Times Of India / Youth Icon Summit : Chief minister Yogi quoted how previous govt. promoted mafia culture in Uttar Pradesh state and made it a crime city. पिछली सरकारों में माफिया व अपराधियों को बढ़ावा मिला : आदित्यनाथ का विपक्ष पर हमला
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में माफिया व अपराधियों को बढ़ावा दिया गया तथा सरकारी नौकरियों में योग्यता के बजाय सिफारिश और लेनदेन का बोलबाला था। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया समूह द्वारा आयोजित ‘यूथ आइकन समिट’ में योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले पहचान और सुरक्षा का संकट था, जबकि उनकी सरकार ने अपराधियों के खिलाफ ‘कतई बर्दाश्त न करने’ की नीति अपनाकर स्थिति बदली है।

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए कहा, “हमारे विपक्ष के मित्र दुष्प्रचार करने में पारंगत हैं। उन्होंने अग्निवीर योजना को लेकर भी खूब दुष्प्रचार किया लेकिन हमने चार साल की सेवा करके लौटने वाले अग्निवीरों को प्रदेश के सभी विभागों में सीधी भर्ती के जरिये नौकरी देने की व्यवस्था की है।” उन्होंने दावा किया कि पहले प्रदेश में अपराधियों और माफिया का प्रभाव था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
आदित्यनाथ ने कहा, “माफिया मिट्टी में मिल चुके हैं। अब उत्तर प्रदेश में ‘एक जिला, एक माफिया’ नहीं, बल्कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ है।” मुख्यमंत्री ने सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि पिछली सरकारों के दौरान नियुक्तियों में योग्यता के बजाय कथित तौर पर सिफारिश और लेनदेन को महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि एक बार उनके सामने ऐसी फाइल आई, जिसमें कुछ ऐसे लोगों को भी नियुक्ति पत्र दिए जाने का उल्लेख था जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था।
आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पहले किसी भी नियुक्ति की योग्यता का आधार केवल ‘सैफई सिंडिकेट’ से उसकी नजदीकी ही होता था या फिर वहां पर लेनदेन कितना हुआ है, इस पर निर्भर करता था, उसकी योग्यता पर नहीं।

उन्होंने कहा, “मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में हम लोगों ने साढ़े नौ लाख सरकारी नियुक्ति पत्र वितरित किए हैं बिना किसी सिफारिश या लेनदेन के। इसमें कहीं किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है।”
आदित्यनाथ ने अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि करीब 4500 उपनिरीक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले सप्ताह नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा 32 हजार से अधिक पुलिस कांस्टेबलों और 42 हजार होमगार्ड्स जवानों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र जल्द दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने खिलाड़ियों को भी ‘पदक लाओ, पद पाओ’ की नीति के आधार पर सरकारी नौकरियां दी हैं। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 1,400 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।
आदित्यनाथ ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 2017 के करीब 120 से बढ़कर अब 25,000 हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का कोष बनाया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां हैं, जिनसे 3.25 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार तीन गुना हुआ है और प्रति व्यक्ति आय में भी तीन गुना वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी 57,000 ग्राम पंचायतों में पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। उनके मुताबिक, पहले 1.53 लाख ऐसे ‘मजरे’ (छोटी बस्ती) थे जहां बिजली नहीं पहुंची थी, लेकिन उनकी सरकार ने वहां बुनियादी ढांचा विकसित किया।

मुख्यमंत्री ने धार्मिक पर्यटन को रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए। उन्होंने कहा कि काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों से टैक्सी चालकों, होटल संचालकों, दुकानदारों और अन्य छोटे कारोबारियों को भी रोजगार मिलता है।
युवाओं से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने और मतदान करने की अपील करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ नागरिकों के कुछ कर्तव्य भी हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को पिछली और मौजूदा सरकारों के कामकाज की तुलना करके अपने भविष्य के लिए सही निर्णय लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि युवा केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बनें और प्रदेश की विकास यात्रा में योगदान करें।
उप्र की पहचान, सुरक्षा और रोजगार की स्थिति साढ़े नौ साल में बदल गई: आदित्यनाथ
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को दावा किया कि उनकी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की पहचान, सुरक्षा और रोजगार की स्थिति में व्यापक बदलाव किया है तथा सरकारी नौकरियों में सिफारिश की जगह योग्यता के आधार पर चयन सुनिश्चित किया है।
मुख्यमंत्री ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समूह द्वारा आयोजित ‘यूथ आइकन समिट’ में कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पहचान और सुरक्षा के संकट से जूझ रहा था, लेकिन अब प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार के अवसर बढ़ने से स्थिति बदल गई है।
उन्होंने कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 37 युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किए जाने पर आयोजकों को बधाई दी।

आदित्यनाथ ने अपने संबोधन को पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों की ‘रील’ बताते हुए कहा कि यह दस सेकंड या एक मिनट की नहीं, बल्कि प्रदेश की बदली तस्वीर दिखाने वाली लंबी कहानी है।
उन्होंने इस ‘रील’ को ‘फ्रेमवार’ सामने रखते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियों का विस्तार से जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश के बाहर उत्तर प्रदेश के लोगों को पहचान के संकट का सामना करना पड़ता था, जबकि प्रदेश के भीतर सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक थी।
उनके मुताबिक, विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित रहते थे और निवेशक भी प्रदेश में निवेश करने से हिचकते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अपराध के प्रति ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई, जिसके परिणामस्वरूप माफिया और अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में ‘एक जिला, एक माफिया’ की स्थिति थी, जबकि अब ‘एक जिला, एक उत्पाद’ की पहचान विकसित हुई है।
आदित्यनाथ ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां हैं, जिनसे 3.25 करोड़ से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक इकाई को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर भी उपलब्ध कराती है।
सरकारी भर्तियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले नियुक्तियों में अनियमितताओं की शिकायतें थीं और नौकरी पाना ‘सैफई सिंडिकेट’ की कृपा पर निर्भर था लेकिन उनकी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में बिना सिफारिश और लेनदेन के लगभग 9.5 लाख सरकारी नियुक्तियां की हैं।
‘सैफई सिंडिकेट’ से उनका इशारा समाजवादी पार्टी के नेतृत्व की ओर था।
आदित्यनाथ के मुताबिक, करीब 4,500 उपनिरीक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले सप्ताह नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।
उन्होंने 32 हजार से अधिक पुलिस कांस्टेबल और 42 हजार होमगार्ड जवानों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का भी दावा किया।
उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को नौकरी देने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘देश के लिए पदक लाओ और उत्तर प्रदेश में पद पाओ’ की नीति अपनाई है।
उन्होंने दावा किया कि अब तक 1,400 खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर नियुक्तियां दी गई हैं।
स्टार्टअप क्षेत्र में विकास का उल्लेख करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में करीब 120 स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 25 हजार हो गई है।
उन्होंने कहा कि नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये का कोष बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पिछले साढ़े नौ वर्षों में तीन गुना बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय में भी तीन गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों में पर्याप्त बिजली उपलब्ध है और पहले बिजली से वंचित रहे 1.53 लाख मजरों में बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है।
आदित्यनाथ ने पर्यटन को रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए। उन्होंने कहा कि काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों में बढ़ती गतिविधियों से होटल, रेस्तरां, टैक्सी, रिक्शा और फूल बेचने वालों सहित विभिन्न वर्गों को रोजगार मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विरासत और आस्था को आर्थिक विकास से जोड़कर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकसित हो रहे अवसरों से युवाओं के पलायन की मजबूरी कम करने में मदद मिल रही है।