Justice for Bharat Tiwari – After the brutal fake encounter by Bihar police of social activist, Gau rakshak sanatani Bharat Tiwari locals have demanded CBI investigation in this matter. भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर दिबियापुर में निकला कैंडल मार्च, सीबीआई जांच की उठी मांग
औरैया, उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में दिबियापुर मंडी गेट सहायल रोड से फफूंद चौराहे तक मंगलवार देर रात करीब 10 बजे सर्व समाज के लोगों द्वारा विशाल कैंडल मार्च निकाला गया। यह मार्च बिहार के भोजपुर निवासी भरत भूषण तिवारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बिहार सरकार और प्रशासन पर भरत तिवारी की सुनियोजित हत्या कराने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।

कैंडल मार्च में राष्ट्रवादी ब्राह्मण महासंघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद, जन सामान्य मंच सहित कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि भरत तिवारी का एनकाउंटर नहीं हुआ, बल्कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष पंडित बृज किशोर तिवारी ने कहा कि भरत तिवारी एक समर्पित समाजसेवी थे। कोरोना काल में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मानवता की रक्षा के लिए वैक्सीन अनुसंधान हेतु अपना शरीर दान करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए बिहार से बागेश्वर धाम तक पदयात्रा भी की थी तथा अपने गांव में सभी वर्गों के हितों के लिए संघर्षरत थे।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि भरत तिवारी को शहीद का दर्जा दिया जाए तथा उनके परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। साथ ही पूरे मामले की सीबीआई जांच कराकर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की मांग भी की गई।

कैंडल मार्च में राष्ट्रवादी ब्राह्मण महासंघ युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सलाहकार पंडित पदम नारायण तिवारी, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष पंडित बृज किशोर तिवारी, जिला अध्यक्ष विवेक दीक्षित, जिला संयोजक रवि तिवारी, समाजसेवी सचिन चोटी वाला, राष्ट्रवादी ब्राह्मण महासंघ के जिला अध्यक्ष शोभित त्रिपाठी, कानपुर मंडल युवा मोर्चा अध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। इस दौरान बिहार सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।