एनआईए चाहती तो अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को यूएस जाने से रोक लेती?
नई दिल्ली, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों Ukraine Citizen को दिल्ली की एक अदालत ने एक महीने के लिए अपने-अपने देशों में जाने की अनुमति दे दी है, जिसके बाद वैनडाइक शुक्रवार शाम वॉशिंगटन के लिए रवाना हो गया। हालांकि इन सभी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत जांच अभी जारी है, लेकिन अदालत के आदेश में स्पष्ट किया गया कि जांच पूरी करने के लिए इन आरोपियों की तत्काल भारत में भौतिक मौजूदगी जरूरी नहीं है।

अदालत के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर इन सभी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होना होगा और अपना पता, फोन नंबर व ईमेल जैसी संपर्क संबंधी जानकारी देनी होगी। वैनडाइक ने 21 अक्टूबर को भारत लौटने की फ्लाइट बुक की है। लोगों का कहना है कि एनआईए अदालत से अनुरोध तर्क रखती तो शायद वैनडाइक यूएस जाने से रोक लेती।
जांच एजेंसी के अनुसार, वैनडाइक और छह अन्य लोगों पर करीब तीन महीने तक म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों (जैसे चिन नेशनल फ्रंट और काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी) के सदस्यों को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग देने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इन्हें म्यांमार के विद्रोही समूहों से लॉजिस्टिक मदद और फंड मिला था। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि चूंकि कथित गतिविधियां म्यांमार में हुईं, इसलिए वहां से सबूत हासिल किए बिना आतंकी साजिश को निर्णायक रूप से स्थापित करना और यूएपीए जांच पूरी करने की निश्चित समयसीमा तय करना एक चुनौती है।
इससे पहले, इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) द्वारा हर आरोपी पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर मामले का निपटारा कर दिया गया था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें इस कानून के मामलों से डिस्चार्ज कर डिफॉल्ट बेल दे दी थी। तिहाड़ जेल से रिहाई और एफआरआरओ से एग्जिट परमिट मिलने के बाद इनकी वापसी की औपचारिकताएं पूरी की गईं।
वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट और छह यूक्रेनी नागरिकों (हुर्बा पेट्रो, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियान स्टेफानकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिन्स्की) को दिल्ली व लखनऊ एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। इन पर बिना वैध दस्तावेजों के मिजोरम के रास्ते म्यांमार में अवैध रूप से प्रवेश करने का आरोप था। इस बीच, सातों आरोपियों को भारत से बाहर जाने की अनुमति मिलने पर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इस रिहाई की परिस्थितियों और कथित अमेरिकी दबाव की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सरकार से तीखे सवाल किए हैं।