Special Report – विश्व के लिए एक बड़ा संदेश है सदी के 2 महानायकों का एक साथ आना 

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Russian President Vladimir Putin is on India Tour. This Diplomatic yet Private visit have brought many historical pacts between India and Russia. भारत रूस के बीच ऐतिहासिक मसौदे। पुतिन दोस्त मोदी के मुरीद।

ड्रैगन और पाखानिस्तानी खेमे में जुलाब की खबर। ट्रॉमा में ट्रंप 

कनेडा के खाली खालिस्तानियों का खेल खत्म करेगा रूस। 

भारत और रूस की दोस्ती सात दशक पुरानी है। दो दोस्तों ने, इतने लंबे वक्त तक, कई तूफानों और इम्तिहानों के बावजूद, दोस्ती को बरकरार रखा है, यकीनन यह एक मिसाल है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के प्रवास पर हैं। वह अपने साथ दोस्ती की नई पेशकशें और आयाम लेकर आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के 5 दिसंबर को शिखर, द्विपक्षीय संवाद के बाद जो साझा बयान जारी किया जाएगा और जिन समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, उनके बाद दोस्ती, सहयोग, समर्थन नई ऊंचाइयां छुएंगे।

हिंद-रूस दोस्ती जिंदाबाद

राष्ट्रपति पुतिन ने भी रूस से यात्रा आरंभ करने से पूर्व इसी आशय का बयान दिया था। दरअसल रूस भारत को ऐसे ‘रणनीतिक साझेदार’ के रूप में स्वीकार करना चाहता है, जिसकी साझेदारी असीम, निस्सीम अर्थात् सीमारहित हो। कोई सीमा नहीं, रूस और चीन की साझेदारी ऐसी है। रूस भारत को भी उन्हीं समीकरणों में देखना चाहता है। राष्ट्रपति पुतिन ने अपनी इच्छा फिर दोहराई है कि रूस, भारत, चीन को एक ‘तिकड़ी’ बन जाना चाहिए। वह ‘तिकड़ी’ अमरीका से मुकाबला करने में सक्षम और सशक्त साबित होगी। बेशक पुतिन की यह इच्छा विचारणीय है, क्योंकि रूस पर अकेले अमरीका ने ही करीब 6500 पाबंदियां थोप रखी हैं।

रूस पर कुल 26, 000 के करीब प्रतिबंध हैं। फिर भी रूस दबाव में नहीं है। उसका अस्तित्व यथावत है। उसकी अर्थव्यवस्था को ज्यादा धक्के नहीं लगे हैं। भारत और चीन ने रूस से कच्चा तेल खरीद कर उसकी आर्थिक मदद ही की है। हालांकि भारत ने अब यह खरीद एक-तिहाई कर दी है। कारण अमरीका का दबाव ही नहीं है। रूस यूक्रेन और परोक्ष रूप से अमरीका, यूरोप, नाटो देशों के खिलाफ लगातार युद्ध लड़ रहा है। रूस से कच्चा तेल लेने के कारण ही अमरीका ने भारत पर, जुर्माने के रूप में, 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ थोपा था। भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी है। अमरीका चीन को भी टैरिफ की धमकियां देता रहा है। बहरहाल रूस भारत को ‘असीमित’ रणनीतिक साझेदार के रूप में देखना चाहता है।

रूसी संसद ने ‘रेलोस’ समझौते को भी मंजूरी दी है। उसके तहत भारत रूस के एयरबेस, नौसेना पोर्ट, युद्धपोत, सैन्य बल एवं साजो सामान, फ्यूल, संसाधन आदि इस्तेमाल कर सकेगा। रूस के 5 युद्धपोत, 10 सैन्य विमान, 3000 सैनिक आगामी 5 साल के लिए भारतीय जमीन पर तैनात किए जा सकेंगे। भारत की इतनी ही सैन्य ताकत रूसी जमीन पर तैनात होगी। यह समझौता ‘रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट’ (आरईएलओएस) है, जो रूसी संसद में पारित किया गया है। इससे भारत और रूस दो देश तो रहेंगे, लेकिन उनकी सैन्य-शक्ति ‘एकाकार’ हो जाएगी, जिसे सोच कर ही दुश्मन कांपने लगेगा। बेशक दुश्मन की शक्ति कमजोर पड़ेगी। यही नहीं, भारत-रूस के बीच ‘नागरिक परमाणु करार’ भी होगा।

भारत का ऐसा करार सिर्फ अमरीका और फ्रांस के साथ है। रूस पहले ही भारत में 1000 मेगावाट प्रति के चार परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की प्रक्रिया में है। इससे भारत में परमाणु ऊर्जा की क्षमता बढ़ेगी। भारत ने निजी निवेश के लिए भी यह क्षेत्र खोलने का निर्णय लिया है। महत्वपूर्ण यह भी है कि रूस सुखोई-57 जैसा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान भी भारत को मुहैया करना चाहता है और इसकी प्रौद्योगिकी भी देना चाहता है, ताकि इन लड़ाकू विमानों का उत्पादन भारत में ही किया जा सके।

भारत अब एस-500 एंटी मिसाइल सिस्टम रूस से चाहता है, जबकि रूस ने ही हमें एस-400 प्रणाली दी थी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान के एक भी हवाई हमले को कामयाब नहीं होने दिया। अब ‘ब्रह्मोस’ की अगली पीढ़ी का उत्पादन भारत में ही होगा, वह दोनों देशों का उपक्रम होगा। बहरहाल राष्ट्रपति पुतिन भारत में हैं, तो मोदी से बातचीत में कई मुद्दे उठेंगे।

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