War Diaries – ट्रंप ही ईरान युद्ध से जुड़े सभी निर्णय ले रहे हैं : नेतन्याहू

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Washington / वाशिंगटन, Israel इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू / Prime minister Netanyahu ने कहा है कि ईरान युद्ध से जुड़े सभी निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप American President Donald Trump ही ले रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में व्हाइट हाउस White House में हुई बैठक के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू करने के लिए श्री ट्रंप पर दबाव बनाने संबंधी रिपोर्टों को खारिज कर दिया।

श्री ट्रंप ने हालांकि ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने एबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “मुझे नहीं पता कि यह असंभव है या नहीं, लेकिन मैं ईरान की कार्यशैली को लेकर आशंकित हूं। वे हमेशा झूठ बोलते हैं, धोखाधड़ी करते हैं और समय बीतने का इंतजार करते हैं। क्या पर्याप्त कूटनीतिक और आर्थिक दबाव के जरिए इसे बदला जा सकता है? इसका प्रयास किया जा सकता है।”

श्री नेतन्याहू ने पुष्टि की कि व्हाइट हाउस में बंद कमरे में हुई बैठक के बाद श्री ट्रंप ही अमेरिका-इजरायल गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं।

इजरायली प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब युद्ध के छठे महीने में प्रवेश करने के साथ दोनों नेताओं के बीच संबंधों में कुछ तनाव देखा गया है।

श्री नेतन्याहू ने कहा, “सच्चाई यह है कि हम साझेदार हैं, हम सहयोगी हैं। वह वरिष्ठ साझेदार हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह अमेरिका हैं और मैं एक जूनियर साझेदार हूँ। लेकिन मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूँ और जब मुझे अपने देश के हितों तथा सुरक्षा के लिए खड़ा होना होगा, तो मैं ऐसा करूंगा।”

उन्होंने कहा, “मैं हमेशा इस बात की गहरी सराहना करता हूँ कि श्री ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने हमारे उस साझा दुश्मन के खिलाफ हमारा साथ दिया है, जो हम दोनों को तबाह करना चाहता है।”

श्री ट्रंप हाल के सप्ताहों में सार्वजनिक रूप से श्री नेतन्याहू की आलोचना करते रहे हैं, विशेषकर लेबनान को लेकर उनकी नीति पर। उन्होंने श्री नेतन्याहू को ‘पागल’ तक कहा था, हालांकि उन्होंने इजरायल के समर्थन में अमेरिका की केंद्रीय भूमिका पर भी जोर दिया।

श्री नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ मतभेदों संबंधी रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया। श्री वेंस ट्रंप प्रशासन में ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता के प्रमुख समर्थकों में रहे हैं। श्री नेतन्याहू ने उन दावों को भी खारिज किया कि इजरायली प्रशासन युद्ध को अनिश्चितकाल तक खींचना चाहता है या अमेरिका-ईरान कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने श्री ट्रंप को सैन्य अभियान जारी रखने के लिए राजी करने के उद्देश्य से कोई खुफिया जानकारी प्रस्तुत की थी, श्री नेतन्याहू ने कहा, “यह सच नहीं है।”

श्री नेतन्याहू ने पहले अमेरिका के साथ साझेदारी को ‘ग्रेनाइट की दीवार’ बताया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका में इजरायल के प्रति जनसमर्थन में आई गिरावट के लिए सोशल मीडिया और बॉट फार्म के जरिए फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाएं मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

इजरायली प्रधानमंत्री के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईरान के संबंध में तीन संभावित विकल्पों पर चर्चा की, जिनमें कूटनीतिक वार्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी बनाए रखना तथा आगे सैन्य अभियान चलाना शामिल है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय श्री ट्रंप ही करेंगे।

रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में श्री नेतन्याहू ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बनाने की ईरान की क्षमता वैकल्पिक निर्यात मार्गों के विकास के साथ समय के साथ कम हो सकती है।

उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सरकार का प्रमुख उद्देश्य है और चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी ईरानी हमले का इजरायल करारा जवाब देगा।

