Unrevealed truth analysis behind the conspiracy of NEET paper leak and Union Education minister Dharmendra Pradhan’s forced resignation. How CJP, opposition, separatists, JNU gangs, AAM party, Congress hijacked the system and cornered the Modi Govt. with Anti national forces and Funding. Dharmendra Pradhan is the First education minister who raised voice against corruption in judicial system. He wanted to spread awareness about it- He was criticized for adding a chapter on corruption in Indian Judiciary also. By, Editor in Chief – Divya S Sharma

नीट पेपर लीक बस बहाना
मकसद था धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना

आखिर इस साधारण से केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने ऐसा क्या असाधारण किया था कि पूरा वामपंथ ही नहीं विदेशी राजनीति , मस्जिद चर्च पोप तक हो गया था धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ। क्यों पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया इस समय के सबसे बेहतरीन विचारक शिक्षा सुधारक और उड़ीसा के लाल को। जानिए पीछे की पूरी कहानी
धर्मेंद्र प्रधान जी के इस्तीफे की असली और प्रामाणिक वजह सिर्फ उत्तम प्रदेश न्यूज पर। काकरोच पार्टी सिर्फ एक मुखौटा भर है जिसकी आड़ में परछाई बन एक पूरे वैश्विक पैसा पावर पॉलिसी सिंडिकेट ने काम किया है भारत के शैक्षिक पुनरुत्थान को रोकने के लिए।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान जी के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन, कौशल विकास (Skill Development) को मुख्य शिक्षा धारा से जोड़ने, मातृभाषा और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने तथा डिजिटल और तकनीकी शिक्षा के विस्तार पर मुख्य रूप से काम किया जा रहा था। धर्मेंद्र प्रधान देश का असली इतिहास , प्राचीन गौरव, भारतीय संस्कृति, संघर्ष , सफलता, असली मुद्दों और चुनौतियों की असलियत से रूबरू करवाना चाहते थे।
धर्मेंद्र प्रधान भारत के पहले ऐसे शिक्षा मंत्री हैं जिन्होंने कांग्रेस और अंग्रेजों की बनाई गई कुटिल शिक्षाप्रणाली पर चोट की। पाठ्यक्रम में आधारगत बेहद जरूरी, सत्य और प्रमाण पर आधारित आमूलचूल परिवर्तन करने आरंभ किए। जिनमें भारत देश के वास्तविक इतिहास को पढ़ाना और सामयिक सार्थक शिक्षा – जिसमें सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं कौशल विकास का समायोजन भी हो ऐसे परिवर्तन किए जा रहे थे।

उन्होंने साफ कहा था कि सरकार कभी भी तथ्यों को नहीं बदलेगी ना ही सच को छिपाएगी। जैसे जैसे इन्होंने भारत की शिक्षण व्यवस्था में जरूरी बदलाव करे तभी से ये विपक्ष, वामपंथी झुंडों, चर्च, डीप स्टेट, कट्टरपंथियों और धर्मांतरण गैंग के निशाने पर आ चुके थे। इन पर आरोपों का सिलसिला शुरू कर दिया गया। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि यह प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं इन्हीं सब की कुटिल योजना का हिस्सा हो। मिलीभगत से अंजाम दी गई हों। यह अवश्य ही सीबीआई जांच का एक बेहद जरूरी पहलू हो सकता है।

प्रधान के प्रमुख शिक्षा सुधार और पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का क्रियान्वयन: देश भर के स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नीति के लक्ष्यों को लागू करना।
कौशल विकास का एकीकरण: शिक्षा मंत्रालय के साथ कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का तालमेल बिठाकर व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना। प्रधान ने उच्च माध्यमिक शिक्षा के मॉड्यूल को व्यवसाय आधारित बनाने हेतु काम किया जिससे युवाओं को आजीविका के लिए बेहतर विकल्प चुनने आत्मनिर्भर बनने में मदद मिले सिर्फ किताबी जानकारी से कहीं ज्यादा वो सीखें और प्रैक्टिकल करें।

मातृभाषा और बुनियादी शिक्षा: धर्मेंद्र प्रधान ने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा उनकी अपनी भाषा में सुनिश्चित करने और बुनियादी साक्षरता (NIPUN Bharat) पर जोर दिया। जबकि अभी तक अंग्रेजी को सबके सिर पर थोपा गया था। भारत में रह कर अगर किसी को अंग्रेजी नहीं आए तो उसे नकारा, गँवार और अशिक्षित समान हेय दृष्टि से देखा जाता था।
कांग्रेस ने सभी प्रकार से सरकारी, न्याय, कानून व्यवस्था और संवैधानिक तंत्र को अंग्रेजी के अभेद्य गढ़ में कैद कर के रख दिया था जिसमें पूरा देश , आम नागरिक इस अंग्रेजी प्रेम और एलीट क्लास, लूटियन सेवादार क्लर्क ही बना रहे । कांग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पद पर रहते कभी एक वाक्य भी हिंदी या अन्य भारतीय भाषा में नहीं बोला था जिसे देश समझ पाया हो।

