Indian Defence -सेनाओं को सहयोग देने वाली संस्थाओं को विकसित होते रहना होगा : राजनाथ सिंह

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Defence Minister Shri Rajnath Singh insisted on the consistent growth of supportive agencies for Indian Army. सेनाओं को सहयोग देने वाली संस्थाओं को भी विकसित होते रहना होगा : राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सशस्त्र सेनाओं के साथ-साथ प्रौद्योगिकी, उद्योग, शिक्षाजगत तथा नवाचार तंत्र का जुड़ाव भी लगातार बढ़ रहा है। इसलिए जब हम इतने सारे आयामों पर आगे बढ़ रहे हैं, तो ऐसे में हमारी सशस्त्र सेनाओं को सहयोग देने वाली संस्थाओं को भी निरंतर विकसित होते रहना होगा। वह नई दिल्ली में, सशस्त्र सेना मुख्यालय (एएफएचक्यू) सिविलियन सर्विस दिवस Armed Forces Headquarters AFHQ Civilians Service Day के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि किसी भी सेना को शक्ति केवल हथियारों और गोला-बारूद से ही नहीं मिलती, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी मिलती है, जो हमेशा उसके पीछे उसके सहयोग में खड़े रहते हैं। एएफएचक्यू सिविलियन सेवाएं उन्हीं अदृश्य लेकिन निर्णायक शक्तियों में से एक हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज हमारी सशस्त्र सेनाएं अधिक संयुक्तता और एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा, ”मेरा मानना है कि सैन्य और नागरिक घटकों के बीच भी संयुक्तता और एकीकरण के नए आयामों पर विचार होना चाहिए, ताकि संस्थागत स्मृति, संस्थागत स्थिरता तथा नियमों एवं विनियमों के प्रभावी अनुप्रयोग के साथ रक्षा तंत्र में और अधिक संयुक्तता लाई जा सके। एएफएचक्यू सेवाएं रक्षा मंत्रालय की संस्थागत स्मृति हैं। क्योंकि एएफएचक्यू संवर्ग एक ऐसी संस्था है, जो रक्षा मंत्रालय को निरंतरता, विषयगत विशेषज्ञता तथा नीतिगत स्थिरता प्रदान करता है। इसके साथ ही नागरिक-सैन्य समन्वय को सुदृढ़ करने में भी एएफएचक्यू एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है।”

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि आप अपने दायित्व और भूमिका से आगे बढ़कर रक्षा प्रौद्योगिकी अनुसंधान, भू-रणनीतिक चिंतन तथा नए विचारों के माध्यम से देश के रक्षा तंत्र को और सशक्त बनाने में योगदान दें। आप रक्षा मंत्रालय के स्थायी संवर्ग हैं और आपके पास गहन विषयगत ज्ञान है। इसलिए रक्षा से जुड़े मूल विषयों पर भी आपकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। आज हमारी स्थायी नागरिक रक्षा सेवा पुरानी सोच और पुराने तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रह सकती। उसे भी समय के साथ विकसित होना होगा और नई क्षमताएं विकसित करनी होंगी। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले वर्षों में इस सेवा की पहचान भी उसकी विकसित होती भूमिका, पेशेवर उत्कृष्टता तथा विशेष योगदान को प्रतिबिंबित करे।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमारा प्रयास एएफएचक्यू सिविलियन सेवाओं को धीरे-धीरे रक्षा प्रबंधन के एक पेशेवर संवर्ग के रूप में विकसित करने का होना चाहिए। ऐसा संवर्ग, जो रक्षा क्षेत्र के विभिन्न आयामों को समझता हो, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य कर सके तथा बदलती सुरक्षा और प्रौद्योगिकी संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार अपनी विशेषज्ञता को लगातार उन्नत करता रहे।

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