वेंस, नेतन्याहू की आमने-सामने बैठक, एक-दूसरे की आलोचनाओं पर चर्चा

वाशिंगटन, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन में मंगलवार को बंद कमरे में आमने-सामने बैठक की, जिसमें ईरान के साथ युद्ध और तेहरान के प्रति अमेरिकी नीति को लेकर दोनों नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों पर चर्चा हुई। यह जानकारी इज़रायल और अमेरिका के अधिकारियों ने दी। ब्लेयर हाउस में हुई यह बैठक ऐसे समय हुई जब पिछले कई महीनों से दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। श्री वेंस ट्रंप प्रशासन के भीतर ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान के सबसे प्रमुख समर्थकों में रहे हैं और युद्ध को लेकर श्री नेतन्याहू सरकार के रुख की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी करते रहे हैं।

एक वरिष्ठ इज़रायली अधिकारी के अनुसार, श्री नेतन्याहू ने बैठक के दौरान श्री वेंस द्वारा हाल में इज़रायली सरकार की सार्वजनिक आलोचना और रिपब्लिकन सांसदों के बीच इज़रायल की स्थिति को लेकर जताई गई चिंताओं का मुद्दा उठाया। अधिकारी ने कहा, “यह स्पष्ट और खुली बातचीत थी।” एक अमेरिकी अधिकारी ने भी इस बैठक को “सीधी और स्पष्ट” बातचीत बताया। हालांकि, उपराष्ट्रपति कार्यालय ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के संबंधों में लगातार तनाव बढ़ा है। श्री वेंस को ईरान के संबंध में अमेरिकी नीति तय करने वाले प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है और उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन का खुलकर समर्थन किया था। अधिकारियों के अनुसार, श्री नेतन्याहू निजी तौर पर इस समझौते के विरोधी थे, लेकिन इसके सार्वजनिक रूप से विफल होने की उम्मीद में उन्होंने खुली आलोचना से परहेज किया।

रिपोर्ट के अनुसार, श्री नेतन्याहू ने श्री वेंस की उन टिप्पणियों पर भी अपनी नाराजगी जताई, जिनमें उन पर समझौते को कमजोर करने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति वफादार नहीं रहने के आरोप लगाये गये थे। वहीं, श्री वेंस का कथित तौर पर मानना था कि इज़रायल में श्री नेतन्याहू के सहयोगी और अमेरिका के इज़रायल समर्थक मीडिया संस्थान उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। बैठक में दोनों नेताओं ने युद्ध संचालन को लेकर पहले हुए मतभेदों पर भी चर्चा की। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में हुई एक तनावपूर्ण टेलीफोन वार्ता के दौरान श्री वेंस ने श्री नेतन्याहू के उन आकलनों पर सवाल उठाया था, जिनमें उन्होंने दावा किया था कि ईरान में जल्द ही जनविद्रोह हो सकता है। गत आठ अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद श्री वेंस ट्रंप प्रशासन में ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता जारी रखने के सबसे मुखर समर्थकों में शामिल रहे। उनका तर्क था कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना होना चाहिए, लेकिन इसके लिए उसे लंबे सैन्य संघर्ष में नहीं उलझना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, जून में श्री वेंस ने ईरान के साथ वार्ता का विरोध करने वाले इज़रायली मंत्रियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, “यदि मैं इज़रायली सरकार के मंत्रिमंडल में होता, तो दुनिया में बचे अपने सबसे शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता।” बाद में जो रोगन के पॉडकास्ट में दिये गये एक साक्षात्कार में श्री वेंस ने आरोप लगाया कि इज़रायली सरकार के कुछ सदस्य कूटनीति के बजाय संघर्ष को लंबा खींचने के पक्ष में अमेरिकी नीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। श्री वेंस ने यह दावा भी किया कि दिवंगत वित्त कारोबारी और यौन अपराध में दोषी ठहराए गए जेफ्री एपस्टीन के “इज़रायल की शीर्ष खुफिया एजेंसियों” से संबंध थे। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

