Special Report – अंकित शर्मा को इंसाफ़ मिलेगा? या फिर से कानूनी खेल चलेगा

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Ankit Sharma Murder Case 2020. AAM Admi Party Leader Tahir Hussain and 4 others convicted lifetime sentence by Delhi Court. अंकित शर्मा हत्याकांड : ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, उच्च न्यायालय में अपील की बात कही

 हत्यारों के सिर्फ एक झुंड को फांसी नहीं- बोली बस उम्रकैद,

पर इनके इस मास्टरमाइंड को सज़ा कब देगा कानून। बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के जज़ इस उम्रकैद को पलट देंगे या कानून की जीत होगी इसमें संशय है । अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है क्योंकि कानून की धज्जियां उड़ाने वाले ये पुराने खिलाड़ी अपील की तैयारी में हैं। 

कोर्ट ने उतारा आम आदमी पार्टी की कट्टर ईमानदारी का नकाब. 

पहचान लीजिए इनके हंसते हुए चेहरे जो निर्दोष अंकित शर्मा की भयावह निर्मम हत्या करने के बाद भी कभी गमगीन ना दिखे।  ये हैं वो दरिंदे और शांति के भक्षक चेहरे जिन्होंने की थी दिल्ली और शायद देश भर में CAA , NRC के प्रस्ताव के विरोध में ये खूनी साजिश। 

ये सामने से पढ़े लिखे नेता और पूर्व अधिकारी का तमगा ले कर दिल्ली की गद्दी पर बैठा था पर देश विरोधी ताकतों के साथ मिल कर  लिखता रहा खूनी साजिश। हर कदम पर जनता को धोखा दिया।  इस वर्ग विशेष की बात करें तो जिसे हमारे देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के अधिकांश देशों की सबसे बड़ी समस्या भी कहना गलत नहीं है उस के साथ मिल कर दिल्ली को दंगों की आग में झोंक दिया  था 2020 में। 

IB अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद व अरविंद केजरीवाल के करीबी ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा ने AAP के असली चेहरे से नकाब उतार दिया है !

सवाल यह है, जब पार्टी का अपना पार्षद दंगों की साजिश रच रहा था, तब आम आदमी पार्टी का नेतृत्व क्या कर रहा था? 

आप आदमी पार्टी का सिरकटा तिलचट्टा  सरदार मैनेजमेंट उस समय इन प्रायोजित दंगों की रूपरेखा बनाने समझाने के बाद, शराब घोटाले, स्कूल घोटाले, शिक्षा घोटाले, मोहल्ला क्लीनिक नकली दवाई घोटाले, दिल्ली महिला आयोग स्टाफ भर्ती घोटाले, नौकरी घोटाले जिनमें ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफिस प्रमुख और प्रत्यक्ष है मुखौटा कंपनियां बनाने, पार्टी फंड घोटाले और अपने शीशमहल का नक्शा, अय्याशी का badget और अपने ऐशो आराम  तफरीह के सामान की लिस्ट बना रहा था।

देश की राजधानी पर अपनी कुटिलता से काबिज़ होने के बाद इन सिरकट्टों तिलचट्टों ने इसे अपने बाप की ही बसाई नगरिया समझ लिया था कि अब कोई इनका सिंहासन हिला नहीं पाएगा। इनके बसाये हुए देश द्रोहियों, माफ़िया ,फर्ज़ी वोटरों , अवैध प्रवासियों,  दीमक जैसी मुफ़्तखोर परजीवी क़ौम के जनसंख्या विस्फोट की चोटी पर खड़े इस दिल्ली राज्य को इनकी गिरफ्त से कोई निकाल ना पाएगा। इन्होंने राज्य की संपत्ति, कर, वित्त, स्वायत्ता, सुरक्षा , शांति, स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों का हनन किया, अपने स्वार्थ और सत्ता में बने रहने के लिए भयानक रूप से  दुरुपयोग किया। आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन जैसे लोगों और अन्य राज्यों में फैले इसके जैसों के सिंडिकेट का प्रयोग कर दिल्ली के मूल निवासियों के जीवन, संपत्ति, सुरक्षा को संकट में डाला। दिल्ली जल रही थी।

आम आदमी पार्टी वालों ने अपने चिन्हित लोगों के घरों  दुकानों वाहनों पर आम आदमी पार्टी के गोल स्टिकर चिपकाये थे जिससे मुसलमान उपद्रवियों को हिंदू घरों दुकानों की पहचान करने में मदद मिले। उन्होंने चुन चुन कर हिंदुओं की संपत्ति को जलाया। बीजेपी वोटर्स को निशाना बनाया। अंकित शर्मा का अपराध सिर्फ इतना था कि  उन्होंने जब एक व्यक्ति को इन जेहादियों दंगाइयों से घिरे पाया तो जा कर उन से शांति की अपील ही की थी। भाईचारे का हवाला दे कर लड़ने से रोका था लेकिन ये वहशी जानवर उन्हीं पर बड़े बड़े चाकू ले कर टूट पड़े। 150 से ज्यादा गहरे जानलेवा वार किए और उसके बाद इन्होंने उस पूरे क्षेत्र में रह रहे हिंदुओं पर हमला बोल दिया।

