Jammu Kashmir Book Controversy : Terrorists portrayed as social great personalities of J&K region by the writer and publisher. A strong action is taken on the writer publishers of these controversial book. J&K Govt. Education ministry approved this book intentionally. 8+1 officers has been suspended till now in this case. जम्मू कश्मीर पुस्तक विवाद: यूएपीए, बीएनएस के तहत प्राथमिकी दर्ज ; छापेमारी जारी
जम्मू, जम्मू कश्मीर पुलिस की ‘काउंटर इंटेलीजेंस’ इकाई ने शनिवार को एक प्राथमिकी दर्ज की और दो विवादित पुस्तकों में अलगाववादियों का कथित तौर पर महिमामंडन किये जाने के सिलसिले में छापेमारी शुरू की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

जिन पुस्तकों को लेकर विवाद है, उनके नाम हैं – ‘पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू कश्मीर’ (लेखक: हिलाल अहमद और संतोष मीणा; प्रकाशक: जम्मू स्थित ओबेरॉय बुक सर्विस) और ‘ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू कश्मीर’ (लेखक: सुशांत गिरी; प्रकाशक: दिल्ली स्थित अनुराग प्रकाशन)।
अधिकारियों के अनुसार, एक पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में भेजी गई थीं।

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू के काउंटर इंटेलीजेंस पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस की धारा 49 (उकसाना), 61(2) (आपराधिक साजिश), 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना), 196 (वैमनस्य या अशांति फैलाना) और 353 (गलत बयान, अफवाहें या रिपोर्ट छापना या फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13 के तहत भी मामला दर्ज किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मामला दर्ज करने के बाद, इकाई ने शहर के बहू प्लाजा में एक प्रकाशक के ठिकानों पर छापेमारी की।
उन्होंने कहा कि यह तलाशी अभियान मामले से जुड़ी सामग्री एकत्र करने के लिए चल रही जांच के तहत चलाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ताओं ने छापेमारी के दौरान भौतिक दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं, और अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इससे पहले, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन पुस्तकों की जांच के आदेश दिए और इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया तथा एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी।
यह कार्रवाई भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों द्वारा इस पुस्तक पर यह आरोप लगाए जाने के बाद की गई कि इसमें कथित तौर पर अलगाववाद का ‘महिमामंडन’ किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश में कहा गया है कि दोनों पुस्तकों को शुक्रवार को वापस ले लिया गया।
स्कूली बच्चों के लिए ‘अनुचित’ कंटेंट वाली दो विवादित किताबें खरीदने पर दो अधिकारी सस्पेंड
श्रीनगर, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के आदेश पर स्कूल शिक्षा विभाग (एसईडी) के आठ अधिकारियों को स्कूल के बच्चों के लिए ‘अनुचित’ कंटेंट वाली दो किताबें खरीदने और उन्हें मंजूरी देने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। आतंकियों व अलगाववादियों का महिमा मंडन करने वाली इन दो किताबों का बीजेपी ने भी विरोध किया था।
स्कूल शिक्षा विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी राम निवास शर्मा ने आदेश में कहा कि समग्र शिक्षा को 18,328 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री स्कूलों के लिए’उम्र के हिसाब से सही किताबें खरीदने के लिए लाइब्रेरी ग्रांट मिली थी और इसके लिए ईओई (रुचि की अभिव्यक्ति) जारी की गई थी। आदेश में कहा गया है कि उम्र के हिसाब से सही किताबों को चुनने के लिए जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों के एक्सपर्ट्स और एकेडेमिशियन्स की 4 सब-कमेटी बनाई गई थीं। आदेश में यह भी कहा गया है कि ये सब-कमेटी प्राइमरी क्लास सीरीज (1) अपर प्राइमरी क्लास सीरीज (2), सेकेंडरी क्लास सीरीज (3) और हायर सेकेंडरी क्लास सीरीज (4) के लिए थीं। आदेश में कहा गया है, इन चार सब-कमेटी ने 364 पब्लिशर्स की तरफ से भेजी गई 463 किताबों को चुना। इनमें से दो किताबों में अनुचित कंटेंट पाया गया।
कमिश्नर सेक्रेटरी ने आगे कहा कि इसके बाद इन किताबों को वापस ले लिया गया। इन दो किताबों में शामिल हैं ‘पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जे एंड के’ (लेखक: हिलाल अहमद और संतोष मीणा, पब्लिशर: ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू) और ‘ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ (लेखक: डॉ. सुशांत गिरी, पब्लिशर: अनुराग प्रकाशन, दिल्ली)। आदेश में कहा गया है यह देखा गया है कि सीरियल-I में बताई गई 123 किताबें जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में सप्लाई की गई थीं और सीरियल-II में बताई गई 128 किताबें जम्मू और बारामूला जिलों में सप्लाई की गई थीं।
शर्मा ने यह भी कहा कि विभाग के ध्यान में यह बात आई है कि इन किताबों में बहुत ही आपत्तिजनक कंटेंट है। यह साफ है कि सब-कमेटी सीरीज-IV के सदस्यों और सुपरवाइजरी अधिकारियों ने ऐसी किताबों की सिफारिश करने में गंभीर लापरवाही और अपने काम में कोताही बरती है। इन किताबों में अलगाववाद से जुड़ा कंटेंट था, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती थी। इसमें कहा गया है, मामले के इन तथ्यों और हालात को देखते हुए, सब-कमेटी सीरीज-IV के सदस्य सरकारी कर्मचारियों की ऐसी गंभीर चूक और लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार लगते हैं।
सरकार ने यह भी आदेश दिया कि सस्पेंशन की अवधि के दौरान वे स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक विभाग से जुड़े रहेंगे। इसके अलावा सरकार ने समग्र शिक्षा के लाइब्रेरी कोऑर्डिनेटर की मदद कर रहे कंप्यूटर असिस्टेंट (कॉन्ट्रैक्चुअल) को उनके कॉन्ट्रैक्ट से तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश दिया। मामले की गंभीरता और इन अधिकारियों के गलत व्यवहार को देखते हुए सरकार ने मामले की जांच के लिए अश्वनी कुमार फाइनेंशियल कमिश्नर (अतिरिक्त मुख्य सचिव, बिजली विकास विभाग) को जांच अधिकारी नियुक्त किया।
इसके अलावा, सरकार ने रोहित शर्मा अतिरिक्त सचिव (सरकार), सामान्य प्रशासन विभाग को इस मामले में प्रेजेंटिंग ऑफ़िसर नियुक्त किया। इसमें कहा गया है कि जांच अधिकारी 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में इन लेखकों और प्रकाशकों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने का भी आदेश दिया। आदेश में कहा गया है कि इसके अलावा उनके द्वारा लिखे या प्रकाशित किसी भी प्रिंटेड मटीरियल को भी जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से हटा लिया जाएगा।