फ्लाईदुबई के विमान को बचाने वाले रहस्यमयी पायलटों की पहचान का अब तक खुलासा नहीं.
क्या उस दिन सच में आ गए थे हनुमान ? विमान को सुरक्षित उतारने के बाद किसी को नहीं मिले दोनों रहस्यमयी यात्री. कहाँ गए वो दोनों देवदूत जो कप्तान से के घायल होने के बाद विमान को लाये थे उन्होंने पूरे रास्ते किसी से बात भी नहीं की थी ना ही उतारने के बाद वे सामने आये. यह अत्यंत ही आश्चर्यजनक है कप्तान ने अपने आराधय श्री हनुमान जी से मदद मांगी थी और उन्हें वो चमत्कार के रूप में मिली उसके बाद जो हुआ उसको पूरी दुनिया ने देखा. विमान पर सवार हर ज़िंदगी को सुरक्षित ज़मीन पर लाने वाले वो गुमनाम देवदूत मुसाफिर अभी तक दुनिया के सामने नहीं आये हैं।

यरुशलम / Yerushalem, तेल अवीव / Tel Aviv जा रहे फ्लाईदुबई Flydubai के उस विमान में जब सह-पायलट Co-pilot ने कथित तौर पर कैप्टन पर हमला कर दिया और विमान तेजी से नीचे गिरने लगा, तब दो अतिरिक्त पायलटों ने कॉकपिट में पहुंचकर नियंत्रण संभाला और 182 लोगों की जान बचाने में मदद की। घटना के बाद अब तक इन दोनों पायलटों की पहचान उजागर नहीं की गई है।
फ्लाईदुबई ने उन्हें केवल विमान में यात्रा कर रहे ड्यूटी पर तैनात चालक दल का सदस्य बताया है। यह स्पष्ट नहीं है कि एयरलाइन ने दोनों की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं की है।

हालांकि, विमान के आगे की ओर दूसरी पंक्ति में बैठे एक यात्री ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ के साथ बातचीत में इन दोनों पायलटों की भूमिका का विस्तृत विवरण दिया। यह अब तक सामने आए इन गुमनाम नायकों के योगदान का सबसे विस्तृत ब्योरा है।
डेनियल श्लिख्टर ने कहा, ‘‘यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हर उड़ान में दो अतिरिक्त पायलट नहीं होते। इस मामले में उन्हें इसलिए साथ लाया गया था क्योंकि उन्हें विमान को तेल अवीव से वापस दुबई लाना था और उनके वहां होने की यही वजह थी।’’
विमानन क्षेत्र में इस तरह की व्यवस्था को ‘डेडहेडिंग’ कहा जाता है, जिसमें चालक दल का सदस्य यात्री के रूप में उस विमान में यात्रा करता है, जिसे वह आगे चलकर संचालित करने वाला होता है।

श्लिख्टर के अनुसार, कॉकपिट में हो रही घटना का यात्रियों को पता चलने और उनके चीखने-चिल्लाने के बाद दोनों पायलट हरकत में आए। यात्रियों ने बताया था कि सह-पायलट बार-बार कप्तान पर हमला कर रहा था और चारों ओर खून फैला हुआ था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कप्तान कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहा।
एक यात्री ने सह-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया और कुछ अन्य यात्रियों ने उसे काबू करने के लिए उससे हाथापाई की। श्लिख्टर ने बताया कि इसी दौरान यात्रा कर रहे पायलटों में से एक ने यात्रियों की उस भीड़ के ऊपर से लगभग छलांग लगाते हुए कॉकपिट में प्रवेश किया और विमान के नियंत्रण अपने हाथ में ले लिए।
श्लिख्टर ने कहा, ‘‘वह वास्तव में उन लोगों के ऊपर से लगभग छलांग लगाकर आगे बढ़ा, जो उस व्यक्ति (सह-पायलट) को काबू करने की कोशिश कर रहे थे। उसने पायलट की जगह तक पहुंचकर नियंत्रण संभालना शुरू कर दिया। फिर दूसरा पायलट भी कॉकपिट में आ गया और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि वहां कोई और हो।’’

श्लिख्टर और अन्य यात्रियों को यह पता नहीं था कि दोनों पायलट कहां से आए थे। लेकिन उन्होंने कहा कि पहले कॉकपिट में पहुंचने वाले पायलट ने बेहद तेजी से कार्रवाई की।
श्लिख्टर ने कहा, ‘‘उसने वास्तव में एक नायक की तरह काम किया। उसने विमान का नियंत्रण संभाल लिया और ऐसा लगा कि जैसे उसे समझ आ गया था कि क्या हो रहा है। मुझे लगता है कि हमें अपनी जान बचाने के लिए उसका भी उतना ही आभारी होना चाहिए, जितना उड़ान में मौजूद अन्य नायकों का।’’
दोनों पायलटों के कॉकपिट में पहुंचने और दरवाजा बंद करने के बाद श्लिख्टर यह नहीं बता सके कि अंदर किसने क्या किया। उन्होंने कहा कि विमान को स्थिर करने में संभवतः 10 मिनट या उससे अधिक समय लगा। विमान इतनी तेजी से नीचे आया था कि उसके पिछले भाग का कुछ हिस्सा टूट गया था, जिसमें रडर भी शामिल था।
पायलटों ने विमान को उतारने के लिए जगह तलाशने के दौरान आपातकालीन ‘मेडे’ कॉल भी की।
इस बीच, डरे और आशंकित कुछ यात्रियों के मन में इन दोनों पायलटों को लेकर सवाल उठने लगे और वे सोचने लगे कि क्या उन पर भरोसा किया जा सकता है।
श्लिख्टर ने कहा, ‘‘विमान को संभालने के बाद भी उन दोनों पायलटों ने यात्रियों से कोई संपर्क नहीं किया। सच कहूं तो उस समय मैं इसे लेकर काफी चिंतित था।’’

उन्हें यह डर भी था कि कहीं स्थिति और खराब न हो जाए और दोनों पायलट विमान का अपहरण कर उसे ‘‘ईरान या कहीं और’’ न ले जाएं, क्योंकि विमान उस समय उस क्षेत्र से ज्यादा दूर नहीं था।
हालांकि, करीब 45 मिनट बाद पायलटों ने घोषणा की कि वे सऊदी अरब के तबूक में उतरेंगे और सब कुछ ठीक हो जाएगा।
श्लिख्टर ने कहा कि इसके बाद उन्हें पायलटों पर भरोसा हुआ और अंततः उनका भरोसा सही साबित हुआ।