International -भारत और चीन के बीच व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित करना आवश्यक: एस जयशंकर

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trade Masters / Manila – S Jaishankar stated that there is the need to ensure and develop equal opportunities between India and China trade in the region. भारत और चीन के बीच व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित करना आवश्यक: एस जयशंकर

मनीला, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को चीन के विदेश मंत्री वांग ई के साथ बैठक में कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार में समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के मतभेदों को कूटनीति और संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया, ताकि वे विवाद का रूप न लें।

मनीला में बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग ई के साथ बैठक में जयशंकर ने निष्पक्ष बाजार तक पहुंच और व्यापार संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

आसियान से जुड़ी बैठकों के इतर हुई इस वार्ता में जयशंकर ने कहा, “कजान में अक्टूबर 2024 में हमारे नेताओं की बैठक के बाद भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। पिछले अगस्त में तियानजिन में हुई उनकी मुलाकात ने इस दिशा को और मजबूत किया।”

उन्होंने कहा, ” भारत का मानना है कि स्थिर और सहयोगात्मक संबंध आपसी सम्मान, साझा हितों और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के आधार पर विकसित किए जा सकते हैं। ऐसे संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को “पूर्वशर्त” बताया। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं और इस पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों की स्पष्ट रूप से पूर्वशर्त है। इस क्षेत्र से जुड़े तंत्रों को पूरा समर्थन और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।”

दो बड़े देशों और पड़ोसी होने के नाते भारत और चीन के निहित हितों पर भी विदेश मंत्री ने खुलकर राय रखी। उन्होंने कहा, “यही वजह है हमारे नेताओं ने सहमति जताई थी कि मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए। उन्हें उचित तरीके से संभालना कूटनीति की जिम्मेदारी है।”

विदेश मंत्री ने भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए हाल के महीनों में उठाए गए कदमों का स्वागत किया। उन्होंने प्रत्यक्ष उड़ानों की बहाली, वीजा व्यवस्था में सुधार, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर शुरू करने और सीमा व्यापार की बहाली का उल्लेख किया।

हालांकि, उन्होंने कहा, “संबंधों में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी ध्यान देने की जरूरत है। इनमें निष्पक्ष बाजार तक पहुंच, व्यापार संतुलन और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता प्रमुख हैं।”

जयशंकर ने कहा कि सरकारी स्तर और लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाना भी जरूरी है। साथ ही, दोनों देशों को अपनी आपसी प्राथमिकताओं के अनुसार विभिन्न तंत्रों और मंचों की बैठकों पर सहमति बनानी होगी।

विदेश मंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन द्वारा विभिन्न गतिविधियों और पहलों में दिए गए सहयोग की भी सराहना की।

उन्होंने कहा, “मौजूदा वैश्विक स्थिति बेहद जटिल है और ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना जरूरी है।”

मनीला में कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद से मिले जयशंकर, कहा- ‘दोनों देशों के संबंध हो रहे मजबूत’

मनीला, विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने बुधवार को मनीला में अपनी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद से मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने भारत-कनाडा संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा तय किए गए लक्ष्यों को हासिल करने पर चर्चा की।

बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई बातचीत बहुत अच्छी रही। भारत-कनाडा के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। हमारी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और पीएम कार्नी द्वारा तय किए गए लक्ष्यों को हासिल करने पर केंद्रित रही।”

इससे पहले जयशंकर ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से भी मुलाकात की और क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर उनके विचारों और आकलन की सराहना की।

जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “आज दोपहर मनीला में सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ अच्छी बातचीत हुई। क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर उनके विचारों और आकलन को हमेशा महत्व देता हूं।”

भारत के विदेश मंत्री आसियान ढांचे के तहत होने वाली बैठकों में भाग लेने के लिए दो दिवसीय फिलीपींस दौरे पर हैं।

बैठक से इतर जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की और क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की गंभीर चिंता दोहराई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं, यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की।

मुलाकात के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों की गहन समीक्षा की। क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता दोहराई। व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा एवं कनेक्टिविटी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आवागमन सहित साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”

विदेश मंत्री ने मनीला में अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तहत प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की समीक्षा की और क्षेत्रीय, वैश्विक तथा बहुपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए।

जयशंकर ने बताया कि बातचीत में व्यापार एवं शुल्क (टैरिफ), ऊर्जा, रक्षा एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

वर्तमान दौर में किसी भी चुनौती से अकेले नहीं निपट सकते, भारत-आसियान को मिलकर आगे बढ़ना होगा: एस जयशंकर

