Republic Day -भारत की कामयाबी की झांकी

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विदेश मंत्रालय की झांकी में दिखी जी20 सम्मेलन में भारत की कामयाबी की कहानी

गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में शुक्रवार को विदेश मंत्रालय की कई उपलब्धियों को दर्शाया गया जिनमें जी20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी और इस शक्तिशाली समूह की अध्यक्षता के दौरान भारत की कामयाबियां प्रमुख रूप से शामिल रहीं।

विदेश मंत्रालय की झांकी में वैश्विक मुद्दों का महत्वाकांक्षी, निर्णायक, समावेशी और कार्रवाई उन्मुख तरीके से समाधान करने की दिशा में भारत के नेतृत्व को दर्शाया गया।

इसमें पिछले वर्ष भारत की जी20 अध्यक्षता के सफल समापन और उसकी उपलब्धियों को भी दर्शाया गया है।

झांकी के सामने वाले हिस्से में नालंदा महाविहार को दर्शाया गया, जिसके ऊपर G20 का लोगो लगा हुआ था।

अफ़्रीकी संघ को जी20 का पूर्ण सदस्य बनाने को लेकर भारत की अध्यक्षता में लिए गए निर्णय को ”नमस्ते” मुद्रा में हाथ जोड़कर दर्शाया गया। एक हाथ में भारतीय ध्वज और दूसरे में अफ्रीकी संघ का झंडा दिखाया गया।

गणतंत्र दिवस: सीएसआईआर की झांकी में दिखी ‘बैंगनी क्रांति’ की झलक

जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में हो रही ‘बैंगनी क्रांति’ को शुक्रवार को गणतंत्र दिवस परेड में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की झांकी में महत्पपूर्ण स्थान मिला।

सीएसआईआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया ‘बैंगनी क्रांति’ भारत की वैज्ञानिक शक्ति और भद्रवाह व आसपास के क्षेत्रों के उन किसानों की मेहनत की भावना को प्रदर्शित करती है, जो पिछले कुछ वर्षों में उद्यमी बन गए हैं।

लैवेंडर के फूलों से सजी मनमोहक झांकी जम्मू में सीएसआईआर-‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन’ में लैवेंडर की एक विशिष्ट किस्म के विकास, इसकी खेती और तेल, इत्र एवं अगरबत्ती बनाने के लिए इसके प्रसंस्करण की कहानी बयां कर रही थी।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने अक्सर ‘बैंगनी क्रांति’ को लैवेंडर को प्रयोगशाला से बाजार तक ले जाने और भारत में कृषि-स्टार्टअप की एक नई संस्कृति को विकसित करने के एक उदाहरण के तौर पर पेश किया है।

सीएसआईआर की झांकी में सीएसआईआर तथा ‘सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, दुर्गापुर’ द्वारा विकसित भारत के पहले महिला-अनुकूल कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का भी प्रदर्शन किया गया।

झांकी में लैवेंडर के फूलों से तेल निकालने की इकाई को भी प्रदर्शित किया गया।

लैवेंडर तेल कम से कम 10,000 रुपये प्रति लीटर की दर से बिकता है।

झांकी में विश्व में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को भी दर्शाया गया।

झांकी के किनारों पर डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और मोटे अनाज के साथ हरित विकास में भारत की सफलता को भी दर्शाया गया।

इसमें भारत मंडपम का भी प्रदर्शन किया गया जहां भारत की अध्यक्षता में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था और ‘नई दिल्ली बयान’ को सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया था।

गणतंत्र दिवस परेड के विशेष मेहमान में शामिल रहे ‘वीरगाथा’ के ‘सुपर 100’ विजेता

गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में शुक्रवार को ‘वीरगाथा’ के तीसरे संस्करण के ‘सुपर 100’ विजेता विशेष अतिथियों में शामिल थे।

‘वीरगाथा’ का तीसरा संस्करण पिछले साल 13 जुलाई से 30 सितंबर के बीच आयोजित किया गया था।

देश भर के 2.42 लाख स्कूलों के रिकॉर्ड 1.36 करोड़ छात्रों ने निबंध, कविताओं, चित्रों और मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रेरणादायक कहानियां साझा की थीं।

‘प्रोजेक्ट वीरगाथा’ को 2021 में वीरता पुरस्कार पोर्टल (जीएपी) के तहत शुरू किया गया था ताकि छात्रों के बीच देशभक्ति की भावना को बढ़ाने और उनमें नागरिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए वीरता पुरस्कार विजेताओं की बहादुरी के कारनामों और उनके जीवन के बारे में विवरण प्रसारित किया जा सके।

सीपीडब्ल्यूडी की झांकी में दिखी ‘आत्मनिर्भर भारत’, नए संसद भवन और कर्तव्य पथ की झलक

गणतंत्र दिवस परेड में शुक्रवार को रंग-बिरंगे फूलों से सजी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की झांकी में कर्तव्य पथ, नए संसद भवन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के मॉडल के साथ आधुनिक, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की झलक देखने को मिली।