पुलिस पर गोलियां चलाईं, उन्हें और निर्दोष हिंदुओं को बेरहमी से मारा गया, इन्होंने अपने घरों में वर्षों से जो दंगों की तैयारी की थी पत्थर, मलबा, टाइल टुकड़े, तेज़ाब,  अवैध हथियार, पेट्रोल बॉम्ब, सबका खुलासा इसी दंगे के दौरान हुआ था। फ़र्जी हिंदू नामों से दुकानें, तेज़ाब के गोदाम, तेज़ाब की फैक्ट्रियां चलाई जा रहीं थीं। छत्तों पर लोहे के एंगल आयरन और ट्रकों की ट्यूब इस्तेमाल कर के बड़ी गुलेल बनाई गई थी लंबी दूरी पर पत्थर और पेट्रोल बॉम्ब, तेज़ाब की बोतलें मारने के लिए। इनके जुटाये गए दंगाइयों ने मंदिरों मूर्तियों को थोड़ा, छोटे बच्चों के हिंदू मालिकों के स्कूलों तक को जलाया था। 

नई दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इससे पहले 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी ठहराया था, जबकि छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय कक्ष का वातावरण भावुक हो गया। ताहिर हुसैन सहित सभी दोषी रो पड़े, जबकि न्यायालय परिसर के बाहर मौजूद उनके परिजन भी भावुक दिखाई दिए। न्यायालय से बाहर लाए जाने के दौरान ताहिर हुसैन ने कहा कि वह इस निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय से न्याय मिलने की उम्मीद है।

अभियोजन पक्ष ने इस मामले को अत्यंत जघन्य बताते हुए सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। हालांकि न्यायालय ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद सभी पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 3 जून 2020 को इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोपपत्र में कहा गया था कि 24 और 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन के नेतृत्व में भीड़ ने खुफिया ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा को निशाना बनाया। अभियोजन के अनुसार हत्या के बाद उनका शव नाले में फेंक दिया गया था।

मृतक अंकित शर्मा की चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट में उनके शरीर पर धारदार हथियार से किए गए 51 घावों का उल्लेख किया गया था। पुलिस ने अंकित शर्मा के पिता की शिकायत के आधार पर हत्या, अपहरण, साक्ष्य नष्ट करने और साझा आपराधिक मंशा सहित विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया था।

न्यायालय ने अपने पूर्व निर्णय में कहा था कि अपराध को अत्यंत क्रूर तरीके से अंजाम दिया गया। इसी आधार पर ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी ठहराया गया था। वहीं हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, समीर खान, फिरोज, गुल्फाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी तथा मुंतजिम उर्फ मुसा को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

मामले का प्रमुख घटनाक्रम

25 फरवरी 2020 : अंकित शर्मा की हत्या।

26 फरवरी 2020 : दयालपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज।

3 जून 2020 : पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया।

21 अगस्त 2020 : न्यायालय ने आरोपपत्र पर संज्ञान लिया।

5 फरवरी 2021 : पहला पूरक आरोपपत्र दाखिल।

23 जून 2022 : दूसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल।

9 दिसंबर 2022 : तीसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल।

23 मार्च 2023 : 11 आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय।

13 जुलाई 2026 : 5 आरोपी दोषी करार, 6 बरी।

27 जुलाई 2026 : सजा पर बहस, अभियोजन ने मृत्युदंड की मांग की।

31 जुलाई 2026 : ताहिर हुसैन सहित 5 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा।

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। अंकित शर्मा हत्याकांड उस हिंसा के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा, जिसकी सुनवाई पिछले कई वर्षों से चल रही थी। अब दोषियों द्वारा उच्च न्यायालय में अपील किए जाने की संभावना है, जिसके बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

ताहिर हुसैन को उम्रकैद पर कपिल मिश्रा की प्रतिक्रिया, बोले— यह न्याय की शुरुआत

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे न्याय की शुरुआत बताते हुए आशा व्यक्त की कि उच्च न्यायालय में इस सजा को मृत्युदंड में परिवर्तित किया जाएगा।

कड़कड़डूमा न्यायालय ने ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को हत्या, अपहरण, घातक हथियारों के साथ दंगा करने तथा अन्य संबंधित अपराधों में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

निर्णय के बाद सामाजिक माध्यम पर प्रतिक्रिया देते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यंत क्रूर तरीके से की गई थी। उन्होंने दावा किया कि हत्या के बाद भी शव पर धारदार हथियारों से वार किए गए और उसे नाले में फेंक दिया गया। उनके अनुसार यह मामला अत्यंत विरल श्रेणी का है और इस पर उच्च न्यायालय को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उधर, न्यायालय परिसर से बाहर ले जाए जाने के दौरान ताहिर हुसैन ने कहा कि वह इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उन्हें वहां न्याय मिलेगा।

इस बीच दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने भी न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 के दंगों के दौरान ताहिर हुसैन की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने उनका समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस विषय पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

हर्ष मल्होत्रा ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी को यह बताना चाहिए कि उसने ताहिर हुसैन जैसे व्यक्ति को अपनी पार्टी में क्यों स्थान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व लंबे समय तक उनके समर्थन में खड़ा रहा।

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान खुफिया ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में न्यायालय ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं ताहिर हुसैन ने निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करने की घोषणा की है, जिससे मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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