BRICS SUMMIT 2026 – DAY 1

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-पीएम मोदी से मिले वियतनामी समकक्ष ले मिन्ह, द्विपक्षीय बैठक में साझेदारी मजबूत करने पर दिया गया जोर.

-ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा पहुंची ब्रिक्स बाजार, भारतीय शिल्प कला में दिखाई रुचि

-वैश्विक व्यापार विवादों से निपटने पर मंथन, संयुक्त घोषणा पर संशय बरकरार

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर वियतनाम के अपने समकक्ष ले मिन्ह हंग से मुलाकात की।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स समिट में पार्टनर देश के तौर पर वियतनाम की भागीदारी का स्वागत किया। इस बैठक से दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने का मौका मिला।

आगे कहा गया कि ये संबंध मई 2026 में वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के राष्ट्रपति, तो लाम की भारत यात्रा के दौरान ‘एनहैंस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ (व्यापक रणनीतिक साझेदारी) के स्तर तक बढ़ाए गए थे। दोनों ने आपसी महत्व के कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया और अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बयान के अनुसार, भारत और वियतनाम के बीच एक पुरानी और भरोसेमंद दोस्ती है, जो साझा सांस्कृतिक विरासत, आपसी विश्वास और समझ पर आधारित है। वियतनाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का एक मुख्य स्तंभ है और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव में एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

पीएम ले मिन्ह हंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शनिवार को ही नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक्स पोस्ट में कहा: “भारत और वियतनाम के बीच एक ‘बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ है, जो दोस्ती और सहयोग के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों पर आधारित है। ये संबंध रक्षा और सुरक्षा, फिनटेक, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य उभरते क्षेत्रों में फैल रहे हैं। दोनों पक्ष बहुपक्षीय सहयोग पर मिलकर काम करना जारी रखे हुए हैं।”

भारत की अध्यक्षता में दो दिवसीय (12-13 सितंबर) ब्रिक्स सम्मेलन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया गया है। जिसमें समूह के सदस्य देशों के अलावा साझेदार के तौर पर शामिल देशों को भी न्योता गया है।

ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा पहुंची ब्रिक्स बाजार, भारतीय शिल्प कला में दिखाई रुचि

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की बेटी जहरा और उनके पति हसन मजीदी ने शनिवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स बाजार का दौरा किया। उन्होंने ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों की कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती शानदार प्रदर्शनी देखी।

जहरा पेजेश्कियन और हसन मजीदी के साथ महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद थीं। इस दौरान वो विभिन्न स्टॉल्स पर मौजूद कारीगरों और शिल्पकारों से बात करती नजर आईं।

उन्होंने ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के कई पवेलियन देखे, जिनमें भारतीय पवेलियन भी शामिल था। साथ ही, उन्होंने सभी देशों की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखी।

ब्रिक्स बाजार सदस्य और सहयोगी देशों के कारीगरों, डिजाइनरों और क्रिएटिव उद्यमों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इसके जरिए इन देशों की विविध संस्कृतियों और रचनात्मकता से साक्षात्कार होता है।

यह बाजार आने वालों को असल शिल्प, हथकरघा, टेक्सटाइल, कलाकृतियों और कई अन्य उत्पादों को देखने का मौका देता है, जो भाग लेने वाले देशों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते हैं।

यहां ईरानी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले दो स्टॉल भी लगाए गए हैं, जिनमें देश की पारंपरिक कढ़ाई और हस्तशिल्प विरासत को दिखाया गया है।

ईरानी स्टॉल्स में से एक बलोची कढ़ाई को प्रदर्शित करता है। इसे नादिया करीमी ने लगाया है। बलोची कढ़ाई, जिसे स्थानीय भाषा में “दोच” (जिसका अर्थ है सिलाई या सुई का काम) कहा जाता है, एक प्राचीन और बारीक हाथ की सिलाई वाली कला है। इसे पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैले बलूचिस्तान क्षेत्र की महिलाएं करती हैं।

करीमी पारंपरिक बलोची कढ़ाई तकनीक को आधुनिक डिजाइनों के साथ मिलाती हैं, ताकि सदियों पुरानी इस कला को आधुनिक रूप दिया जा सके। उन्होंने हाल ही में कनाडा में ‘तारन’ नाम का एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड शुरू किया है, जो ईरानी कला और उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित करता है।

ईरान का दूसरा स्टॉल आमनेह सेदिघी ने लगाया है, जिसमें रश्ती कढ़ाई और ईरानी सुई के काम के अन्य रूप दिखाए गए हैं।

इस कला में पारंपरिक ईरानी सुई का काम और कढ़ाई शामिल है, खासकर रश्ती कढ़ाई (जिसे रश्ती-दूजी भी कहा जाता है) और साथ ही शीशे का काम (जिसे आईनेह-दूजी कहा जाता है)।