देश के 75वें गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान प्रदर्शित 26 झांकियों में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की झांकी भी शामिल थी।

झांकी के सामने सलामी की मुद्रा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक प्रतिमा थी जबकि मध्य भाग में नवनिर्मित कर्तव्य पथ को चित्रित किया गया था।

झांकी के पिछले हिस्से में नए संसद भवन को दिखाया गया था। झांकी के दोनों ओर भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर के मॉडल भी मौजूद थे।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की झांकी में सागरमाला कार्यक्रम की उपलब्धियां दिखाई गईं

गणतंत्र दिवस के अवसर पर पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की झांकी में सागरमाला कार्यक्रम के जरिए बंदरगाह नीत विकास और समुद्री क्षेत्र में ‘नारी शक्ति’ को मजबूत करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया।

मंत्रालय के इस महात्वाकांक्षी कार्यक्रम ने ‘टर्न-अराउंड’ समय को कम करने में मदद की है जिससे बंदरगाहों पर कार्गो प्रबंधन दक्षता बढ़ी है। जहाजों को बंदरगाहों के निकट पहुंचने और उसके बाद सामान उतारने तक लगने वाले समय को ‘टर्न-अराउंड’ समय कहा जाता है।

झांकी में महिलाओं को अवसर प्रदान करने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाया गया। पिछले नौ वर्षों में महिला नाविकों की संख्या में 1,100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

यह समुद्री अर्थव्यवस्था को चलाने वाली ‘नारी शक्ति’ को प्रदर्शित करती है, जो मंत्रालय की ‘सागर-सम्मान’ पहल का आधार है।

झांकी के मध्य भाग में सागरमाला कार्यक्रम के तहत बंदरगाह आधुनिकीकरण पहल के माध्यम से बंदरगाह दक्षता और क्षमता वृद्धि की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।

इससे प्रमुख बंदरगाहों पर क्षमता 800 एमटीपीए से दोगुनी होकर 1,617 एमटीपीए हो गई है।

गणतंत्र दिवस परेड में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों से लेकर सरपंचों तक 13,000 विशिष्ट मेहमान हुए शामिल

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों से लेकर सरपंचों तक और उद्यमियों से लेकर विक्रेताओं तक करीब 13,000 विशिष्ट अतिथियों ने शुक्रवार को यहां कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया।

‘सच्चे वीआईपी’ कहे जाने वाले इन विशेष आमंत्रित मेहमानों में विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों के साथ सरकार की विभिन्न योजनाओं का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करने वाले लोग शामिल रहे।

इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण और शहरी), पीएम उज्ज्वला योजना, पीएम पथ विक्रेता की आत्मनिर्भरता निधि (पीएम स्वनिधि), पीएम कृषि सिंचाई योजना, पीएम फसल बीमा योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और राष्ट्रीय गोकुल मिशन आदि शामिल हैं।

‘जीवंत गांवों’ के सरपंच, स्वच्छ भारत अभियान, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र और सेंट्रल विस्टा परियोजना की महिला कर्मी, इसरो की महिला वैज्ञानिक, योग शिक्षक (आयुष्मान भारत), अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के विजेता और पैरालंपिक पदक विजेता भी आमंत्रित लोगों में शामिल रहे।

गणतंत्र दिवस: भारतीय वायुसेना, नौसेना की झांकियों में ‘नारी शक्ति’, ‘आत्मनिर्भरता’ की झलक दिखी

देश के 75वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं ने ‘नारी शक्ति’ और ‘आत्मनिर्भरता’ की विषय वस्तु पर आधारित अपनी झांकियों में अपनी संपत्तियों और भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

भारतीय नौसेना की झांकी में जहाज निर्माण में भारत की बढ़ती शक्ति को उजागर करते हुए स्वदेशी रूप से निर्मित विमान वाहक आईएनएस विक्रांत और अत्यधिक सक्षम एस्कॉर्ट पोत आईएनएस दिल्ली, आईएनएस कोलकाता और आईएनएस शिवालिक, एलसीए, एएलएच और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी को दर्शाया गया।

नौसेना की झांकी की विषयवस्तु ‘नारी शक्ति’ और ‘आत्मनिर्भरता’ रही।

गणतंत्र दिवस समारोह की एक आधिकारिक पुस्तिका में झांकी के बारे में कहा गया कि नौसेना द्वारा सभी भूमिकाओं और रैंक में महिलाओं का स्वागत करने की हालिया घोषणा वास्तव में प्रगतिशील भारत का प्रतीक है।

नौसेना बैंड ने बल की ताकत और युद्ध की तैयारी का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘हम तैयार हैं’ की धुन बजाई जिस पर 144 पुरुष एवं महिला अग्निवीर समेत युवा नौसैनिकों की टुकड़ी ने मार्च किया।

भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की टुकड़ी में स्क्वाड्रन लीडर रश्मि ठाकुर के नेतृत्व में 144 वायु सैनिक और चार अधिकारी शामिल हुए। स्क्वाड्रन लीडर सुमिता यादव, प्रतीति अहलूवालिया और फ्लाइट लेफ्टिनेंट कीर्ति रोहिल ने दल कमांडर के पीछे अतिरिक्त अधिकारियों के रूप में मार्च पास्ट किया। वायु सेना की झांकी ‘भारतीय वायु सेना: सक्षम, सशक्त, आत्मनिर्भर’ विषय वस्तु पर आधारित रही।

वायु सेना बैंड में तीन ड्रम प्रमुख और 72 संगीतकार शामिल हुए। उन्होंने ‘साउंड बैरियर क्विक मार्च’ बजाया।

झांकी के अग्रभाग में सी-295 परिवहन विमान को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया जिसके कॉकपिट में सवार दो महिला वायु सेना कर्मी उसे चलाती दिखीं।

झांकी के विवरण में कहा गया कि आईएएफ गरुड़ कमांडो की उपस्थिति हवा के साथ-साथ जमीन पर भी वायु सेना की लड़ाकू क्षमताओं में वृद्धि का प्रतीक है।

झांकी के मध्य भाग में आईएएफ तेजस और एसयू-30 को हिंद महासागर क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरते हुए दिखाया गया, जो वायु सेना की जमीन और समुद्र में भी बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।

झांकी के पिछले हिस्से में भारतीय वायुसेना द्वारा देश ओर विदेश में प्रदान की गई मानवीय सहायता को दर्शाया गया।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों इस भव्य समारोह के मुख्य अतिथि हैं। इस समारोह का मकसद देश की महिला शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों को पेश करना है।

सशस्त्र बलों ने परेड में मिसाइलों, ड्रोन जैमर, निगरानी प्रणाली, वाहन पर लगे मोर्टार और बीएमपी-द्वितीय पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों जैसे घरेलू हथियारों और सैन्य उपकरणों की एक श्रृंखला का प्रदर्शन किया।

पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करते हुए सभी महिलाओं की त्रि-सेवा टुकड़ी आकर्षण का केंद्र बनी।

इतिहास में पहली बार, लेफ्टिनेंट दीप्ति राणा और प्रियंका सेवदा ने कर्तव्य पथ पर परेड में हथियार का पता लगाने वाले ‘स्वाति’ रडार और पिनाका रॉकेट प्रणाली का नेतृत्व किया। लेफ्टिनेंट दीप्ति राणा और प्रियंका सेवदा पिछले साल आर्टिलरी रेजिमेंट में नियुक्त हुई 10 महिला अधिकारियों में से हैं।

मैकेनाइज्ड कॉलम में टैंक टी-90 भीष्म, नाग (एनएजी) मिसाइल सिस्टम, पैदल सेना का लड़ाकू वाहन, सभी क्षेत्रों में संचालन योग्य वाहन, पिनाका, हथियार का पता लगाने वाली रडार प्रणाली ‘स्वाति’, ड्रोन जैमर प्रणाली, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली आदि मुख्य आकर्षण रहे।

मैकेनाइज्ड कॉलम का नेतृत्व करने वाली पहली सेना टुकड़ी 61 कैवेलरी (घुड़सवार सेना) थी, जिसका नेतृत्व मेजर यशदीप अहलावत ने किया। वर्ष 1953 में स्थापित 61 घुड़सवार सेना दुनिया की एकमात्र सेवारत सक्रिय घुड़सवार सेना है।

छत्तीसगढ़ की झांकी में दिखी आदिवासी परंपरा ‘मुरिया दरबार’ की झलक

गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित परेड में शुक्रवार को यहां छत्तीसगढ़ की झांकी में राज्य के बस्तर क्षेत्र में सामुदायिक स्तर पर निर्णय लेने की 600 साल पुरानी आदिवासी परंपरा ‘मुरिया दरबार’ को दर्शाया गया।

‘मुरिया दरबार’ प्राचीन काल से आदिवासी समुदायों में मौजूद लोकतांत्रिक चेतना और पारंपरिक लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है और साथ ही भारत में लोकतंत्र की उत्पत्ति और विकास की कहानी भी प्रस्तुत करता है।

झांकी में बस्तर में संसद के प्राचीन आदिवासी स्वरूप को दर्शाया गया है जिसे ”मुरिया दरबार” के नाम से जाना जाता है।

”मुरिया दरबार” की परंपरा 600 वर्ष से अधिक पुरानी है और प्रसिद्ध ”बस्तर दशहरा” का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

कुछ साक्ष्यों से पता चलता है कि ”मुरिया दरबार” की परंपरा बहुत ही पुरानी है।

झांकी में बस्तर की प्राचीन राजधानी बड़े डोंगर में स्थित ”लिमऊ राजा” नामक स्थान को दर्शाया गया है।

लोककथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में जहां राजा नहीं होते थे, वहां आदिवासी समुदाय पत्थरों से बने सिंहासन पर नींबू रखकर आपस में निर्णय लेते थे। इस परंपरा ने आगे चलकर ”मुरिया दरबार” का रूप ले लिया।

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