्छा साधन है।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा में सदन के नेता जे पी नड्डा, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (राज्यसभा) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू मंच पर मौजूद थे।

इस अवसर पर भारत के संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ को समर्पित एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया। साथ ही ‘भारत के संविधान का निर्माण: एक झलक’ और ‘भारत के संविधान का निर्माण और इसकी गौरवशाली यात्रा’ शीर्षक वाली पुस्तकों का विमोचन किया गया।

राष्ट्रपति ने संविधान के संस्कृत और मैथिली अनुवादों का अनावरण किया। यह समारोह ‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’ अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संविधान में निहित मूल मूल्यों को दोहराते हुए संविधान के निर्माताओं के योगदान का सम्मान करना है।

नेशनल 07

पूरी गरिमा, मर्यादा से सहमति या असहमति जतायें सांसद : बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर सभी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को आज नसीहत दी कि जिस प्रकार से संविधान सभा में अलग अलग विचार धारा वाले विद्वानों ने एक एक अनुच्छेद पर विचार मंथन करके पूरी गरिमा एवं मर्यादा से सहमति या असहमति व्यक्त की, हमें भी उसी उत्कृष्ट परंपरा को सदनों में अपनाना चाहिए।

श्री बिरला ने संविधान सदन के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित ऐतिहासिक संविधान दिवस कार्यक्रम में अपने स्वागत उद्बोधन में यह बात कही। उन्होंने अपने संबोधन में संविधान दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेतागण और सांसदों का अभिनंदन करते हुए कहा, “आज संविधान दिवस का उत्सव मना रहे करोड़ों भारतीयों का मैं हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करता हूँ। 75 वर्ष पहले आज ही के दिन इस पवित्र स्थान पर हमारे संविधान को अंगीकृत किया गया था। राष्ट्रपति महोदया के नेतृत्व में सम्पूर्ण देश एक साथ मिलकर आज संविधान के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रहा है। आज करोड़ों देशवासी संविधान की प्रस्तावना का पाठ करके देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे।”

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रेरणा से वर्ष 2015 में हमने हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। हमारा संविधान हमारे मनीषियों के वर्षों के तप, त्याग, विद्वता, सामर्थ्य और क्षमता का परिणाम है। इसी केन्द्रीय कक्ष में लगभग 3 वर्षों के कठिन परिश्रम के बाद उन्होंने देश की भौगोलिक और सामाजिक विविधताओं को एक सूत्र में बांधने वाला संविधान बनाया।

उन्होंने कहा, “संविधान सभा में अलग अलग विचारधारा वाले सदस्य थे। इसके बावजूद उन्होंने एक-एक अनुच्छेद पर विचार मंथन किया, पूरी गरिमा और मर्यादा से अपनी सहमति असहमति व्यक्त करते हुए हमारे संविधान की रचना की। सार्थक एवं गरिमापूर्ण संवाद की इसी उत्कृष्ट परंपरा को हमें अपने सदनों में अपनाना चाहिए।”

श्री बिरला ने कहा कि हमारा संविधान देश में सामाजिक-आर्थिक बदलावों का सूत्रधार रहा है। कर्तव्यकाल में हम सामूहिक प्रयासों से विकसित भारत की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। इन 75 वर्षों में हमारी संसद के माध्यम से आम जनता के जीवन में सामाजिक आर्थिक परिवर्तन लाए गए हैं जिससे लोकतंत्र में जनता की आस्था मजबूत हुई है।

संविधान ने हमारे लोकतंत्र के तीनों स्तंभों, “विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका” को आपसी समन्वय के साथ सुचारु रूप से कार्य करने की व्यवस्था दी है। इन 75 वर्षों में इन तीनों अंगों ने श्रेष्ठता से कार्य करते हुए देश के समग्र विकास में अपनी भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा था-“हमारा संविधान एक ऐसा दस्तावेज होना चाहिए जो न केवल हमारे देश की स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करे, बल्कि हमारे देश के लोगों को एक साथ लाने में भी मदद करे।” हमें बाबा साहब के इन शब्दों से हमारे महान संविधान निर्माताओं के भारतीय समाज के प्रति दृष्टिकोण को समझना चाहिए।

श्री बिरला ने कहा कि हमारा संविधान हमें वसुधैव कुटुम्बकम यानि सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है, के सिद्धांत का अनुसरण करने की प्रेरणा देता है। संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता से विश्व पटल पर भारत की छवि को मजबूत हुई है। उन्होंने कहा, “मैं सभी माननीय सांसदों से अनुरोध करूँगा कि वे अपने क्षेत्रों में संविधान के अंगीकार होने के 75 वर्ष को जनता की सहभागिता से एक उत्सव के रूप में मनाएं, जिससे राष्ट्र प्रथम की भावना और अधिक सुदृढ़ हो।”

Share Reality:
WhatsAppFacebookTwitterLinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *