Special Report -प्रधानमंत्री मोदी क्रोएशिया के लिए रवाना हुए

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जी-7 / G 7 के लिए कनाडा Canada की यात्रा का समापन, प्रधानमंत्री मोदी PM Modi क्रोएशिया Croacia के लिए रवाना हुए

कनानास्किस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कनाडा दौरा सफल रहा है। अब पीएम मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम पड़ाव में क्रोएशिया के लिए रवाना हो गए हैं। इसके पहले उन्होंने कनाडा के लोगों और सरकार को जी7 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जी-7 सम्मेलन में भाग लेने के लिए कनाडा की अपनी सफल यात्रा पूरी की। प्रधानमंत्री मोदी विशेष आमंत्रण पर कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गए। उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेताओं के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें की। पीएम मोदी की जी-7 शिखर सम्मेलन में लगातार ये छठी भागीदारी रही।

PM departs from Canada after attend the 51st G7 Summit to Croatia on June 17, 2025.

कनाडा दौरे को लेकर पीएम मोदी ने एक पोस्ट में लिखा, “कनाडा की एक सफल यात्रा का समापन। कनाडा के लोगों और सरकार को जी7 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के लिए धन्यवाद, जिसमें विविध वैश्विक मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई। हम वैश्विक शांति, समृद्धि और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

पीएम मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा की, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उनके बारे में जानकारी दी। रणधीर जायसवाल ने “एक्स” पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा की अपनी बहुत ही सफल यात्रा पूरी की। जी7 शिखर सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बातचीत की। कई नेताओं से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।”

पीएम मोदी फिलहाल क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के निमंत्रण पर पीएम मोदी इस यात्रा पर गए हैं। ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली यात्रा होगी, जो द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

तय कार्यक्रम के मुताबिक, पीएम मोदी वहां प्रधानमंत्री प्लेंकोविच के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच से मिलेंगे। क्रोएशिया की ये यात्रा यूरोपीय संघ में भागीदारों के साथ संबंध को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

भारत-फ्रांस हमारी पृथ्वी की बेहतरी के लिए मिलकर काम करते रहेंगे : पीएम मोदी

कनानास्किस (कनाडा), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत करके खुशी जताई।

भारत और फ्रांस के बीच मजबूत संबंधों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ अकाउंट पर लिखा, “मेरे मित्र, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत और विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना, हमेशा खुशी की बात होती है। भारत और फ्रांस हमारी पृथ्वी की बेहतरी के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।”

इस साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद मैक्रों ने 12 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि इस दुख की घड़ी में फ्रांस, भारत और उसके लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।

PM meets the President of France, Mr. Emmanuel Macron on the sidelines of the 51st G7 Summit at Kananaskis, in Canada on June 17, 2025.

मैक्रों ने यह भी कहा कि फ्रांस अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा। जहां भी जरूरत होगी, फ्रांस आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया था, “मैंने मंगलवार को हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी से बात की है। इस हमले में दर्जनों निर्दोष नागरिकों की दुखद मौत हुई है। फ्रांस इस दुख की घड़ी में भारत और उसके लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। फ्रांस अपने सहयोगियों के साथ मिलकर, जहां भी जरूरत होगी, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा।”

मैक्रों के साथ यह बैठक कनानास्किस में 51वें जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की कई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में से एक थी। यहां उन्होंने मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस और कनाडा के नेताओं से मुलाकात की। इसमें वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता जाहिर की है।

भारत और फ्रांस ने रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे कर लिए हैं। फ्रांस के साथ भारत के संबंध गहरे विश्वास और प्रतिबद्धता पर आधारित हैं।

पीएम मोदी ने इससे पहले मंगलवार को जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूके के पीएम कीर स्टार्मर से मुलाकात की थी।

PM meets the Prime Minister of the United Kingdom, Mr. Keir Starmer on the sidelines of the 51st G7 Summit at Kananaskis, in Canada on June 17, 2025.

पीएम मोदी ने कीर स्टार्मर से मुलाकात के बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ एक खास बातचीत! भारत और यूके के संबंध मजबूत हो रहे हैं, जो व्यापार और वाणिज्य जैसे क्षेत्रों में हमारी प्रगति में झलकता है। हम इस दोस्ती को और भी गति देने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।”

पीएम मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के बाद एक्स पोस्ट में लिखा, “कनाडा में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग और मेरी बैठक हुई। भारत और रिपब्लिक ऑफ कोरिया कॉमर्स, इन्वेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन, जहाज निर्माण और अन्य क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहते हैं।”

‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के साथ मुलाकात के बाद लिखा, “कनाडा में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बातचीत करके बहुत खुशी हुई। भारत और जर्मनी घनिष्ठ मित्र हैं, जो साझा मूल्यों से जुड़े हुए हैं। इस वर्ष हम अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे कर रहे हैं। हमने चर्चा की है कि आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर्स, सस्टेनेबिलिटी, रिसर्च और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में और भी अधिक निकटता से कैसे काम किया जाए। चांसलर मर्ज और मैंने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को गहरा करने पर भी चर्चा की। हम आतंकवाद का मुकाबला करने और आतंकी वित्तपोषण पर प्रहार करने जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करना जारी रखेंगे।”

मेक्सिको की राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम के साथ बहुत अच्छी बैठक हुई। दो शताब्दियों में पहली महिला मैक्सिकन राष्ट्रपति बनने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। हम दोनों आने वाले समय में भारत-मेक्सिको संबंधों में अपार संभावनाएं देखते हैं, खासकर एग्रीकल्चर, सेमीकंडक्टर्स, क्रिटिकल मिनरल्स, हेल्थकेयर और अन्य क्षेत्रों में। हमने लोगों के बीच आपसी संबंधों को बढ़ाने के तरीकों पर भी बात की।”

पीएम मोदी ने मंगलवार को जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानी से भी अलग-अलग मुलाकात की।

भारत-ब्रिटेन संबंध मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे : पीएम मोदी

कनानास्किस, कनाडा में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच अहम मुलाकात हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन एक-दूसरे के साथ मिलकर इस शानदार साझेदारी को मजबूत करते रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” पर लिखा, “प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ एक बेहतरीन बातचीत हुई। भारत और ब्रिटेन के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, खासकर व्यापार और वाणिज्य जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति के माध्यम से। हम इस शानदार मित्रता को और गति देने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।”

दरकिनार नहीं किया जा सकता है कि पिछले कुछ सालों में पीएम मोदी के नेतृत्व में ब्रिटेन के साथ भारत के रिश्तों में मजबूती आई है। 7 जून को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री स्टार्मर को भारत आने का न्योता दिया। पीएम मोदी ने स्टार्मर को उनकी नई भूमिका के लिए शुभकामनाएं भी दी थी। इस महीने की शुरुआत में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिटेन सरकार को अप्रैल 22 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के दोषियों को न्याय दिलाने में भारत के साथ खड़े रहने के लिए धन्यवाद दिया था।

PM participated in the 51st G7 summit meeting at Kananaskis, in Canada on June 17, 2025.

ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड लैमी भारत की यात्रा कर चुके हैं, जो इसी महीने की शुरुआत में आए। इस दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच 6 मई को हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चर्चा हुई थी। उस समय एस जयशंकर ने बताया, “ये समझौता न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को गति देगा, बल्कि आपूर्ति और मूल्य श्रृंखलाओं को भी मजबूत करेगा। रणनीतिक संबंधों को भी नया आयाम देगा।”

खासतौर पर मई 2025 में भारत और ब्रिटेन ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत का 16वां और ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता है।

ये समझौता मौजूदा दौर में वैश्विक व्यापार अस्थिरता और टैरिफ अनिश्चितताओं के बीच दुनिया की चौथी और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। ब्रिटेन, भारत से सबसे ज्यादा वस्तुएं खरीदने वाले देशों में चौथे नंबर पर है। वहीं भारत ब्रिटेन के लिए 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत और ब्रिटेन के बीच हर साल करीब 60 अरब डॉलर (60 बिलियन डॉलर) का व्यापार होता है, जिसके 2030 तक दोगुना होने की उम्मीद है।

एफटीए समझौता, ब्रिटेन को भारत के 99 प्रतिशत निर्यात के लिए शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करता है, जिसमें वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, खेल के सामान, खिलौने, रत्न और आभूषण, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान और कार्बनिक रसायन शामिल हैं।

पीएम मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के ऊर्जा सुरक्षा पर आउटरीच सत्र में हिस्सा लिया, रिन्यूएबल एनर्जी पर दिया जोर

कनानास्किस/नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कनानास्किस में 51वें जी7 शिखर सम्मेलन में एनर्जी सिक्योरिटी पर आउटरीच सेशन में हिस्सा लिया। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि अपने संबोधन के दौरान, पीएम मोदी ने सभी लोगों के लिए एक स्थायी और हरित मार्ग के जरिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर प्रकाश डाला।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक पहलों जैसे कि इंटरनेशनल सोलर एलायंस (सौर ऊर्जा पर केंद्रित एक संधि-आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन), डिजास्टर रेसिलिटेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गठबंधन (सीडीआरआई) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस के बारे में विस्तार से बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “एआई अपने आप में एक एनर्जी-इंटेंसिव टेक्नोलॉजी है। अगर टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सोसायटी की ऊर्जा आवश्यकताओं को स्थायी रूप से पूरा करने का कोई तरीका है, तो वह रिन्यूएब एनर्जी के जरिए है। सस्ती, विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिकता है।”

पीएम मोदी ने बताया कि भारत का मानना ​​है कि कोई भी टेक्नोलॉजी तभी मूल्यवान है, जब उसका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे। ग्लोबल साउथ का कोई भी देश पीछे नहीं रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने टेक्नोलॉजी का लोकतंत्रीकरण किया है। डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों को सशक्त बनाया है, जबकि सार्थक और गुणात्मक डेटा समावेशी, सक्षम और जिम्मेदार एआई की गारंटी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें ग्लोबल गवर्नेंस पर काम करना होगा। एआई से संबंधित चिंताओं को दूर करना होगा। इनोवेशन को बढ़ावा देना होगा। एआई के युग में, जरूरी मिनरल्स और टेक्नोलॉजी के बीच सहयोग जरूरी है। हमें उनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना होगा। डीप फेक बहुत बड़ी चिंता का विषय है। इसलिए, एआई-जनरेटेड कंटेंट पर वॉटर-मार्किंग या स्पष्ट घोषणा की जानी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछली शताब्दी में, हमने ऊर्जा के लिए प्रतिस्पर्धा देखी। इस सदी में, हमें टेक्नोलॉजी के लिए सहयोग करना होगा। उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य, स्वीकार्यता के मूलभूत सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हुए, भारत ने समावेशी विकास का रास्ता चुना है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, भारत एक ऐसा देश है, जिसने समय से पहले पेरिस कमिटमेंट्स को पूरा किया है। हम 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्तमान में, रिन्यूबल एनर्जी हमारी कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी का लगभग 50 प्रतिशत है।”

पीएम मोदी ने कहा, “दुर्भाग्य से, ग्लोबल साउथ के देश अनिश्चितता और संघर्षों से सबसे अधिक पीड़ित हैं। वह फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर और फाइनेंस से संबंधित संकटों से सबसे पहले प्रभावित होते हैं। भारत ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और चिंताओं को विश्व मंच पर लाना अपनी जिम्मेदारी समझता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “आतंकवाद पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। 22 अप्रैल को हुआ आतंकवादी हमला सिर्फ पहलगाम पर हमला नहीं था, बल्कि हर भारतीय की आत्मा, पहचान और सम्मान पर भी था। यह पूरी मानवता पर हमला था। आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने वाले सभी देशों के खिलाफ है। वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए हमारी सोच और नीति स्पष्ट होनी चाहिए। अगर कोई देश आतंकवाद का समर्थन करता है, तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।”

वैश्विक दक्षिण की चिंताओं और प्राथमिकताओं पर ध्यान देने पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज को विश्व मंच पर लाने की जिम्मेदारी ली है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर बताया, “प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराया और जी7 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल लीडर्स को पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उनसे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को गति देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही आतंकवाद को बढ़ावा देने और उसका समर्थन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक बनाने और इसे लागू करने में मानव-केंद्रित दृष्टिकोण में भारत के अनुभव पर भी प्रकाश डाला।”

यह प्रधानमंत्री की एक दशक के बाद पहली कनाडा यात्रा थी। उन्होंने तीसरी बार सत्ता में आने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी से मुलाकात की है।

‘इटली के साथ भारत की दोस्ती और मजबूत होगी’, जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने की जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात

कनानास्किस/नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में मेजबान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी सहित कई देशों के नेताओं ने मुलाकात की। 51वें जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से भी मुलाकात की।

जॉर्जिया मेलोनी ने इस मुलाकात की तस्वीर अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट की। उन्होंने पोस्ट में लिखा- भारत और इटली दोस्ती की मजबूत डोर से एक-दूसरे से जुड़े हैं।

इस पोस्ट पर पीएम मोदी ने कहा, “मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं, प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी। इटली के साथ भारत की दोस्ती और मजबूत होती जाएगी, जिससे हमारे लोगों को बहुत लाभ होगा!”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनाडा में 51वें जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कनानास्किस पहुंचे, जहां उन्होंने वैश्विक नेताओं से मुलाकात की। यह जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भारत की 12वीं और पीएम मोदी की छठी भागीदारी है।

इससे पहले मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत की।

‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में, पीएम मोदी ने कहा, “दो प्रिय मित्रों, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला के साथ शानदार बातचीत हुई। हम ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने के लिए अपनी प्रतिबद्धता में अडिग हैं। हम आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर कल बनाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, करने के लिए समान रूप से दृढ़ हैं।

जी-7 शिखर सम्मेलन में नेताओं के बीच एकता को दर्शाते हुए, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने ट्वीट किया, “जी-7 में ग्लोबल साउथ मौजूद है। यहां सिरिल रामफोसा और नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में हम एकजुट होकर अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं।

भारतीय प्रधानमंत्री ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक पोस्ट में कहा, “ईयू आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ उपयोगी चर्चा हुई।”

भारतीय प्रधानमंत्री ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से भी मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ अच्छी बातचीत हुई।

जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मिले। इस दौरान उन्होंने उनके साथ संक्षिप्त बातचीत की।

प्रधानमंत्री मोदी और इटली की पीएम मेलोनी के बीच की मित्रता सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे जी-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने के लिए कार्नी के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद एक बार फिर कनाडा आना और यहां के लोगों के बीच उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है।”

मोदी ने विश्व के नेताओं से मुलाकात की; द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की

कनानास्किस, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर अपने वैश्विक समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं जिनमें व्यापार, निवेश, आतंकवाद के खिलाफ कदमों और वैश्विक चुनौतियों जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने यहां आए मोदी ने मंगलवार को कहा कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग के साथ उनकी ”बहुत अच्छी बैठक” हुई और दोनों देश वाणिज्य, निवेश, प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन, पोत निर्माण आदि क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”भारत-कोरिया गणराज्य के संबंधों को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने कनाडा के कनैनिस्किस में जी7 शिखर सम्मेलन के इतर एक सार्थक बैठक की। वे व्यापार एवं वाणिज्य, निवेश, प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा कि दोनों नेताओं ने ”व्यापार एवं अर्थव्यवस्था, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, हरित हाइड्रोजन, पोत निर्माण, संस्कृति और पी2पी (लोगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क) के क्षेत्रों में साझेदारी के जरिए सहयोग के नए रास्ते तलाश कर भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।”

जायसवाल ने बताया कि उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।

मोदी ने मंगलवार को जी7 शिखर सम्मेलन के इतर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी मुलाकात की और कहा कि ”अपने मित्र के साथ बातचीत कर हमेशा की तरह खुशी हुई और हमने” कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, ”भारत और फ्रांस इस धरती की बेहतरी के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।” उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन के इतर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर से भी बातचीत की।

मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर के साथ एक बेहतरीन बातचीत हुई। भारत और ब्रिटेन के संबंध मजबूत हो रहे हैं, जो व्यापार और वाणिज्य जैसे क्षेत्रों में हमारे द्वारा की गई प्रगति में नजर आता है। हम इस अद्भुत मित्रता को और भी अधिक गति देने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।”

मोदी ने इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से भी मुलाकात की। मेलोनी ने कहा कि इटली और भारत एक महान मित्रता से जुड़े हुए हैं।

मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं। इटली के साथ भारत की मित्रता और मजबूत होती रहेगी जिससे हमारे लोगों को बहुत लाभ होगा।”

मोदी ने मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम पार्डो से मुलाकात की और ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं सहित प्रमुख वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर दृष्टिकोण साझा किए। दोनों नेताओं के बीच यह पहली बैठक थी।

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, ”मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम के साथ बहुत अच्छी बैठक हुई। मैंने उन्हें ऐतिहासिक चुनावी जीत पर व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। शिनबाम दो शताब्दियों में मेक्सिको की पहली महिला राष्ट्रपति बनी हैं।”

उन्होंने कहा, ”हम दोनों खासकर कृषि, अर्धचालकों, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य सेवा और अन्य क्षेत्रों में भारत-मेक्सिको के संबंधों में भविष्य में अपार संभावनाएं देखते हैं। हमने लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी बात की।”

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में मेक्सिको द्वारा दिए गए समर्थन के लिए राष्ट्रपति शिनबाम को धन्यवाद दिया।

दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान भारत और मेक्सिको के बीच दोस्ती के ऐतिहासिक संबंध को रेखांकित किया।

बयान में कहा गया कि वे व्यापार, निवेश, स्टार्ट-अप, नवोन्मेष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा ऑटोमोटिव क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करने तथा लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए काम करने पर सहमत हुए। उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार और निवेश सहयोग पर भी प्रकाश डाला।

इसमें कहा गया है, ”फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में बढ़ते अवसरों पर चर्चा की गई। इस क्षेत्र में भारत किफायती गुणवत्ता वाली दवाओं और अन्य फार्मास्यूटिकल उत्पादों की आपूर्ति एवं उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही कृषि और समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ते अवसरों पर भी चर्चा की गई।”

विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति शिनबाम ने प्रौद्योगिकी, नवोन्मेष एवं डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में भारत की प्रगति की सराहना की और इन क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग की इच्छा व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अर्धचालकों, एआई (कृत्रिम मेधा), क्वांटम और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशनी चाहिए।

उन्होंने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से भी मुलाकात की और व्यापार एवं निवेश, रक्षा, हरित ऊर्जा एवं प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। चांसलर मर्ज के मई 2025 में पदभार ग्रहण करने के बाद यह दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के साथ एकजुटता की जर्मनी की मजबूत अभिव्यक्ति और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के कदमों के प्रति समर्थन जताने के लिए चांसलर मर्ज को धन्यवाद दिया।

विदेश मंत्रालय ने कहा, ”दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि आतंकवाद दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है।”

मोदी ने ‘एक्स’ पर एक ‘पोस्ट’ साझा करते हुए कहा कि उन्होंने और चांसलर मर्ज ने रक्षा संबंधों को गहरा करने पर चर्चा की।

उन्होंने कहा, ”हम आतंकवाद का मुकाबला करने और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करते रहेंगे।’

प्रधानमंत्री ने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज से भी मुलाकात की। मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया के अपने मित्र प्रधानमंत्री अल्बनीज से मिलकर अच्छा लगा।”

मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ भी ”गहन विचार-विमर्श” किया।

मोदी ने ‘एक्स” पर कहा, ”भारत एवं जापान विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के साथ अपनी बातचीत की एक तस्वीर ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें रामफोसा से बात करके खुशी हुई।

उन्होंने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से भी मुलाकात की।

मोदी ने ‘एक्स’ पर रामाफोसा और लूला के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ”दो प्रिय मित्रों-दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला के साथ शानदार बातचीत। हम ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए अहम मुद्दों पर बात करने की अपनी प्रतिबद्धता को लेकर अडिग हैं। हम भावी पीढ़ियों की खातिर बेहतर कल बनाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, करने के लिए समान रूप से दृढ़ हैं।”

मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ भी ”सार्थक” चर्चाएं कीं और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ ”उपयोगी” बातचीत की।

इससे पहले मोदी का उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने कनाडा में स्वागत किया। वह ‘जी7 संपर्क सत्र’ के लिए यहां पहुंचे थे। यह पिछले एक दशक में उनकी पहली कनाडा यात्रा है।

जी-7 शिखर सम्मेलन में मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख की पुष्टि करते हुए जी-7 समूह के नेताओं से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को तेज करने का आग्रह किया और इसे ”बढ़ावा एवं समर्थन” देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

‘ग्रुप ऑफ सेवन’ (जी-7) दुनिया की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं – फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा तथा यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसके सदस्य वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हर साल जी-7 शिखर सम्मेलन में मिलते हैं।

प्रधानमंत्री ने कनाडा में ‘जी7 संपर्क सत्र’ में मंगलवार को अपने संबोधन के दौरान इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ”वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए हमारी सोच और नीति स्पष्ट होनी चाहिए – अगर कोई देश आतंकवाद का समर्थन करता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।”

मोदी ने कहा, ”एक तरफ हम अपनी प्राथमिकता के आधार पर हर तरह के प्रतिबंध लगाने में जल्दबाजी करते हैं। दूसरी तरफ, जो देश खुले तौर पर आतंकवाद का समर्थन करते हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जाता है।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराया और पहलगाम में हुए भयावह आतंकवादी हमले की निंदा करने के लिए नेताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने उनसे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को गति देने का आग्रह किया और आतंकवाद को बढ़ावा देने एवं उसका समर्थन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।”

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं और प्राथमिकताओं पर ध्यान दिए जाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को वैश्विक मंच पर पहुंचाना अपनी जिम्मेदारी समझता है।

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों के संदर्भ में किया जाता है।

मोदी ने कहा, ”उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य, स्वीकार्यता के मूलभूत सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हुए भारत ने समावेशी विकास का मार्ग चुना है।”

जायसवाल ने बताया कि मोदी ने अपने संबोधन में एक स्थायी एवं हरित मार्ग के माध्यम से सभी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और इस उद्देश्य की दिशा में भारत की वैश्विक पहलों जैसे कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के बारे में विस्तार से बताया।

मोदी ने कहा, ”एआई (कृत्रिम मेधा) अपने आप में एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसके लिए बहुत ऊर्जा की आवश्यकता है। अगर प्रौद्योगिकी-संचालित समाज की ऊर्जा आवश्यकताओं को स्थायी रूप से पूरा करने का कोई तरीका है तो वह नवीनीकृत ऊर्जा के माध्यम से ही है।”

उन्होंने कहा कि पिछली सदी में ऊर्जा के लिए प्रतिस्पर्धा थी लेकिन इस सदी में ”हमें प्रौद्योगिकी के लिए सहयोग करना होगा।”

मोदी ने प्रौद्योगिकी के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाने में भारत के अनुभव और इसे लागू करने के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ”उन्होंने (मोदी ने) एआई से जुड़ी चिंताओं से निपटने और इस क्षेत्र में नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक शासन के मुद्दों से निपटने का आह्वान किया।”

मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘डीप-फेक’ बड़ी चिंता का विषय है इसलिए एआई की मदद से बनाई गई सामग्री पर स्पष्ट घोषणा अंकित होनी चाहिए कि यह कृत्रिम मेधा की मदद से बनाई गई है।

तस्वीर या वीडियो में किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर को डिजिटल रूप से बदलने की प्रौद्योगिकी को ‘डीपफेक’ कहते हैं। ‘मशीन लर्निंग’ और एआई से बने ये वीडियो और तस्वीरें असली जैसी नजर आती हैं और कोई भी व्यक्ति इन्हें देखकर धोखा खा सकता है।

इससे पहले, प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने जी-7 देशों के नेताओं के साथ प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर ”सार्थक” विचार-विमर्श किया तथा ग्रह को बेहतर बनाने को लेकर आकांक्षाएं साझा कीं।

मोदी ने सात देशों के समूह के नेताओं और कनैनिस्किस में जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित नेताओं के साथ एक तस्वीर ‘एक्स’ पर साझा की।

उन्होंने लिखा, ”वैश्विक प्रगति के लिए एक साथ! प्रमुख वैश्विक चुनौतियों और बेहतर ग्रह के लिए साझा आकांक्षाओं पर जी7 नेताओं के साथ सार्थक विचार विमर्श हुआ। ”

जायसवाल ने एक अलग ‘पोस्ट’ में लिखा, ”वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने और साझा मूल्यों को बढ़ावा देने की सामूहिक प्रतिबद्धता।”

उन्होंने मोदी द्वारा साझा की गई तस्वीर को ‘पोस्ट’ करते हुए लिखा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी7 देशों के नेताओं और आमंत्रित भागीदारों के साथ।”

इससे पहले मोदी का उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने कनाडा में स्वागत किया। वह ‘जी7 संपर्क सत्र’ के लिए यहां पहुंचे थे। यह पिछले एक दशक में उनकी पहली कनाडा यात्रा है।

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