– ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता से भारत की खाड़ी देशों से साझेदारी तेल व्यापार से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा तक पहुंची.
– कूटनीतिक कामयाबी, ब्रिक्स देश संयुक्त बयान जारी करने पर हुए सहमत.
– पीएम मोदी ने ब्रिक्स रोडमैप का रखा प्रस्ताव
नई दिल्ली, भारत की ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता ऐतिहासिक रूप से मजबूत तेल संबंधों को निवेश, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता तक फैली व्यापक साझेदारी में बदल रही है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।
गल्फ टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ऊर्जा संबंध अभी भी रिश्तों की नींव बने हुए हैं, लेकिन सहयोग नए रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया, “सौर उपकरण, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और कम-कार्बन टेक्नोलॉजी सहित क्षेत्रों में खाड़ी की पूंजी और नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और बाजार के आकार के साथ जोड़ा जा सकता है।”

मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी पर सहयोग को गहरा किया और भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में यूएई की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति जताई तथा रणनीतिक गैस भंडार की संभावनाओं पर चर्चा की।
सहयोग का एक अन्य क्षेत्र खाद्य सुरक्षा है, जो खाड़ी की मांग को भारत की कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं से जोड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि भंडारण, लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद सप्लाई चेन में निवेश की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
कार्यक्रम के समय को महत्वपूर्ण बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि क्षेत्रीय तनावों ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सुरक्षित जहाजरानी पर फिर से ध्यान बढ़ाया है, जबकि खाड़ी देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधता ला रहे हैं, उन्नत टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहे हैं और एशिया के साथ कारोबारी संबंध मजबूत कर रहे हैं।

विस्तारित ब्रिक्स में सऊदी अरब और यूएई के जरिए खाड़ी का प्रतिनिधित्व है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय परिदृश्य में समूह का महत्व बढ़ता है। भारत के सभी छह जीसीसी देशों के साथ गहरे संबंध हैं और इसलिए वह खाड़ी और व्यापक ब्रिक्स समुदाय के बीच एक स्वाभाविक पुल की भूमिका निभाता है।
खाड़ी देश भारत की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कच्चा तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराते हैं, जबकि भारत खाद्य पदार्थ, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, मशीनरी और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराता है। लाखों भारतीय खाड़ी में रहकर आजीविका कमाते हैं या कारोबार चलाते हैं, जो रिश्तों को एक मजबूत मानवीय आधार प्रदान करते हैं।

भारत-खाड़ी संबंध फरवरी 2026 में और मजबूत हुए, जब भारत ने जीसीसी के साथ संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर किए और एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू की, जिसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं।
भारत की अगुवाई में एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी, ब्रिक्स देश संयुक्त बयान जारी करने पर हुए सहमत
नई दिल्ली, भारत की अगुवाई में ब्रिक्स को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सदस्य देशों ने संयुक्त बयान साझा करने पर सहमति जता दी है। यह सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और समूह का हिस्सा ऐसे देश भी हैं जो कई मुद्दों पर एक दूसरे के साथ नहीं हैं। शिखर सम्मेलन के पहले दिन यानी शनिवार को ही इसे जारी किए जाने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, इसे लेकर बातचीत सुबह 4 बजे तक चली। कई अहम और विवादित मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे।
बताया जा रहा है कि भारत ने लगातार बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर करने और सभी देशों को एक राय पर लाने की कोशिश की। यह सहमति इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और यूएई एक ही ब्रिक्स मंच का हिस्सा हैं, जबकि पश्चिम एशिया के कई मुद्दों पर इनके बीच गंभीर मतभेद हैं।
सूत्र ने कहा, “पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते टकराव के बीच इन देशों को संयुक्त बयान के लिए सहमत कराना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी। भारत की कोशिशों से इन मतभेदों को ब्रिक्स की बातचीत पर हावी नहीं होने दिया गया और सभी देश साझा बयान पर सहमत हो गए।”
इस तरह भारत ने बातचीत के जरिए इन मतभेदों के बीच आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। संयुक्त बयान आज जारी किया जाएगा।
जानकार भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की तारीफ कर रहे हैं क्योंकि नई दिल्ली ने दुनिया भर में चल रहे संघर्षों के बीच ब्रिक्स में गतिरोध को सफलतापूर्वक संभाला है।
इससे पहले ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मतभेद की वजह से मई में राजधानी में हुई ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक ब्लॉक के इतिहास में पहली बार बिना किसी आम संयुक्त बयान के खत्म हुई थी।

इसके बजाय, ईरान और यूएई के बीच गहरे मतभेदों की वजह से सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई, इसलिए भारत ने सिर्फ ‘अध्यक्ष का बयान’ और ‘परिणाम दस्तावेज’ जारी किया था।
भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार कहते आए हैं कि टकराव सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि यह दौर युद्ध का नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेगा।
सबसे खास बात ये भी है कि अपनी जी20 अध्यक्षता की तरह ही, ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे भारत ने इस समूह को पश्चिम-विरोधी बनाए बिना ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को बढ़ाने पर जोर दिया।

वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की बड़ी भूमिका के लिए पीएम मोदी ने ब्रिक्स रोडमैप का रखा प्रस्ताव
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए 10 वैश्विक शासन सुधारों का रोडमैप तैयार करने की जोरदार पैरवी की कि ग्लोबल साउथ को दुनिया के निर्णय लेने वाले केंद्रों में अधिक प्रभावी भूमिका मिले।
प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित ब्रिक्स सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “ब्रिक्स को मजबूत करने के साथ-साथ हमें वैश्विक सुधार के लिए भी एक रास्ता तैयार करना चाहिए। वर्तमान वैश्विक शासन व्यवस्था एक पिरामिड जैसी है, जिसमें शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तर पर वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में सक्षम नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि यह असंतुलन ग्लोबल साउथ के लिए विशेष रूप से स्पष्ट है। ग्लोबल साउथ खुद को वैश्विक संकटों के केंद्र में पाता है, लेकिन निर्णय लेने वाले केंद्रों से बाहर है।
वैश्विक शासन की संरचना में बुनियादी बदलाव का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा “विशेषाधिकारों के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा।”

उन्होंने कहा, “भारत द्वारा आयोजित इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का संदेश स्पष्ट होना चाहिए। यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक, यही इस समय ब्रिक्स का मार्गदर्शक संकल्प होना चाहिए।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इसी उद्देश्य से मैं प्रस्ताव करता हूं कि हम मिलकर वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें और अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप देने का प्रयास करें।”
प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव से अगले नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले नई वैश्विक व्यवस्था के लिए ब्रिक्स के सुधार एजेंडे को एक ठोस रूप देने की दिशा में पहल सामने आई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर देश की आवाज हो, प्रत्येक सदस्य की इसमें हिस्सेदारी हो और मानवता का विकास वैश्विक सहयोग के केंद्र में बना रहे।
उन्होंने रोडमैप तैयार करने के लिए तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। इनमें प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण शामिल हैं।
प्रतिनिधित्व की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं कहना चाहूंगा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। इस विषय पर बातचीत को एक निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ना होगा। इसी तरह वित्तीय संस्थानों में मतदान का अधिकार, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए।”
जवाबदेही के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने सामूहिक प्रतिक्रिया की गति, स्तर और अंतिम छोर तक प्रभाव को मजबूत करने के लिए ‘सीफेयर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ बनाने की जोरदार वकालत की।
वहीं, नियम-निर्माण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भविष्य के वैश्विक विकास को निर्धारित करने वाले नियमों को बनाने में समान भागीदारी सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां न केवल भविष्य के लिए अवसर पैदा कर रही हैं, बल्कि भविष्य के नियमों को भी आकार दे रही हैं।”
ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से दी मंजूरी, पीएम मोदी ने जारी किए 2 डाक टिकट

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली घोषणा को अपनाने का प्रस्ताव रखा गया। इसे सर्वसम्मति से मंजूर कर दिया गया। इसके साथ ही पीएम ने समूह की स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दो डाक टिकट जारी किए।
नई दिल्ली घोषणा का प्रस्ताव रखते हुए पीएम मोदी ने कहा, “किसी भी सदस्य ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। नई दिल्ली घोषणा-2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी जाती है।”
समापन संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमने इस बात पर भी बल दिया कि फ्यूचर की टेक्नोलॉजी और उसकी जांच में ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी होनी चाहिए। निर्णयों और उनके परिणामों के बीच जो दूरी बनी हुई है, उसमें राजभवन और सामूहिक कार्रवाई से काम करना होगा। आज अपनाया गया नई दिल्ली घोषणापत्र साझा हमारे संकल्प को स्पष्ट दिशा देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशों के विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन ब्रिक्स सहयोग के लिए काम करने की प्रतिबद्धता साफ है। बदलते विश्व को पुराने संस्थानों के भरोसे नहीं चलाया जा सकता। वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व, काम करने के तरीके और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार जरूरी है। हमने भविष्य की तकनीक और निर्माण में ग्लोबल साउथ की भागीदारी होनी चाहिए। ब्रिक्स देशों को अपने निर्णयों और परिणामों के बीच की दूरी खत्म करने के लिए मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि आज अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा ब्रिक्स के आगे बढ़ने की दिशा साफ करती है। अब इन फैसलों को जमीन पर उतारकर ठोस नतीजे देने की जिम्मेदारी सभी देशों की है।
निर्णयों और परिणामों के बीच दूरी को दूर करने के लिए साझेदारी और जिम्मेदारी से काम करना होगा। हमारी जिम्मेदारी है कि इन निर्णयों को परिणामों में बदलें।
रामेश्वरम के रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य तस्वीर बनी ब्रिक्स नेताओं के स्वागत की पृष्ठभूमि

