American President Trump and President of China Jinping to meet in Beijing. ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका व चीन के शीर्ष वार्ताकार अंतिम तैयारी बैठक करेंगे
बीजिंग, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा और उनके अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली शिखर बैठक से पहले, दोनों देशों के शीर्ष वार्ताकार शनिवार से वाशिंगटन में अंतिम तैयारी-संबंधी बातचीत करेंगे, जिसमें शुल्क का मुद्दा भी शामिल होगा। यहां वाणिज्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने बताया कि चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग 19 से 23 सितंबर तक वाशिंगटन जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वहां दोनों पक्ष शी और ट्रंप के बीच बनी सहमति के आधार पर आपसी हित के आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
ये बातचीत अगले हफ्ते शी के वाशिंगटन दौरे से पहले हो रही है। हालांकि बीजिंग ने अभी तक इस दौरे की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अमेरिकी मीडिया की खबरों में कहा गया है कि शी के 23 सितंबर को पहुंचने और अगले दिन ट्रंप से मिलने की उम्मीद है।
हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की पिछली खबर के अनुसार, ट्रंप की योजना है कि जब चीनी राष्ट्रपति ‘जॉइंट बेस एंड्रयूज’ पहुंचेंगे, तो वे खुद वहां जाकर उनका स्वागत करेंगे।
दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात मई में बीजिंग में ट्रंप की यात्रा के दौरान हुई थी, जब उन्होंने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंध बेहतर बनाने के मकसद से बातचीत की थी।

उप-प्रधानमंत्री हे, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ शुल्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत कई मुद्दों पर बातचीत करने वाले हैं।
बेसेंट ने बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि वह उपप्रधानमंत्री हे से मिलने और अपनी “बहुत अच्छी निजी बातचीत” को जारी रखने के लिए उत्सुक हैं।
चीन और भारत समेत जो देश रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, उन पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने वाले नए प्रतिबंध विधेयक पर ट्रंप के हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद ये बातचीत अहम हो गई है।
ट्रंप ने शुक्रवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया। यह कानून रूस और उसके ऊर्जा उत्पादों को खरीदने वाले देशों के खिलाफ और ज्यादा प्रतिबंध लगाने और शुल्क लागू करने की इजाजत देता है।
चीन ने रूसी तेल और गैस की उसकी खरीद पर शुल्क लगाने की अमेरिकी कोशिशों को खारिज कर दिया है। चीन का कहना है कि देशों के बीच सामान्य व्यापारिक सहयोग में किसी तीसरे पक्ष का दखल नहीं होना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से कहा, “चीन समानता और आपसी फायदे के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग करता है।”
उन्होंने कहा, “इस तरह का सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और यह किसी भी बाहरी दखल या दबाव से मुक्त होना चाहिए। चीन अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर अधिकार जताने और एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी भी हासिल नहीं है।”
अमेरिका ने इरिट्रिया की सत्ताधारी पार्टी, सेना पर लगे प्रतिबंध हटाए
अदिस अबाबा, अमेरिका ने इरिट्रिया की सत्ताधारी पार्टी और सेना पर लगाए गए उन प्रतिबंधों को हटा लिया है, जिन्हें पिछली बाइडन सरकार ने लागू किया था। अमेरिकी वित्त विभाग की तरफ से यह जानकारी दी गई।
उत्तरी इथियोपिया के तिग्रे इलाके में हिंसक संघर्ष के दौरान मानवीय और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं को देखते हुए 2021 में ये प्रतिबंध लगाए गए थे। नवंबर 2022 में एक शांति समझौते के बाद यह संघर्ष खत्म हुआ था। इस संघर्ष में इरिट्रिया की सेना ने तिग्रे की क्षेत्रीय सरकार के प्रति वफादार लड़ाकों के खिलाफ इथियोपियाई सैनिकों का साथ दिया था।
उत्तरी इथियोपिया में, जिसमें पड़ोसी इलाके अमहारा और अफार भी शामिल हैं, बहुत से लोगों को अपने घरों से बेघर होना पड़ा और माना जाता है कि हजारों लोग मारे गए।
मंत्रालय के ‘विदेशी संपदा नियंत्रण कार्यालय’ ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इरिट्रिया के कुछ लोगों पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं, जिनमें एक अहम वित्तीय अधिकारी हागोस गेब्रेहिवट भी शामिल हैं। सत्ताधारी पार्टी से जुड़ी ‘रेड सी ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन’ पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए गए।
इरिट्रिया के सूचना मंत्री येमाने गेब्रेमेस्केल ने कहा कि ये प्रतिबंध बेबुनियाद थे और इनसे उनके देश को काफी नुकसान पहुंचा।
गेब्रेमेस्केल ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, “इस मामले में, हम ट्रंप प्रशासन के इस कदम और सुधारात्मक उपायों का स्वागत करते हैं।”
ग्रीनलैंड समझौते को लेकर ट्रंप की घोषणा पर डेनमार्क के नेताओं की सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया
कोपेनहेगन, डेनमार्क की सरकार ने ग्रीनलैंड को लेकर एक समझौते के संबंध में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई घोषणा पर शनिवार को सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया व्यक्त की।
इस समझौते से ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की उपस्थिति मजबूत होगी, लेकिन द्वीप पर डेनमार्क का ही नियंत्रण रहेगा। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने उत्तर अटलांकिट संधि संगठन (नाटो) में शामिल सहयोगी देश डेनमार्क के इस अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र पर कब्जा करने की धमकियां दी थीं।
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि यह समझौता अमेरिका को ‘ग्रीनलैंड में सुरक्षा और अन्य सभी आवश्यकताओं पर स्थाई नियंत्रण देगा, जिससे अमेरिका की सभी चिंताओं का पूरी तरह से समाधान हो जाएगा।’
शुक्रवार को ही डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के कार्यालय ने कहा कि इस समझौते पर अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान तीनों सरकारों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे, लेकिन इसे लागू करने से पहले डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों द्वारा संसदीय कार्रवाई की अभी भी आवश्यकता है।
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने शनिवार सुबह इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘अगला सप्ताह ग्रीनलैंड, डेनमार्क और अमेरिका सभी के लिए एक अच्छा सप्ताह हो सकता है।’