– UPI / यूपीआई पर नए एमडीआर /MDR नियमों की घोषणा के बाद पेटीएम /PayTM के शेयरों में जोरदार उछाल
– हैदराबाद- केंद्र सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू किया
– आईएमएफ ने की भारत आर्थिक नीतियों और डिजिटल क्रांति की सराहना
नई दिल्ली, यूपीआई पर 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने की आधिकारिक घोषणा के बाद बुधवार को पेटीएम के शेयरों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। बाजार खुलते ही कंपनी का शेयर 7 प्रतिशत से अधिक उछलकर अपने 52 सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि शुरुआती कारोबार के दौरान ऊंचे स्तर पर निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने के कारण शेयर में बाद में कुछ हद तक उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला।

मर्चेंट बिजनेस से अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद, ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान रहेगा पूरी तरह मुफ्त
कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि एनपीसीआई के इस नए सर्कुलर से उसके मर्चेंट बिजनेस को बड़ा वित्तीय लाभ मिलेगा और अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। पेटीएम ने भरोसा दिलाया है कि इस नए एमडीआर शुल्क का कोई भी अतिरिक्त बोझ आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के लिए कमाई का एक नया और मजबूत जरिया बनेगा।
15 अक्टूबर से पूरे देश में लागू होगा नया एमडीआर ढांचा, केवल 2,000 रुपये से ऊपर के व्यापारी लेनदेन पर लगेगा शुल्क
एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, यह नया एमडीआर नियम आगामी 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा, जो केवल 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर ही लागू होगा। इसका मतलब है कि आम नागरिकों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर और 2,000 रुपये तक के सामान्य यूपीआई लेन-देन पहले की भांति पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे और उपयोगकर्ताओं पर किसी प्रकार की मासिक सीमा या प्रतिबंध नहीं होगा।

केंद्र सरकार के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई भुगतानों पर 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वसूला जाएगा, जो पूरे देश में 15 अक्टूबर से लागू होगा। वित्त मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि आम ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 2,000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन या किसी दोस्त-रिश्तेदार को भेजे जाने वाले पर्सन-टू-पर्सन (P2P) भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
ग्राहकों के खातों से नहीं कटेगा एमडीआर चार्ज, केवल कुछ बड़े व्यापारियों और मर्चेंट्स पर ही लागू होगा नियम
सरकार और पेमेंट एंड सेटलमेंट एक्ट की धारा 10A के तहत यह सुरक्षा दी गई है कि ग्राहकों से किसी भी प्रकार का सीधा या छिपा हुआ चार्ज नहीं लिया जाएगा। 2,000 रुपये की सीमा का मतलब यह कतई नहीं है कि 2,001 रुपये का भुगतान करने पर सामान्य ग्राहकों पर बोझ पड़ेगा। इस नए नियम के तहत MDR का भुगतान आम ग्राहक के बजाय केवल संबंधित मर्चेंट या दुकानदारों द्वारा ही बैंकों को किया जाएगा।
लेनदेन को आसान और पारदर्शी बनाने की पहल, डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जारी किए स्पष्ट निर्देश
वित्तीय मामलों के जानकारों के अनुसार, सरकार के इस कदम का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना और मर्चेंट नेटवर्क को मजबूत करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क प्रणाली केवल व्यापारिक लेन-देन (P2M) के दायरे में आने वाले चुनिंदा मर्चेंट्स पर ही प्रभावी होगी, जिससे आम जनता के रोजमर्रा के छोटे-बड़े डिजिटल भुगतान बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के जारी रह सकें।
आईएमएफ ने भारत की आर्थिक नीतियों और डिजिटल क्रांति की सराहना की, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था बताया

नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के उप प्रबंध निदेशक नाइजेल क्लार्क ने अपने पांच दिवसीय भारत दौरे के बाद देश की मजबूत आर्थिक स्थिति की भरपूर सराहना की है। उन्होंने कहा कि ठोस नीतिगत ढांचे और मजबूत बुनियादी ढांचे के दम पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। अपने दौरे के दौरान क्लार्क ने नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आरबीआई गवर्नर और नीति आयोग के उपाध्यक्ष समेत कई प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात कर वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर गहन चर्चा की।
डिजिटल परिवर्तन, तकनीकी विकास और निजी क्षेत्र की ऊर्जा से वैश्विक आर्थिक विकास को मिल रही नई गति
आईएमएफ अधिकारी ने भारतीय निजी क्षेत्र की ऊर्जा, प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की खुलकर प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि देश में हो रहे डिजिटल परिवर्तन और नवाचार से औद्योगिक उत्पादकता में भारी बढ़ोतरी हुई है। भारत में वैश्विक आर्थिक विकास की अगली बड़ी लहर को संचालित करने की पूरी क्षमता मौजूद है, जो देश के सतत और समावेशी विकास को लगातार नई गति प्रदान कर रही है।
भविष्य की चुनौतियों से निपटने और विकास का लाभ हर वर्ग तक पहुँचाने के लिए निरंतर सुधारों पर जोर
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच क्लार्क ने भारतीय नीति निर्माताओं को घरेलू निवेश सुरक्षित रखने, महंगाई पर नियंत्रण और नीतियों में लचीलापन बनाए रखने का सुझाव दिया है। उन्होंने जोर दिया कि युवाओं के कौशल विकास और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग से इस आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा। इसके साथ ही उन्होंने बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति भारत के निरंतर समर्थन के लिए आभार भी जताया।
यूपीआई पेमेंट को लेकर नए स्लैब का ऐलान, 5000 पर 20 और 10000 पर कटेंगे 40 रुपए
मुंबई, 2000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। वहीं 2000 रुपये से ऊपर के अमाउंट पर 0.04% चार्ज देना होगा। यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
यूपीआई से पेमेंट करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। एनपीसीआई ने ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू करने की घोषणा की है। यह नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। हालांकि, इसका सीधा चार्ज ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। यह शुल्क मर्चेंट यानी कारोबारी से लिया जाएगा।
सबसे जरूरी बात यह है कि ₹2,000 तक के यूपीआई पेमेंट पर कोई MDR नहीं लगेगा। वहीं ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा।
किस पेमेंट पर कितना MDR?
₹2,000 तक: कोई MDR नहीं।
₹2,000 से अधिक: 0.4% MDR।
₹5,000 का पेमेंट: 0.4% के हिसाब से ₹20।
₹75,000 या उससे अधिक: MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी। यानी ₹1 लाख के पेमेंट पर 0.4% के हिसाब से ₹400 बनता है, लेकिन अधिकतम सीमा के कारण ₹300 ही MDR होगा।
ग्राहक को देना होगा चार्ज?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाया जाएगा। साथ ही Person-to-Person (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह फ्री रहेंगे। यानी किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने पर यह MDR लागू नहीं होगा।
यह बदलाव मुख्य रूप से Person-to-Merchant यानी P2M भुगतान से जुड़ा है। उदाहरण के लिए किसी दुकान, कारोबारी या अन्य मर्चेंट को ₹5,000 का यूपीआई पेमेंट करने पर MDR मर्चेंट के स्तर पर लागू होगा।
₹2,000 तक यूपीआई रहेगा चार्ज-फ्री
सरकार ने 14 सितंबर की अधिसूचना के जरिए यह भी स्पष्ट किया है कि ₹2,000 तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज नहीं लगा सकते।
वित्त मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यूपीआई यूजर्स से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा और P2P ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे। सरकार के मुताबिक MDR केवल सीमित संख्या में मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।
क्या यूपीआई से पैसे भेजने पर भी शुल्क लगेगा?
अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में यूपीआई के जरिए पैसे भेजते हैं, तो इस MDR का असर नहीं होगा। P2P ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे। MDR का नया ढांचा मुख्य रूप से मर्चेंट को किए जाने वाले पात्र यूपीआई भुगतानों पर लागू होगा।
व्यापारियों पर पड़ेगा असर
नए नियम का सबसे सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा जो ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार करते हैं। ₹5,000 के भुगतान पर 0.4% के हिसाब से ₹20 और ₹50,000 के भुगतान पर ₹200 MDR बनेगा। ₹75,000 के बाद अधिकतम ₹300 की सीमा लागू होगी।
हालांकि, सरकार ने कहा है कि यूपीआई पर MDR सभी मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नहीं लगाया जाएगा और बड़ी संख्या में यूपीआई ट्रांजैक्शन अब भी चार्ज से बाहर रहेंगे।
यूपीआई यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?
आम ग्राहक के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने का तरीका नहीं बदलेगा। QR कोड स्कैन करके या यूपीआई ID के जरिए भुगतान किया जा सकेगा। महत्वपूर्ण अंतर यह है कि ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट भुगतान में MDR की लागत मर्चेंट इकोसिस्टम पर आएगी, ग्राहक पर सीधे नहीं।