Good News – अमित शाह ने अमूल, इफको को विश्व की शीर्ष सहकारी संस्था होने पर बधाई दी

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Home Minister Shri Amit Shah Ji appreciated Cooperative organizations AMUL and IFFCO for becoming world’s largest and top most acknowledged cooperative organizations. As per the 2025 list generated by World Cooperative Monitor International Cooperative Alliance ICA.

श्री शाह ने कहा कि जिस प्रकार जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी ताक़त का अहसास कराया था, उसी प्रकार कोऑपरेटिव संस्थाओं को उनकी ताक़त से परिचय कराने का वक़्त है।

अमूल और इफको ने खास मुकाम हासिल किया है। अमूल ब्रांड के तहत डेयरी उत्पादों का विपणन करने वाले गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) को प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) प्रदर्शन के आधार पर दुनिया की पहले नंबर की सहकारी संस्था का दर्जा दिया गया है। वहीं, इफको ने इसी रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल किया है। गृहमंत्री अमित शाह ने इस खास उपलब्धि पर बधाई दी है। एक्स पर लिखे अपने खास संदेश में गृहमंत्री ने इसका श्रेय पीएम मोदी की दूरदर्शिता भरे नेतृत्व को दिया।

बता दें कि यह रैंकिंग इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (आईसीए) वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर 2025 ने जारी की है। इस सूची की घोषणा कतर के दोहा में आईसीए सीएम50 सम्मेलन में की गई। जीसीएमएमएफ ने मंगलवार को बयान में कहा कि यह पहचान अमूल के अपने सहकारिता मॉडल के जरिए लाखों डेयरी किसानों को मजबूत बनाने में योगदान को दर्शाता है। इससे पूरे भारत में समावेशी वृद्धि और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलता है।

इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस का मुख्यालय ब्रसेल्स में है। यह दुनिया भर की सहकारी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है और उनके टिकाऊ कारोबारी मॉडल को बढ़ावा देता है। जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने कहा कि अमूल एक ऐसा ब्रांड है जिसका स्वामित्व पूरी तरह किसानों के पास है। वे दूध इकट्ठा करने और विनिर्माण से लेकर विपणन तक सारा प्रबंधन करते हैं। हमारा असर सिर्फ आर्थिक तक ही सीमित नहीं है। हमारा मॉडल गरीबी कम करने और लैंगिक समानता से लेकर स्थिर समुदाय तक संयुक्त राष्ट्र के कई टिकाऊ विकास लक्ष्यों का समर्थन करता है।

केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने कहा कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि क्या सहकारिता आंदोलन आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने सहकारी आंदोलन की अच्छी बातों के बारे में बताते हुए गुजरात के अमूल का ज़िक़्र किया और कहा कि अमूल का जन्म सरदार पटेल की दीर्घदृष्टि से हुआ। उन्होंने कहा कि 1946 में अंग्रेज़ों ने एक फ़ैसला किया कि किसानों को अनिवार्य रूप से अपना सारा दूध एक निजी कंपनी को देना होगा। इसके ख़िलाफ़ खेड़ा ज़िले में एक आंदोलन हुआ और सरदार पटेल ने त्रिभुवनभाई को कहा कि जब तक दूध बेचने की व्यवस्था नहीं होती, तब तक इसके ख़िलाफ़ आंदोलन सफल नहीं हो सकता और वहीं से अमूल की शुरूआत हुई।

सरदार पटेल के मार्गदर्शन में त्रिभुवनभाई पटेल ने दो प्राथमिक ग्राम दुग्ध उत्पादक समितियों का पंजीकरण किया जिसमें 80 किसान जुड़े और वो अमूल आज कहां है। वर्ष 2020-21 में अमूल का ग्रुप टर्नओवर 53 हज़ार करोड़ रूपए को पार कर गया है और 36 लाख किसान परिवार इससे जुड़े हुए हैं, विशेषकर महिलाओं को सशक्त करने का काम इसने किया है। बड़ी से बड़ी कॉर्पोरेट डेयरी जो नहीं कर सकती, वो हमारे अमूल ने किया है। इसी प्रकार लिज्जत पापड़ का ज़िक़्र करते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि 1959 में जसवंतीबेन पोपट नाम की एक साहसी गुजराती महिला ने 80 बहनों को साथ लेकर पापड़ बनाने की एक कोआपरेटिव कि शुरूआत की थी, और वर्ष 2019 में उनका कारोबार 1600 करोड़ रूपए से अधिक का था और 80 करोड़ रूपए का निर्यात करती हैं। आज लगभग 45,000 महिलाएं लिज्जत के कोऑपरेटिव आंदोलन से जुड़ी हैं और ये सक्सेस स्टोरी देशभर की महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है। आज अमूल और लिज्जत की सफलता में देश की महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है।

उन्होंने कहा कि इफ़्को ने इस देश की हरित क्रांति को एक नई दिशा देने का काम किया है। वर्ष 1967 में 57 कोऑपरेटिव्स के साथ एक सोसायटी बनी और वो बढ़ते-बढ़ते आज 36,000 से ज़्यादा कोऑपरेटिव को सदस्य बनाकर लगभग 5.5 करोड़ किसानों को उनका लाभांश पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि एक बहुत बड़ी कंपनी अगर कुछ कमाएगी तो उसका सबसे बड़ा हिस्सा उसके मालिक़ के पास जाएगा, लेकिन इफ़्को जो कुछ भी कमाएगी उसकी पाई-पाई 5.5. करोड़ किसानों के घर में जाएगी और इसी को कोऑपरेटिव कहते हैं।

श्री अमित शाह ने नैनोटेक्नोलॉजी को ज़मीन पर उतारने के लिए इफ़्को की प्रशंसा की। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में, कोआपरेटिव संस्थाओं के माध्यम से ही, उर्वरक और खाद आयात करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और हम आत्मनिर्भर बनेंगे। इसी प्रकार कृभको भी 9,500 समितियों का एक संघ है और इसकी शेयर पूंजी लगभग 388 करोड़ रूपए है और शेयरधारकों को एक वर्ष में 2118 करोड़ रूपए का लाभांश कृभको ने दिया है। उन्होंने कहा कि सफलता की कहानियों की ये सूची बहुत लंबी है जिन्होंने सहकारी आंदोलन के माध्यम से छोटे-छोटे लोगों से पूंजी इकट्ठा करके देश के अर्थतंत्र और विकास में कितना बड़ा योगदान दिया है और सारा मुनाफ़ा छोटे-छोटे निवेशकों के घरों में जाता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है जैसे कि बीज के क्षेत्र में कोऑपरेटिव का योगदान हो सकता है और बीज को बाहर से लाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। श्री शाह ने सफल कोऑपरेटिव का आह्वान करते हुए कहा कि एक-एक क्षेत्र में अगर विस्तारीकरण किया जाए तो 5 साल में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं होगा जहां कोऑपरेटिव की पैठ नहीं होगी और ये सहकारिता मंत्रालय कोऑपरेटिव संस्थाओं को मज़बूत करने, उनमें पारदर्शिता लाने, उनका आधुनिकीकरण करने, कम्प्यूटरीकृत करने और स्पर्धा में टिक सकने वाली कोऑपरेटिव तैयार करने के लिए ही बनाया गया है।

श्री शाह ने कहा कि जिस प्रकार जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी ताक़त का अहसास कराया था, उसी प्रकार कोऑपरेटिव संस्थाओं को उनकी ताक़त से परिचय कराने का वक़्त है। उन्होंने कहा कि आज देश में लगभग 91% गांव ऐसे हैं, जहां कोई न कोई कोऑपरेटिव संस्था काम करती है, दुनिया में कहीं ऐसा नहीं है। 8,55,000 से ज़्यादा पंजीकृत सहकारी समितियां हैं और साढ़े आठ लाख से ज़्यादा क्रेडिट सहकारी समितियां हैं, ऋण ना देने वाली सहकारी समितियों की संख्या 60 लाख से ज़्यादा है, 17 से ज़्यादा राष्ट्रीय स्तर के सहकारी संघ हैं, 33 राज्यस्तरीय सहकारी बैंक हैं, 363 ज़िलास्तरीय सहकारी बैंक हैं। एक तरह से हर दसवें गांव पर एक पैक्स है जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और इन पैक्‍स के माध्यम से किसान कल्याण किया जा सकता है। सरकार द्वारा भेजे गए ऋण को पारदर्शी रूप से किसान तक पहुंचाने का काम पैक्स द्वारा किया जाता है। यह पैक्स ही खेती के लिए उपयोगी चीजों को किसानों तक पहुंचाने का माध्यम है और इस पैक्स को मजबूत करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

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