तकनीक और नवाचार: शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल लर्निंग फ्रेमवर्क को मजबूत करना धर्मेंद्र प्रधान जी का नया लक्ष्य था जिस से देश के हर वर्ग, तबके और आयु के लोग दुनिया से कदम मिला कर चलें। तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और उन्नत हों।
प्रधान के सबसे बड़े वो निर्णय जिन्होंने भारत में रह रहे मुस्लिम आक्रांताओं के नाजायज़ वंशजों द्वारा खड़ी की गई झूठे इतिहास की उन मीनारों को गिराने का काम किया जिनकी बुनियाद में भारत के मूल निवासियों के कंकाल और सनातनी सभ्यता के विनाश के निशान दबे थे। प्रधान तभी से भारत और सनातन के दुश्मनों की आँख की किरकिरी बन गए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में ही इतिहास और सामाजिक विज्ञान की किताबों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सरकार का यह तर्क बिल्कुल सही है कि पाठ्यक्रम को हर दस वर्ष के अंतराल पर अपडेट किया जाना चाहिए समय, तकनीक, कौशल विकास के अनुरूप बनाने के लिए नियमित समीक्षा भी की जानी चाहिए। पाठ्यक्रम का मसौदा अधिक सरल बनाने, औपनिवेशिक मानसिकता को हटाने और देश के गुमनाम कर दिए गए जन नायकों को सम्मानजनक स्थान देने के लिए यह कदम उठाए गए हैं।
यह बदलाव पूरी तरह निष्पक्ष दृष्टिकोण रखते हुए किए गए थे उस में देश के सभी राज्यों को समान रूप से स्थान दिया गया था।
पिछली सरकारों में ना सिर्फ भारत के वास्तविक इतिहास और घटनाओं को अंग्रेजों एवं मुस्लिम समाज के तुष्टिकरण के लिए मनमाने ढंग से बदला, छिपाया दबाया था साथ ही सच्चे क्रांतिकारियों को गुमनामी के अंधकार में धकेल कर सिर्फ 2 -3 परिवारों को ही स्वतंत्रता संग्राम का सारा श्रेय दे कर सत्ता और शक्ति पर कब्ज़ा भी कर लिया गया था। ये वो परिवार थे जिन्होंने भारत की जनता का विश्वास हासिल कर भारत के ही साथ धोखा किया और अंग्रेजी कब्ज़े को 100 साल और कायम रखने के लिए ब्रिटिश सरकार के साथ मिलीभगत की ।

खुद अहिंसा का झंडा ले कर सुरक्षित बैठे रहे लेकिन हजारों क्रांतिकारियों की बलि चढ़वाई। संवाद और नेगोसिएशन देश की आजादी को ले कर नहीं बल्कि अपने हाथ में सत्ता के हस्तांतरण को ले कर किए देश का बंटवारा इन्हीं परिवारों की कुटिलता का परिणाम था जिसने देश को कभी ना भरने वाले ज़ख्म दिए। यही परिवार भारत देश को अंग्रेजों से निभाई गई वफादारी में मिला ईनाम समझ भोगते रहे थे। स्वतंत्रता के बाद भी गणतंत्र भारत के नाम को बदल इंडिया कर दिया। और आज तक भारत की अखंडता को चुनौती दे रहे हैं।

अंग्रेजी गुलामी की मानसिकता जो आज तक जारी थी उस पर धर्मेंद्र प्रधान ने चौतरफा प्रहार किया था।
स्वतंत्रता संग्रामी जन नायकों को पहचान और सम्मान दिलाने का प्रयास किया था कि आज की पीढ़ी उनके बलिदान को भूले नहीं। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान द्वारा उठाया गया यह कदम कांग्रेस विपक्ष वामपंथी चर्च डीप स्टेट को नागवार गुजरा और तभी से साज़िशें रची जाने लगी कि इन्हें हटाया कैसे जाए ।
शिक्षा प्रणाली में जोड़े गए वो अध्याय और संशोधन जो विपक्ष वामपंथी वर्ग के गले की हड्डी बने।