ट्रंप ने हमास के निशस्त्रीकरण के ऐतिहासिक समझौते का किया ऐलान

वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमास और अन्य सभी सशस्त्र समूहों के निशस्त्रीकरण के एक ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह समझौता संघर्ष को खत्म करने और उस इलाके में एक नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफ़ॉर्म पर गुरुवार को घोषणा करते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि यह समझौता उनकी अध्यक्षता वाले ‘इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ़ पीस’ द्वारा किया गया है और इसे सावधानीपूर्वक तैयार किए गए चरणों में लागू किया जाएगा।

श्री ट्रंप ने लिखा, “आज, ‘इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ़ पीस’ ने गाज़ा में हमास और अन्य सभी हथियारबंद गुटों के पूरी तरह से निशस्त्रीकरण के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमति बनाई है। यह स्थाई शांति और सुरक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।” श्री ट्रंप ने कहा कि यह समझौता इज़रायल की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए गाज़ा के शासन-प्रणाली को बुनियादी रूप से बदल देगा।

उन्होंने कहा, “यह समझौता गाज़ा में एक नई फ़िलिस्तीनी सरकार के शासन की दिशा में एक अहम कदम है, जो फ़िलिस्तीनियों की मदद के लिए ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ के साथ मिलकर काम करेगी। साथ ही, इज़रायल को वह सुरक्षा मिलेगी जिसका वह हकदार है क्योंकि गाज़ा का इस्तेमाल अब आतंकी हमलों के अड्डे के तौर पर नहीं किया जाएगा।”श्री ट्रंप के अनुसार, यह समझौता चरणों में लागू किया जाएगा। जैसे-जैसे निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी इज़रायली सेनाएं गाज़ा से हट जाएंगी और एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालेगा, जो हाल ही में गठित फ़िलिस्तीनी पुलिस बल के साथ मिलकर काम करेगा।

श्री ट्रंप ने इस बात पर भी बल दिया कि सात अक्टूबर जैसा हमला दोबारा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत, गाज़ा आखिरकार एक ऐसी नई फ़िलिस्तीनी सरकार के हाथों में होगा जो अपने लोगों की सेवा करेगा। इस घटनाक्रम को अपनी शांति पहल में एक अहम पड़ाव बताते हुए श्री ट्रंप ने मिस्र, कतर और तुर्की के साथ-साथ अपने प्रशासन के सदस्यों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस समझौते को कराने में मदद की। अमेरिका और ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ के अधिकारियों ने कहा कि यह समझौता महीनों की बहुत नाज़ुक बातचीत के बाद हुआ है और यह एक बड़ी कामयाबी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसे लागू करना कुछ शर्तों पर निर्भर करेगा और हर चरण पर इसकी पुष्टि की जाएगी।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका ने हर कदम पर इज़रायल के साथ तालमेल बिठाया लेकिन उन्होंने यह भी माना कि इज़रायली अधिकारियों को इस बात पर शक था कि क्या हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ देगा। हालांकि अभी तक न तो हमास और न ही इज़रायली सरकार ने श्री ट्रंप की घोषणा पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी है।

‘टाइम्स ऑफ़ इज़रायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक इज़रायली अधिकारी ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप की अध्यक्षता वाले ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ का 15-सूत्रीय निशस्त्रीकरण प्रस्ताव, गाज़ा को पूरी तरह से हथियार मुक्त करने की इज़रायल की मांगों को पूरा नहीं करता है और यह किसी भी प्रक्रिया के लिए एक ज़रूरी शर्त है इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि समझौता कैसे आगे बढ़ पाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि लागू करने से जुड़ी विस्तृत शर्तें दो हफ़्ते के भीतर जारी होने की उम्मीद है और एक चरण से अगले चरण में तभी बढ़ा जाएगा जब पिछला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा और इसकी पुष्टि हो जाएगी। अक्टूबर 2025 में अमेरिका की मध्यस्थता से इज़रायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बाद, गाज़ा के पुनर्निर्माण और प्रशासन की देखरेख के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की शुरुआत की थी।

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