रश्त के हस्तशिल्प को आधुनिक रोजमर्रा के उत्पादों, जैसे कपड़े, जूते और सैंडल, में बदला गया है, जबकि इस क्षेत्र की पारंपरिक कलात्मक विरासत की खूबियों को भी बनाए रखा गया है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक व्यापार विवादों से निपटने पर मंथन, संयुक्त घोषणा पर संशय बरकरार

पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच गहरे मतभेदों के कारण इस बात को लेकर शनिवार को संशय बरकरार है कि नई दिल्ली में दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नेता संयुक्त घोषणा पर सहमति बना पाएंगे या नहीं।

इस बीच, भारत इस सम्मेलन में ‘ग्लोबल साउथ’ को बढ़ती भू-राजनीतिक उथल-पुथल के असर से बचाने की कोशिश कर रहा है। ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें विकासशील, अल्प विकसित या अविकसित के रूप में जाना जाता है। ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

कई राजनयिक सूत्रों ने बताया कि व्यापार संबंधी जटिल मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए गहन विचार-विमर्श जारी है लेकिन ईरान और यूएई के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण बातचीत अंतिम समय तक खिंच सकती है।

ब्रिक्स आम सहमति के आधार पर काम करने वाला समूह है इसलिए कोई एक सदस्य भी अंतिम संयुक्त घोषणा पर सहमति बनने से रोक सकता है।

भारत रणनीतिक संतुलन साधते हुए शिखर सम्मेलन के जरिए ब्रिक्स को आर्थिक वृद्धि में सहायक एक पूरक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। साथ ही वह खासकर व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका एवं अन्य पश्चिमी देशों की संवेदनशीलताओं का भी ध्यान रख रहा है।

ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ को अपने एजेंडे के केंद्र में रखा है। वह खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा के लिए ऐसे व्यावहारिक समाधान चाहता है, जिनसे विकासशील देशों को संघर्षों के आर्थिक दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।

शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग भाग ले रहे हैं। कई अन्य वैश्विक नेता भी इसमें शामिल हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला, डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस, न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ और ‘एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक’ की प्रमुख जोउ जियाई भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग ले रही हैं।

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के मूल सदस्य हैं। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब भी 2024 में इसमें शामिल हो गए तथा इंडोनेशिया 2025 में इसका सदस्य बना। बेलारूस, बोलिविया, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले वर्ष ब्रिक्स के साझेदार देश बने।

ब्रिक्स दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाने वाला प्रभावशाली समूह बनकर उभरा है। इसके सदस्य देश वैश्विक आबादी के करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार के करीब 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता चार स्तंभों- लचीलापन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता- पर केंद्रित है।

अधिकारियों ने बताया कि लचीलेपन से जुड़े स्तंभ के तहत भारत स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य, ऊर्जा, आपदा जोखिम में कमी और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सामूहिक सहयोग मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, संपर्क और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी शिखर सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय ‘लचीलेपन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ है, जो ‘‘मानवता प्रथम’’ की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन मुद्दों के अलावा नेता साझा प्राथमिकताओं पर ब्रिक्स के भीतर सहयोग मजबूत करने को लेकर तथा आपसी महत्व के वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच आपसी संपर्क के तीन बुनियादी स्तंभों पर ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से अधिक बैठक और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।

भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है।

भारत ने एक जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘‘समावेशी वैश्विक शासन व्यवस्था और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’’ विषय पर ब्रिक्स सदस्य देशों की बंद कमरे में बैठक से शिखर सम्मेलन शनिवार को शुरू होगा।

इस सत्र के बाद नेता ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इसके बाद वे शिखर सम्मेलन स्थल भारत मंडपम के ‘लॉन’ में सामूहिक तस्वीर के लिए एकत्र होंगे और फिर संयुक्त रूप से पौधरोपण करेंगे।

पहले दिन के कार्यक्रमों का समापन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित रात्रिभोज के साथ होगा।

ब्रिक्स सदस्य देशों, साझेदार देशों और विशेष रूप से आमंत्रित देशों के नेता रविवार को पूर्वाह्न नौ बजकर 55 मिनट से पहुंचना शुरू करेंगे जिसके बाद आधिकारिक सामूहिक तस्वीर ली जाएगी।

‘‘लचीलापन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक वृद्धि के भविष्य को आकार देना’’ विषय पर खुला सत्र पूर्वाह्न 10 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगा।

शिखर सम्मेलन के अंत में ‘नई दिल्ली घोषणा’ जारी किए जाने की उम्मीद है।

‘ब्रिक’ को 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान औपचारिक रूप दिया गया था और इसका पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ।

वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विदेश मंत्रियों की बैठक में दक्षिण अफ्रीका को समूह में शामिल करने पर सहमति बनी जिसके बाद यह ‘ब्रिक्स’ बना। दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में इसके शिखर सम्मेलन में पहली बार भाग लिया था।

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