ग़ज़ब भयो रामा जुलम भयो रे
अब की बार अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह की मूर्ति के साथ खेला हो गया। Akhilesh Yadav looked un-pleased after he saw statue of his deceased father Mulayam Singh. The statue is prepared by Padamshri Awarded artist Shri Ram Vandev Sutaar. Yet another disappointment for SP head Akhilesh.

अखिलेश ने भी अपनी जग परसिद्ध बुआ मायावती की “मनी- मैनी- मेगा -मूर्ति” के पद चिन्हों पर चलते मुलायम की मूर्ति रखवाने की सोची और दे डाला ऑर्डर देश के नामी मूर्तिकार श्री राम वनदेव सुतार जी को। सुतार जी ने भी पूरी मेहनत से मुलायम चरित्र को मूर्ति में कास्ट किया लेकिन सुना गया है की वो भी यहां मात खा गए।
विपक्ष एलायंस के सियासी बोल और राहुल गांधी के ढोल की पोल की तरह श्री सुतार का ऐंड रिजल्ट कुछ गड्डमड्ड हो गया जिसे देख कर कल अखिलेश को दिल का दौरा लगभग पड़ ही गया था। बस मन मसोस कर शायद यही बोला होगा कि अब्बा हुजूर फिर से बदले बदले नजर आते हैं।

बहरहाल अब राम सूतार जी को फिर से मूर्ति के चेहरे मोहरे में बदलाव करने के लिए बोला गया है जिससे वो वास्तविक चरित्र से दूर ही सही परंतु मुलायम सिंह कम से कम मूर्ति में ही सही थोड़ा संवेदनशील जैसे तो दिखाई पड़े ।
हालांकि हमे मुलायम सिंह की राजनीति में कहीं भी ऐसे प्रमाण नहीं मिलते जिससे खुद को जबरदस्ती नेताजी का तमगा पहनाने वाले मुलायम के, जनकल्याण को सच्चे सरल समर्पित नेता होने के साक्ष्य मिलते हों।
हमारे लिए तो भारत में आज तक एक ही सच्चे मायनों में नेताजी हुए हैं और हमेशा रहेंगे “नेताजी सुभाष चन्द्र बोस”। बाकी किसी महिमामंडित स्वयंभू सख्त/मुलायम नेताजी बने हुओं से हमें क्या सरोकार।

वैसे यक्ष प्रश्न है कि अखिलेश की, मुलायम की मूर्ति रखवाने की इतनी जल्दी कहीं राम मंदिर के अनावरण कि नजदीक आती तिथि से तो नहीं जुड़ी। क्योंकि ये सब उन्ही सब लोगों के झुंड हैं जिन्होंने निरीह संतो पर गोलियां चलवा कर अपनी दिवाली मनाई थी।
रामायण और राम मंदिर के द्रोही, हिंदू सिंधु और सनातन के द्रोही आज अपने अत्याचारों की कहानी दबा कर समाज कल्याण की कसमें खाते दिखते हैं। एलायंस बना कर नफरत की दुकान भी खोलते हैं पर अपने ठग्गू गैंग के ठरकी स्टालिन जैसे चमनछाप के सनातन पर वार पर चुप रहते हैं, विक्षिप्तता की और तेज़ी से बढ़ते मंत्री मौर्या और संसद में हमले में विपक्षी दलों की संलिप्तता पर चुप रहते है । परंतु संसद और देश के अपमान करने वाले बलवाई सांसदों के निलंबन पर सब एक सुर में रंभाते पगुराते दिखते हैं गजब की टाइमिंग हैं।

मूर्ति के भाव मूर्तिकार बदल कर दिखा देगा परंतु जीवन भर किए गए निकृष्ट कर्मों, संत हत्या, राम के अपमान, समाज ही नहीं संसद तक में एक संत को अपमानित करते कुटिल कपटी हंसी हंसते भयावह घृणा के पात्र ये चेहरे और चरित्र, इनके सनातन धर्म के प्रति किए गए अपराधों की सच्चाई को कैसे बदलोगे।
बेशक तुम अपने अब्बा के भाव बदलवा पाओगे लेकिन सिर्फ अपनी बनवाई मूर्तियों और अपने ही छपवाए रिसालों में।
जय मां भारती