मनीला, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मनीला में आयोजित मंत्री स्तरीय सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। अपने संबोधन में उन्होंने आसियान और भारत से भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने के साथ ही साझेदारी को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

जयशंकर ने आसियान मंत्री स्‍तरीय सम्‍मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए कहा, “मौजूदा अस्थिर और तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में कोई भी एक देश या समूह अकेले चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता।” उन्होंने भारत और आसियान देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।

विदेश मंत्री ने फिलीपींस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए देश समन्वयक (कोआर्डिनेटर) की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आसियान की अध्यक्षता का विषय “मिलकर भविष्य की राह तय करना” (नैविगेटिंग आर फ्यूचर टुगैदर) आज की वैश्विक भावना को दर्शाता है।

वर्तमान वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा, “दुनिया लगातार अधिक अस्थिर होती जा रही है और यह स्पष्ट है कि कोई भी देश या संगठन अकेले इन चुनौतियों से नहीं निपट सकता। ऐसे में यह विचार करना जरूरी है कि आपसी सहयोग किस तरह सभी देशों के हितों को आगे बढ़ा सकता है।”

जयशंकर ने कहा, “मौजूदा अनिश्चितता और व्यवधान के दौर में आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है। समुद्री व्यापार पर निर्भरता को देखते हुए समुद्री क्षेत्र भी चिंता का विषय बन सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 को ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है, जो अधिक स्थिर और सुरक्षित भविष्य के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए जा सकने वाले प्रयासों की याद दिलाता है।

ट्रेड से लेकर डिजिटल और एआई क्षेत्र में सहयोग की वकालत करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “चुनौतियों के बावजूद भारत और आसियान दोनों अपने भविष्य को लेकर आशावादी हैं। अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापार एवं निवेश, आवागमन और प्रतिभा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल क्षेत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित विकास एवं स्थिरता तथा कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना होगा।”

जयशंकर ने कहा कि व्यापक सहयोग ही जोखिमों को कम करने, आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों में विविधता लाने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा, “भारत और आसियान ने परंपरागत रूप से व्यापक क्षेत्र के कल्याण के लिए मिलकर काम किया है। भारत के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।”

उन्होंने आसियान के हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण और भारत की इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव के बीच समानता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पक्ष कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, जो उनकी नीतियों और पहलों में दिखाई देता है।

जयशंकर ने कहा, “यह दुनिया बदलाव के दौर से गुजर रही है और भारत तथा आसियान, जिनकी संयुक्त आबादी लगभग दो अरब है, को इसे सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने के लिए मिलकर आगे बढ़ना होगा।”

रूसी विदेश मंत्री से मिले जयशंकर, भारतीय नाविकों की सुरक्षा का उठाया मुद्दा

मनीला, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। ब्लैक सी हमले में 4 भारतीय नाविकों की मौत के बाद शीर्ष स्तर के मंत्रियों की ये पहली मुलाकात थी। इस दौरान विभिन्न मुद्दों के साथ ही नाविकों की सुरक्षा पर भी गहन चर्चा हुई।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों की गहन समीक्षा की।”

उन्होंने आगे लिखा, “क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता दोहराई। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच साझेदारी के विभिन्न पहलुओं, जिनमें व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा एवं कनेक्टिविटी, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर चर्चा की। इसके अलावा यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”

19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हो रहे एक कमर्शियल जहाज पर रूस की ओर से दागी गई मिसाइल जहाज एमवी गोल्डन लियो पर गिरी। इस हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को रूसी चार्ज डी’ अफेयर्स को तलब किया। इस हमले में घायल एक भारतीय नागरिक की हालत गंभीर है।

घटना के समय जहाज पर 17 क्रू मेंबर थे। इनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे।

हमले की निंदा करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और बेगुनाह सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना, या किसी और तरह से नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना, बहुत बुरा है और इससे बचना चाहिए।”

कीव पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक रूसी मिसाइल ने तुर्किए के मालवाहक जहाज गोल्डन लियो पर हमला किया, जिसमें कुल 10 लोग मारे गए।

आसियान की बात करें तो, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) से संबंधित वार्षिक बैठकों में भाग लेने के लिए मनीला, में हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य पश्चिमी दबाव के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रूस के राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना है।

आसियान के साथ साझेदारी मजबूत करेगा क्वाड, मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत पर बनी सहमति

