Uttar Pradesh. CM Yogi to visit Varanasi on the auspicious occasion of Guru Poornima. उप्र: अनुसूचित जाति जनजाति के 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं मिली आर्थिक सहायता.
Varanasi / वाराणसी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित आगमन, भ्रमण एवं प्रवास कार्यक्रम को लेकर कमिश्नरेट पुलिस ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

-बीते नौ साल में पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना से छात्र-छात्राओं को किया गया सशक्त
-योगी सरकार का लगातार प्रयास, आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में न बने बाधा
लखनऊ, शिक्षा को सामाजिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति व्यवस्था को लगातार मजबूत किया है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से बीते नौ वर्षों में 1.39 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने और वह विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक अपनी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रख सके।

सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कई सुधार किए हैं। ओटीआर, बायोमेट्रिक सत्यापन, एस-कोड वैलिडेशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं से छात्रवृत्ति सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और पात्र विद्यार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचाना आसान हुआ है।
पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2017-18 में 4,16,860 अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को लाभ मिला। इसके बाद 2018-19 में 5,24,426, 2019-20 में 5,41,386, 2020-21 में 3,62,511, 2021-22 में 3,20,390, 2022-23 में 3,86,139, 2023-24 में 3,74,963, 2024-25 में 4,11,797 तथा 2025-26 में 4,39,647 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। वहीं, दशमोत्तर स्तर पर 2017-18 में 12,80,515, 2018-19 में 11,43,804, 2019-20 में 13,60,376, 2020-21 में 8,02,648, 2021-22 में 12,29,471, 2022-23 में 9,42,939, 2023-24 में 10,35,766, 2024-25 में 11,76,281 तथा 2025-26 में 11,54,567 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है।
सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे मजबूत आधार है। छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
समाज कल्याण विभाग उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि, बीते नौ वर्षों में छात्रवृत्ति व्यवस्था में हुए सुधारों ने विद्यार्थियों के बीच शिक्षा के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। सरकार की कोशिश है कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिले और वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपने सपनों को साकार कर सकें।
सीएम के आगमन को लेकर कमिश्नरेट पुलिस अलर्ट, अभेद्य होगी सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस आयुक्त ने दिए सख्त निर्देश

वाराणसी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित आगमन, भ्रमण एवं प्रवास कार्यक्रम को लेकर कमिश्नरेट पुलिस ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सोमवार को अधिकारियों की विस्तृत ब्रीफिंग करते हुए सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सुरक्षित, व्यवस्थित और निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी सतर्कता एवं समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
बैठक में पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि कार्यक्रम स्थल पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सघन जांच और फ्रिस्किंग के बाद ही प्रवेश दिया जाए। कार्यक्रम स्थल एवं वीआईपी मार्ग पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर विशेष नजर रखी जाए तथा सुरक्षा व्यवस्था के प्रत्येक पहलू का सूक्ष्म विश्लेषण कर संभावित जोखिमों का पूर्व आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी इकाइयों को हर समय सक्रिय और तैयार रखा जाए।
पुलिस आयुक्त ने वीआईपी मार्ग को पूरी तरह अवरोधमुक्त रखने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्धारित मार्ग पर किसी भी वाहन की पार्किंग या अनावश्यक ठहराव नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के वाहनों के लिए स्थल के निकट अस्थायी पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही वीआईपी मूवमेंट के सभी निर्धारित रूटों पर आवश्यकता अनुसार क्रेन की उपलब्धता और कार्यक्रम स्थल पर अग्निशमन वाहन व फायर टीम को आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात रखने के निर्देश दिए गए।
भीड़ प्रबंधन को लेकर पुलिस आयुक्त ने “नो टच पॉलिसी” का कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की जांच और सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाएं केवल महिला पुलिसकर्मियों द्वारा ही सुनिश्चित की जाएं। ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को पर्याप्त संख्या में रस्सियां, लाउड हेलर तथा पीए सिस्टम उपलब्ध रखने और उनका प्रभावी उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए।

यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पूर्व निर्धारित रूट डायवर्जन योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने और संभावित जाम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया। साथ ही कार्यक्रम स्थल एवं वीआईपी मार्ग को “नो फ्लाई जोन” घोषित करते हुए ड्रोन सहित किसी भी उड़ने वाली वस्तु के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए। संवेदनशील स्थानों पर रूफटॉप ड्यूटी लगाने तथा कंट्रोल रूम से सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी करने पर भी विशेष बल दिया गया।
पुलिस आयुक्त ने सभी पुलिसकर्मियों को ड्यूटी से पहले आवश्यक ब्रीफिंग, सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश और व्यवहारिक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्धारित समय से पहले उत्कृष्ट टर्नआउट में ड्यूटी स्थल पर पहुंचने को कहा। साथ ही आमजन के साथ विनम्र, शालीन और संवेदनशील व्यवहार बनाए रखने पर भी जोर दिया।
बैठक में अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय शिवहरी मीणा, पुलिस उपायुक्त काशी जोन गौरव बंशवाल, पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन प्रमोद कुमार, पुलिस उपायुक्त गोमती जोन नीतू सहित सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी एवं अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को पूरी सुरक्षा, अनुशासन और बेहतर समन्वय के साथ सफलतापूर्वक संपन्न कराने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
गुरुओं की तपोभूमि को संवार रही सरकार, पर्यटन विकास परियोजनाओं से निखर रहे संत रविदास और देवरहा बाबा के तीर्थ
लखनऊ, गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और ज्ञान परंपरा के सम्मान का पर्व है। उत्तर प्रदेश, जहां ऋषि-मुनियों, संतों और आचार्यों की समृद्ध गुरु परंपरा सदियों से समाज का मार्गदर्शन करती रही है, आज उसी विरासत को नए आयाम मिल रहे हैं। प्रदेश सरकार आध्यात्मिक पर्यटन विकास के माध्यम से गुरु परंपरा से जुड़े मंदिरों, आश्रमों, गुरुद्वारों और संतों की तपोस्थलियों का संरक्षण एवं विकास कर रही है। इससे न केवल सांस्कृतिक विरासत सशक्त हो रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी अपनी गौरवशाली ज्ञान परंपरा से जुड़ रही है।
सनातन परंपरा में यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में ‘व्यास पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है। बौद्ध परंपरा में यह भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश और धर्मचक्र प्रवर्तन का स्मृति-दिवस है। जैन परंपरा में इसका संबंध गौतम स्वामी के ज्ञान-दीक्षा प्रसंग से है। सिख परंपरा में भी गुरु-वाणी सर्वोपरि है। इसीलिए गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा एवं आध्यात्मिक चेतना का सार्वकालिक उत्सव है। प्रभु श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से ज्ञान-संस्कार प्राप्त कर आदर्श जीवन की मर्यादाओं को आत्मसात किया। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में रहकर ज्ञान प्राप्त किया।
गुरुओं की भूमि ‘उत्तर प्रदेश’भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान स्थान दिया गया है। उत्तर प्रदेश को ऋषियों और संतों की भूमि कहा जाता है। महर्षि वाल्मीकि, वेदव्यास, महर्षि भारद्वाज, ऋषि पराशर, महर्षि याज्ञवल्क्य, संत कबीर, रविदास, गोस्वामी तुलसीदास और गुरु गोरक्षनाथ जैसी विभूतियों ने यहीं से भारतीय संस्कृति को दिशा दी। प्रदेश के तीर्थ, आश्रम और धाम आज भी इस गौरवशाली परंपरा के साक्षी हैं। इसी विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में आकार लिया, तो कुछ मूर्त रूप ले रही हैं।
गुरु गोरखनाथ, संत रविदास से देवराहा बाबा तक विकास की श्रृंखलाप्रदेश सरकार द्वारा महोबा के गोरखगिरि पर्वत पर नाथ संप्रदाय के प्रमुख आस्था केंद्र में 11.25 करोड़ रुपए की लागत से 51 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। अमेठी के जायस में गुरु गोरखनाथ की 25 फीट ऊंची योग मुद्रा वाली कांस्य प्रतिमा का निर्माण लगभग 5.95 करोड़ रुपए की लागत से कराया जा रहा है। वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन धाम के पुनर्विकास और विस्तार पर 51.54 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। वहीं, देवरिया में ब्रह्मऋषि देवरहा बाबा आश्रम के पर्यटन विकास पर 2.50 करोड़ रुपए की परियोजना भी प्रगति पर है।
ऋषि आश्रमों के संरक्षण पर विशेष जोर इसी क्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थित ऋषि आश्रमों, तपोस्थलों, गुरुद्वारों और संतों से जुड़े पवित्र स्थलों के पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें फर्रुखाबाद स्थित ऋंगी ऋषि की तपोभूमि ऋंगी रामपुर के लिए 84.39 लाख रुपए, मैनपुरी के मयन ऋषि आश्रम के लिए 16.52 लाख रुपए, जेवर स्थित ज्वाला ऋषि मंदिर के लिए 56.27 लाख रुपए, सहारनपुर के मुंडी खेड़ी स्थित गुरु प्रहलाद दास जी तपोस्थली, शिव मंदिर एवं तालाब के विकास के लिए 118.89 लाख रुपए तथा गोरखपुर के उदासीन ऋषि आश्रम के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास के लिए 142.23 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा, वाराणसी स्थित संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धन में पार्क विकास के लिए 259.76 लाख रुपए, बांदा स्थित ऋषि वेदव्यास की जन्मस्थली के लिए 127.08 लाख रुपए तथा आजमगढ़ के दुर्वासा ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास हेतु 99.21 लाख रुपए की धनराशि खर्च होने हैं। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ स्थित रविदास मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 229.57 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है।
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का प्रयास’उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘गुरु पूर्णिमा आस्था के साथ गुरु परंपरा, ज्ञान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पावन अवसर है। उनके अनुसार प्रदेश सरकार संतों, ऋषियों और गुरुओं से जुड़े स्थलों के संरक्षण के साथ आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ सके।