Justice For Delhi Police
संसद में चर्चा होनी चाहिए तथा उनके पक्ष को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए
-More than 250 police officials of Delhi police and RAF jawans got injured badly in the CJP sponsored and organised massive violence on the first day of Parliament’s Monsoon session in Delhi. CJP protestors who were not students in any means but skilled history-sheeter criminals, political parties like Congress, Aam admi party, Congress supported NSUI, JNU separatists, Jamia and paid influencers from various cities / abroad, leftists, AAM Admi party workers, Tukde Tukde gang members and anti India, Anti Govt. Anti Hindu groups were actively involved from the day one at the protest site. These gangs of goons and criminals insulted, attacked and abused police and Jawans posted on duty. But they maintained discipline, peace and patience, not a single policeman or Jawan reacted to any of their disrespectful behaviour foul words. tarnished the image of Govt. police and Army.

On July 20th when the mob started to breakin to the Parliament and started pelting stones, lathis, swords that they brought along in trucks and crossed the barricades. Police requested them to stop and go back to Jantar Mantar area. But mob attacked as per the planning tried to burn down the police vehicles. At the same time brutally attacked Lynched the Jawans, policeman on duty. Media personals were attacked too. But these CJP riots experts have filed complaint against Delhi police and now forcing court to set all these goons and Lynchers free. they are demanding total clean chit to these criminals / Future Criminals.

250 policeman who got badly injured are also have a family behind like we all have. And they were on duty trying to talk and pacify these criminals to avoid any threatening situation when they got attacked. But these injured police and jawans are mis-portrayed as villains on social media by CJP’s promotion toolkit team. Today children of these injured policeman held a press conference to share their pain and agony that this illegal violent protest caused to them and their family members.
Justice For Delhi Police
नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस के घायल कर्मियों के परिवार वालों ने शुक्रवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में पत्रकार वार्ता कर 20 और 25 जुलाई को कोकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुए क्रूर हमलों का ब्योरा दिया। एक सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने बताया कि कैसे असामाजिक तत्वों ने छात्रों का साथ दिया और उसके पिता को बैरिकेड से खींचकर घंटों तक बेहोश छोड़ दिया। एक सहायक आयुक्त की पत्नी ने अपने पति के घर लौटने को अपने और अपनी दो साल की बेटी के लिए दर्दनाक रात बताया। जबकि एक अन्य महिला ने बताया कि उनके पति के हेलमेट को पत्थरों और गमलों से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।

दिल्ली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में घायल हुए दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर की बेटी का कहना था, “25 तारीख को, मेरे पिता को उपद्रवियों की भीड़ ने खींच लिया और जंतर-मंतर पर मंच के पास लगभग पीट-पीटकर मार डाला। यह घटना 25 जुलाई को दोपहर लगभग 2:00 बजे हुई। वे आरएमएल अस्पताल में लगभग चार घंटे तक बेहोश रहे। रात लगभग 10:00 बजे, उनके साथी उन्हें घर लाए। उनकी वर्दी पूरी तरह से खून से सनी हुई थी। उन्हें उस हालत में देखना हमारे लिए बेहद दर्दनाक था।“
Justice For Delhi Police
उसने कहा कि दुख के साथ उन्होंने फैसला किया कि उन्हें भी अपने पिता के लिए न्याय मांगना चाहिए। उन्हें अन्य पुलिसकर्मियों के परिवारों से समर्थन मिला और वे सुप्रीम कोर्ट गए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना मामला पेश करने के लिए एक वकील से अनुरोध किया। वकील ने उन्हें आश्वासन दिया कि देश के नागरिक होने के नाते उन्हें भी समान अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें भी न्याय मिलेगा।
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सुनाई आपबीती, संसद में मुद्दा उठाने की मांग
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच हुई झड़प में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन कर अपनी पीड़ा साझा की। परिजनों ने कहा कि ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की स्थिति पर भी संसद में चर्चा होनी चाहिए तथा उनके पक्ष को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
घायल एक सहायक पुलिस आयुक्त की पत्नी ने बताया कि 20 जुलाई की देर रात जब उनके पति घायल अवस्था में घर लौटे तो वह उनके परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक और भावनात्मक क्षण था। उन्होंने कहा कि दो वर्ष की उनकी बेटी भी पिता की स्थिति देखकर सहम गई थी। उन्होंने कहा कि ड्यूटी निभाते हुए पुलिसकर्मियों को जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, उसे भी समाज के सामने आना चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुंजन ने बताया कि उनके पिता पहले भारतीय नौसेना में कार्यरत थे और बाद में दिल्ली पुलिस में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर उनकी तैनाती अग्रिम पंक्ति में थी। उनके अनुसार झड़प के दौरान उनके पिता गंभीर रूप से घायल हुए और कई घंटे तक अचेत रहे। गुंजन ने बताया कि उनके पिता के सिर पर टांके आए थे, लेकिन उन्होंने घर लौटकर भी यही कहा कि ड्यूटी के दौरान ऐसी चोटें लग जाती हैं।
गुंजन ने कहा कि जब उन्हें जानकारी मिली कि घटना से जुड़े कुछ लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, तब उन्होंने भी अपने परिवार की ओर से याचिका दायर की। उनका कहना था कि पुलिसकर्मी भी समाज का हिस्सा हैं और उनके अधिकारों तथा पीड़ा को भी न्यायिक और सार्वजनिक विमर्श में स्थान मिलना चाहिए।
एक अन्य घायल पुलिसकर्मी की पत्नी सीमा ने बताया कि उनके पति दिल्ली पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक हैं और 33 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को ड्यूटी के दौरान भीड़ अत्यधिक उग्र हो गई थी। उनके अनुसार उनके पति ने बताया कि बैरिकेड तोड़ने के प्रयास हुए और पुलिसकर्मियों पर पत्थर, जूते तथा अन्य वस्तुएं फेंकी गईं, जिससे कई जवान घायल हो गए।
सीमा ने कहा कि उनके पति का सुरक्षा हेलमेट भी क्षतिग्रस्त हो गया था। यदि उसके बाद कोई पत्थर सीधे सिर पर लगता तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे। उन्होंने कहा कि जब तक उनके पति सुरक्षित घर नहीं लौटे, पूरा परिवार चिंता और भय में रहा।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि संसद में केवल प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों की ही नहीं, बल्कि ड्यूटी निभाते हुए घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की समस्याओं पर भी चर्चा की जाए। उनके अनुसार पुलिसकर्मी देश की आंतरिक सुरक्षा और संसद की सुरक्षा के लिए लगातार जोखिम उठाते हैं।
घायल एक सहायक पुलिस आयुक्त के पुत्र लक्ष्य ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पिता को वीडियो में घायल अवस्था में देखा, जिससे पूरा परिवार चिंतित हो गया। उनके अनुसार उनके पिता ने बताया कि प्रदर्शन में कुछ शरारती तत्व शामिल हो गए थे, जिन्होंने बिना किसी उकसावे के पुलिस पर हमला किया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों का पक्ष भी समान रूप से सामने आना चाहिए और घायल जवानों के अधिकारों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस घटना में कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले को लेकर न्यायालय में भी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई जारी है, जबकि घटना को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर बहस अभी भी जारी है।