नई दिल्ली/मनीला, आसियान की बैठक से इतर भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने एक अहम बैठक की। इसके बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया। बयान में सबसे ज्यादा जोर मुक्त एवं खुले इंडो-पैसेफिक पर दिया गया। आसियान के साथ सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

यह संयुक्त बयान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की ओर से जारी किया गया।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने संयुक्त बयान को साझा किया है। इसके अनुसार, आसियान के व्यापक रणनीतिक साझेदार के रूप में चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने बुधवार को मनीला में बैठक कर मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मजबूत बनाने के साथ ही आसियान की एकता और केंद्रीय भूमिका के प्रति अपने अटूट समर्थन की पुष्टि की।

बयान में कहा गया कि क्वाड देशों की क्षेत्र की सफलता में गहरी भागीदारी है और वे आसियान तथा उसके सदस्य देशों के साथ सहयोग को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्वाड नेताओं ने क्षेत्रीय चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा की। उन्होंने समुद्री एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों तथा मानवीय सहायता एवं आपदा प्रतिक्रिया जैसे साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के माध्यम से आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (एओआईपी) के व्यावहारिक क्रियान्वयन को मजबूत करने पर सहमति जताई।

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि चारों देश इस विश्वास में एकजुट हैं कि हिंद-प्रशांत के समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता ही पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि की आधारशिला है।

विदेश मंत्री ने एक्स पर भी इस बैठक में साझा किए गए विचारों का उल्लेख किया। अपने पोस्ट में जयशंकर ने कहा, “मनीला में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होकर खुशी हुई।”

उन्होंने आगे लिखा, “बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई और हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। साथ ही, नई दिल्ली में हाल ही में हुई क्वाड बैठक के निर्णयों और उनके क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। हमने आसियान की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।”

जयशंकर की मनीला में रूबियो और पेनी वोंग से अहम वार्ता, वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर हुआ मंथन

मनीला में विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर का विभिन्न देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात का सिलसिला जारी है। इसी के तहत वो अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग से मिले।

अमेरिकी समकक्ष संग जयशंकर ने ‘भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा की और क्षेत्रीय, वैश्विक तथा बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मनीला में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की प्राथमिकताओं पर केंद्रित रही, जिनमें व्यापार एवं शुल्क (टैरिफ), ऊर्जा, रक्षा एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शामिल हैं। हमने क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी संक्षिप्त विचार-विमर्श किया।”

जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान हुए समझौतों और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री सीनेटर पेनी वोंग से मुलाकात कर खुशी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान हुए परिणामों पर आगे की चर्चा की।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 से 10 जुलाई के बीच मेलबर्न में आयोजित ऑस्ट्रेलिया-भारत वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिनमें रक्षा सहयोग और यूरेनियम आपूर्ति से संबंधित असैन्य परमाणु समझौता भी शामिल था।

इससे पहले बुधवार को जयशंकर ने फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-फिलीपींस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा की।

जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “आज मनीला में फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो से मिलकर खुशी हुई। व्यापार एवं निवेश, शिक्षा, रक्षा एवं सुरक्षा, समुद्री सहयोग, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में हमारी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सार्थक चर्चा हुई।”

उन्होंने बताया कि बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया।

वहीं, फिलीपींस की विदेश मंत्री लाजारो ने भी एक्स पर कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर “सार्थक चर्चा” हुई और फिनटेक, व्यापार एवं निवेश, उच्च शिक्षा, दवा उद्योग, रक्षा, समुद्री सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

आसियान शिखर सम्मेलन और इन मुलाकातों को लेकर भारत में अमेरिका के राजदूत ने एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा, “आज मनीला में क्वाड देशों की बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ शामिल हुआ। मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ठोस परिणाम सुनिश्चित करने को लेकर बेहद सार्थक चर्चा हुई। हम चारों देशों की सोच एक सी ही है।”

भारत-चीन रिश्तों में सकारात्मक प्रगति, मनीला में जयशंकर ने वांग ई से की व्यापक बातचीत

मनीला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में चीन के विदेश मंत्री वांग ई के साथ व्यापक बातचीत की। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री ने कहा, “भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़े हैं।” दोनों ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों, सीमा पर शांति एवं स्थिरता के साथ ही प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) और आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) की बैठक के इतर चीन के विदेश मंत्री एवं चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग ई के साथ विस्तृत बातचीत की।

बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, “आपसे फिर मिलकर खुशी हुई। ईएएस और आसियान क्षेत्रीय मंच में हमारी भागीदारी न केवल सामूहिक रूप से विचारों के आदान-प्रदान का अवसर देती है, बल्कि इस द्विपक्षीय बैठक का भी अवसर प्रदान करती है।”

