Abhishek Manu Singhvi Congress always push itself to self created controversies and then creates hue and cry in front of media. Also to remember its cash connections. This time it is Abhishek Manu Singhvi the lawyer who fought for almost all top terrorist or corrupt politicians facing any financial or social or financial allegations Manu Singhvi is among front lawyer to give helping hand. But yesterday he himself faced something unexpected when a bundle of 500 rs. pack recovered from his allotted seat 222 in parliament. Now Singhvi may face investigation in this regard. Most likely he will be denying the ownership until the forensic fingerprints report confirms
नई दिल्ली, संसद के उच्च सदन राज्यसभा में कांग्रेस के बेंच के नीचे नोटों की गड्डी मिली है। यह जानकारी राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने दी।
उन्होंने कहा, “मैं यह सूचित करना चाहता हूं कि कल सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद, जब नियमित जांच की गई, तो सुरक्षा अधिकारियों ने सीट संख्या 222 (जो वर्तमान में अभिषेक मनु सिंघवी को आवंटित है) से नोटों का एक ढेर बरामद किया। यह मामला मेरे ध्यान में लाया गया, और मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि जांच कानूनी रूप से हो। नियमों के अनुरूप कार्रवाई हो।”
वहीं, सभापति ने जैसे ही नोट मिलने की बात कही, तो विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया।

इस बीच, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “जब तक मामले की जांच चल रही है और कुछ भी स्पष्ट नहीं हो जाता है, तब तक सभापति को अभिषेक मनु सिंघवी का नाम नहीं लेना चाहिए।”
खड़गे के इस बात पर आपत्ति जताते हुए सत्तापक्ष के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर खड़गे ने कहा कि ऐसा ही चिल्लर काम करके इन लोगों ने देश का नाम बदनाम किया है।
खड़गे ने सभापति से कहा कि आप इस तरह से किसी का नाम और उसकी सीट का जिक्र कैसे कर सकते हैं? इस पर सभापति ने कहा कि सीट का जिक्र किया और यह बताया है कि यह सीट किसे अलॉट हुई है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मुद्दा है। यह सदन की गरिमा पर कुठाराघात है। मुझे विश्वास है कि सही जांच होगी। मुझे उम्मीद थी कि विपक्ष के नेता विस्तृत जांच की मांग करेंगे। विपक्ष को हमेशा सद्बुद्धि रखनी चाहिए। दोनों पक्षों को इसकी निंदा करनी चाहिए।”