आपातकाल (Emergency) का अध्याय: कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में पहली बार 1975-77 के भयानक आपातकाल और उस दौरान नागरिक स्वतंत्रता के हनन व प्रेस पर पाबंदियों के इतिहास को जोड़ा गया ।

मुगल इतिहास का काला सच : इतिहास की किताबों से मुगलकाल के कुछ हिस्सों और शासकों के विवरण को कम किया गया है। इसे लेकर शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि इतिहास को हटाया नहीं जा रहा है, बल्कि संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।
भारत के मूल निवासियों, मूल शासकों और उनके योगदान, सुशासन, प्राचीन और नवीन भारत देश में किए गए निर्माण कार्य, व्यवस्था, शिक्षा, सामाजिक उन्नति के कार्यों को उचित स्थान कभी दिया ही नहीं गया था हर किताब सिर्फ मुस्लिम आक्रांताओं और अंग्रेजों की प्रेम कथा बना कर रख दी गई थी। अभी तक बच्चों को उनकी बर्बरता विलासिता, अत्याचार अनाचार दुराचार, लूट, निर्मम हत्याओं, धर्मांतरण, मंदिरों का ध्वस्तीकरण, महलों और संपत्तियों पर जबरन कब्जे कर उन्हें अपना निर्माण लिखवाना, इत्यादि के बारे में ना बता कर महान शासक लिखवाया गया था।

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में भारत के गुमनाम नायकों और वास्तविक संस्कृति को पाठ्यक्रम में स्थान दिया गया : क्षेत्रीय और कम चर्चित भारतीय योद्धाओं, भारत की गुरु परंपरा, असली स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को पाठ्यक्रम में जगह दी गई ।
सैन्य अभियानों का भी समावेश: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे आधुनिक सैन्य और सामरिक अभियानों के अध्ययन मॉड्यूल को भी स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाया गया है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था- तथ्यों से नहीं होगी छेड़छाड़, सच्चाई रखी जाएगी सामने। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था भारत की आजादी के बाद, इसके इतिहास को 3-4 परिवारों तक सीमित करने का काम किया गया, जबकि भारत का इतिहास के कम से कम 5000 वर्षों का है भारत के हर नागरिक को अपने उद्गम अपने अस्तित्व की विकास यात्रा से जुड़े साक्ष्य / तथ्य जानने का अधिकार है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि सरकार न तो इतिहास बदलना चाहती है ना ही फिर से लिखना बल्कि सभी ऐतिहासिक घटनाओं प्रकरणों की सच्चाईयों को ईमानदारी से सामने लाना ही उनका लक्ष्य है। भारत के गुमनाम जन नायकों के बारे में नई पीढ़ी को बताया जाना चाहिए ।

युवाओं को महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, चाणक्य , भास्कर के बारे में पढ़ने की जरूरत
उन्होंने कहा कि देश का समृद्ध और गौरवशाली इतिहास केवल अंग्रेजों के खिलाफ उसके स्वतंत्रता संग्राम और कुछ राजनैतिक परिवारों तक ही सीमित नहीं है जैसा कि छपवाया जाता रहा है, बल्कि यह सिंधु सभ्यता, बुद्ध और चंद्रगुप्त मौर्य के समय से भी सैंकड़ों वर्ष पीछे जाता है, जिससे भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता साबित होता है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा को समझने के लिए बच्चों को महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, टोडरमल और चाणक्य उनके बारे में भी पढ़ने की जरूरत है।

धर्मेंद प्रधान चाहते थे कि भारत की आजादी के इतिहास को पढ़ते-लिखते समय भी केवल सीमित कालखंड के प्रवास तक केंद्रित न होकर हमें अपने दृष्टिकोण और दायरे को और अधिक व्यापक और उदार बनाने की जरूरत है जिससे आपको सत्य को ले कर कोई संशय ना रहे ।
जिस तरह वामपंथी, आम आदमी पार्टी ने विदेशी फंडिंग के कर कुटिलता से यह हिंसक फ़र्ज़ी आंदोलन का चक्रव्यूह रचा जिसमें भारत की संप्रभुता, अखंडता और प्रधान की शिक्षा नीतियों बदलाव को हिंसक दबाव से आघात किया है इससे भारत सरकार को बेहद सचेत हो जाने की जरूरत है यदि इन जैसी अलगाववादी ताकतों को और हल्के में लिया गया, कड़े कदम नहीं उठाए गए तो ये लोग यहां गृहयुद्ध, नरसंहार तक के हालात पैदा कर देंगे।