उन्होंने कहा कि यह बैठक भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर है। उन्होंने कहा, “हम एक वर्ष पहले मिले थे और आप हाल ही में भारत भी आए थे। आज की यह बैठक हमारे संबंधों का आकलन करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श के लिए उपयोगी होगी।”

विदेश मंत्री ने कहा कि अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद दोनों देशों के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “अक्टूबर 2024 में कजान में हमारे नेताओं की बैठक के बाद भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़े हैं। पिछले अगस्त में तियानजिन में उनकी मुलाकात ने इस दिशा को और मजबूत किया।”

जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर संबंध आपसी सम्मान, साझा हितों और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के सम्मान पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा, “ऐसे संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए अनिवार्य शर्त है।

उन्होंने कहा, “सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों की पूर्वशर्त है। अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस पर आगे भी निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।”

जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे नेताओं ने सहमति जताई थी कि मतभेद विवाद का रूप न लें। इन्हें उचित ढंग से संभालना कूटनीति की जिम्मेदारी है।”

विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का स्वागत किया। उन्होंने प्रत्यक्ष उड़ानों की बहाली, वीजा व्यवस्था में सुधार, कैलाश मानसरोवर यात्रा के दोबारा शुरू होने और सीमा व्यापार की बहाली जैसे कदमों का उल्लेख किया।

हालांकि उन्होंने कहा कि अभी भी कई मुद्दों पर काम किया जाना बाकी है। इनमें भारतीय कंपनियों के लिए निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चिंताएं तथा सरकारी और जन-स्तर पर संपर्क को और सुगम बनाना शामिल है।

जयशंकर ने ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता के दौरान चीन द्वारा दिए गए सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व के प्रमुख मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।

जयशंकर ने फिलीपींस की विदेश मंत्री लाजारो से हिंद-प्रशांत पर की अहम चर्चा

मनीला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को मनीला में फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाजारो से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-फिलीपींस रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा की।

बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “आज मनीला में फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाजारो से मिलकर खुशी हुई। व्यापार एवं निवेश, शिक्षा, रक्षा एवं सुरक्षा, समुद्री सहयोग, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग पर केंद्रित हमारी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सार्थक चर्चा हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया।”

वहीं, फिलीपींस की विदेश मंत्री लाजारो ने भी एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर “सार्थक चर्चा” हुई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने फिनटेक, व्यापार एवं निवेश, उच्च शिक्षा, दवा उद्योग, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब हाल ही में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फिलीपींस और चीन के बीच तनाव बढ़ा है।

फिलीपींस के अनुसार, 20 जुलाई को दक्षिण चीन सागर के सेकंड थॉमस शोल क्षेत्र में चीन ने उसकी नौसेना के जवानों के खिलाफ “खतरनाक और आक्रामक कार्रवाई” की।

भारत के लिए दक्षिण चीन सागर के घटनाक्रम रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत का एक बड़ा व्यापार हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है। नई दिल्ली लगातार नौवहन की स्वतंत्रता, निर्बाध समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है।

हाल ही में भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नौवहन, हवाई आवाजाही और वैध समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के तहत शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।

इस बीच, अमेरिका के नेतृत्व में 12 देशों ने दक्षिण चीन सागर पर वर्ष 2016 के ऐतिहासिक मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर “स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत” के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस फैसले में चीन के व्यापक समुद्री दावों को खारिज किया गया था।

संयुक्त बयान में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, एस्टोनिया, जापान, लातविया, लिथुआनिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, रोमानिया, स्लोवेनिया और यूनाइटेड किंगडम ने अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित शांतिपूर्ण, स्थिर और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन की बात दोहराई।

इससे पहले दिन में, आसियान-भारत पोस्ट-मिनिस्टीरियल सम्मेलन 2026 में अपने उद्घाटन संबोधन के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान ने हमेशा व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर काम किया है।

उन्होंने कहा, “भारत के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसका एक उदाहरण यह है कि हिंद-प्रशांत पर आसियान का दृष्टिकोण भारत की ‘इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव’ के साथ मेल खाता है। कई अन्य क्षेत्रों में भी हमारा सहयोग गतिविधियों, नीतियों और उपलब्धियों के रूप में दिखाई देता है। दुनिया परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और भारत तथा आसियान, जिनकी संयुक्त आबादी लगभग दो अरब है, को सुरक्षित और स्थिर भविष्य के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा।”

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