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में कई विश्व नेताओं का स्वागत किया। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल भारत मंडपम में नेताओं के स्वागत के दौरान तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की भव्य तस्वीर पृष्ठभूमि में नजर आई।
प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन से पहले भारत मंडपम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत अन्य नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।

स्वागत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मंदिर की पृष्ठभूमि और उसके महत्व के बारे में संक्षेप में बताते हुए भी देखा गया। उन्होंने भारत मंडपम में पहुंचे कई अन्य नेताओं से भी बातचीत की और उन्हें इस पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी।
तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित पंबन द्वीप पर बना रामनाथस्वामी मंदिर हिंदू धर्म के सबसे प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में से एक है। यह भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में भी शामिल है।
अपने भव्य गलियारों, जटिल स्थापत्य कला और विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर आस्था, समृद्ध संस्कृति और सदियों पुराने इतिहास का प्रतीक माना जाता है।
हिंदू परंपरा में इस मंदिर का विशेष महत्व है, क्योंकि इसका संबंध रामायण से भी जोड़ा जाता है। यह तीर्थस्थल शुद्धिकरण और आध्यात्मिक परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है और देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में इसकी विशेष पहचान है।
भारत शनिवार और रविवार (12-13 सितंबर) को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ यानी ‘मानवता प्रथम’ की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।
शनिवार को नई दिल्ली में ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर ब्रिक्स के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता जन-केंद्रित और मानवता प्रथम के दृष्टिकोण पर आधारित है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता हमारी प्राथमिकताएं रही हैं। इन प्राथमिकताओं के साथ-साथ हमने ब्रिक्स सहयोग को आम लोगों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। हमें लगभग 30 शहरों में आप सभी की टीमों का स्वागत करने का अवसर मिला।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि यह समूह किसी के खिलाफ नहीं है और उसे सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने के दृष्टिकोण के साथ काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन’ तंत्र स्थापित करने का भी आह्वान किया।
ब्रिक्स अपने परिपक्व दौर में पहुंच चुका है, अब अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि ब्रिक्स समूह अपने गठन के 20 वर्ष पूरे कर अब “परिपक्वता के दौर” (कमिंग ऑफ एज) में पहुंच चुका है और अब अगले दो दशकों के लिए एक नए तथा महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और अब संगठन के भीतर बनी एकजुटता और सहमति को वैश्विक स्तर पर ठोस परिणामों में बदलना होगा।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर स्वागत संबोधन देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सदस्य देशों और साझेदार देशों के नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता “जन-केंद्रित” और “मानवता प्रथम” दृष्टिकोण पर आधारित रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी हमारी प्राथमिकताएं रही हैं। इन प्राथमिकताओं के साथ हमने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ब्रिक्स सहयोग को आम लोगों से जोड़ा जाए। इसी सोच के तहत 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया और हमें आपके प्रतिनिधिमंडलों का भारत के करीब 30 शहरों में स्वागत करने का अवसर मिला।”
उन्होंने कहा कि इस वर्ष का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐतिहासिक है क्योंकि संगठन अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत मानी जाती है, उसी तरह ब्रिक्स भी अब अपने परिपक्व दौर में प्रवेश कर चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु वह समय होता है जब सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं और क्षमताओं को नई दिशा मिलती है। आज ब्रिक्स भी अपने ‘कमिंग ऑफ एज’ क्षण पर पहुंच गया है। पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और सहमति के आधार पर आगे बढ़ते हैं। हम किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं।”
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ब्रिक्स की एकजुटता और सहमति को वैश्विक स्तर पर ठोस परिणामों में बदला जाए। इसके लिए अगले 20 वर्षों के लिए एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा।
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए ‘ब्रिक्स कंटिन्युटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि चूंकि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है, इसलिए संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं ‘ब्रिक्स कंटिन्युटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म’ की स्थापना का प्रस्ताव रखता हूं। इससे ट्रोइका व्यवस्था के माध्यम से सभी पहलों और निर्णयों पर निरंतर अमल और उनकी समीक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।”
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था एक ऐसे पिरामिड की तरह है, जहां शक्ति और निर्णय लेने का अधिकार शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि नीचे वे देश हैं जो निर्णयों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में उनकी भूमिका नहीं होती।
उन्होंने कहा, “आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे है। हमें इस ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा, जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की भागीदारी हो और मानवता का विकास हर प्रयास के केंद्र में हो।”
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों से वैश्विक शासन सुधार के लिए संयुक्त रूप से 10 प्रस्ताव तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तक एक व्यापक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “ब्रिक्स को मजबूत करने के साथ-साथ हमें वैश्विक सुधार का भी मार्ग प्रशस्त करना होगा। मैं प्रस्ताव करता हूं कि हम सभी मिलकर वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें और अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें ब्रिक्स सुधार रोडमैप का स्वरूप दें।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की ताकत उसकी विविधता, सहमति और समावेशी सोच में है तथा यही दृष्टिकोण आने वाले वर्षों में वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।